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जुलाना उपमंडल में शामिल करने के विरोध में उतरे ग्रामीण, डीसी के सामने जताया विरोध

By हरियाणा न्यूज टूडे

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 Villagers came out to protest against inclusion in Julana subdivision

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हरियाणा न्यूज़ जींद : हरियाणा सरकार ने हाल ही में पांच शहरों को उपमंडल का दर्जा देने की घोषणा की है और इसका नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है। जींद जिले के कुछ गांव को जुलाना उपमंडल ( Julana sab-division ) में जोड़ने से ग्रामीणों में रोज बना हुआ है और इसी मांग को लेकर ग्रामीण सोमवार को DC से मिलने जींद पहुंचे। ग्रामीणों ने मांग की है कि उनके गांव को जुलाना उपमंडल में ना जोड़ा जाए, क्योंकि उनके गांव जिला मुख्यालय के करीब हैं। ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद जिला उपायुक्त ने कहा कि यह हाई लेवल का मामला है और इस मांग को वह district level पर नहीं सुलझा सकते इसलिए उनकी मांग को सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा।

सोमवार को अचानक कई गांवों की महिलाएं और पुरुष ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार होकर जींद जिला उपायुक्त कार्यालय में पहुंचते हैं। यह नजारा देखकर जींद प्रशासन के समझ में कुछ नहीं आता और सब भोचके रह जाते हैं। जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचे महावीर, दलवीर, सोमवीर, संदीप, प्रेम, धर्मबीर , भूपेंद्र, रविन्द्र, सावित्री, निहाली, प्रेमों, सोनिया, पूनम इत्यादि ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त से कहा कि जुलाना को उपमंडल का दर्जा मिलना जींद जिले के लिए अच्छी बात है, लेकिन उनके गांव को जुलाना उपमंडल में शामिल करना ग्रामीणों के साथ सरासर अन्याय है। क्योंकि उनके गांव से जुलाना जाने के लिए सीधे तौर पर बस की कोई सुविधा नहीं है और ऐसे में उनके गांव के ग्रामीणों को जुलाना जाने के लिए पहले जींद आना होगा और उसके बाद जुलाना जाना होगा जिससे जुलाना की दूरी 25 से 30 किलोमीटर बैठी है जबकि जींद की दूरी उनके गांव से मात्र 10 से 15 किलोमीटर ही है। 

ग्रामीणों ने बताया कि उनके उपमंडल स्तर से लेकर जिला सत्र के सभी कार्य पहले से ही जींद में हो रहे हैं और जींद उनके गांव के काफी नजदीक है जिसके कारण ग्रामीणों का अक्सर जींद आना जाना रहता है। वह नहीं चाहते कि उनके गांव को जुलाना उपमंडल में जोड़ा जाए बल्कि पहले की तरह ही उनका उपमंडल और जिला जींद में ही रखा जाए। ग्रामीणों ने जिला उपयुक्त डॉ मोहम्मद इमरान रजा को बताया कि जुलाना उपमंडल में उनके गांव शामिल होने से ग्रामीणों का बेस कीमती समय तो खराब होगा ही साथ ही ग्रामीणों की जेब पर आर्थिक बोझ भी पड़ेगा। 

ग्रामीणों ने बताया कि उनके बच्चे हाई शिक्षा लेने के लिए भी जींद में ही आते हैं और ऐसे में उनके रिहायशी प्रमाण पत्र से लेकर जाति प्रमाण पत्र, इनकम प्रमाण पत्र इत्यादि की सुविधा उन्हें एक ही शहर में मिल रही है और अगर जुलाना जाना पड़ गया तो उनकी पढ़ाई बाधित होगी साथ ही उन्हें मानसिक रूप से भी परेशान होना पड़ेगा। इसके अलावा लड़कियों को जुलाना जाने में काफी दिखतों का सामना करना पड़ेगा। 

जुलाना उपमंडल में शामिल करने के विरोध में गांव पडाना, निडाना, ललीत खेड़ा, किनाना इत्यादि कई गांवों के ग्रामीण उतर आए हैं। ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद जिला उपायुक्त डॉक्टर मोहम्मद इमरान रजा ने ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया और कहा कि ग्रामीणों की यह समस्या उनके लेवल की समस्या नहीं है बल्कि हाई लेवल की समस्या है। जुलाना को उपमंडल बनाने का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। ऐसे में वह ग्रामीणों की समस्या को सरकार तक पहुंचा देंगे।

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