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आखिर गृह मंत्री के शहर में भी क्यों नहीं मिल रहा है स्वतंत्रता सेनानी के परिवार को न्याय

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After all, why is the freedom fighter’s family not getting justice even in the Home Minister’s city?

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स्वतंत्रता सेनानी की जमीन पर कब्जा, राह संस्था ने लगाई न्याय की गुहार

Haryana News Today 

राह संस्था के चेयरमैन गृहमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को स्थिति से अवगत करवाया

हरियाणा न्यूज अम्बाला : महान स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त की बम दस्ता टीम के सदस्य रहे स्वतंत्रता सेनानी साधुराम की बेटी के मकान पर उसके सौतेले बेटे व दो नामी बदमाशों सहित कुल चार लोगों ने लंबे समय से कब्जा कर रखा है। इनमें से एक आरोपी जहां हत्या सहित कई मामलों का आरोपी है और वहीं दूसरा अम्बाला के एक बड़े राजनेता से जुड़ाव होने की धमकी देते हुए इस परिवार के लिए जान का खतरा बना हुआ है। 

आरोप है कि ये लोग उनकी तमाम प्रॉपर्टी हड़पने के लिए लंबे समय से शहीद के परिजनों को शारीरिक एवं मानसिक यातनाएं दे रहें हैं। जिसके चलते स्वतंत्रता सेनानी के दामाद को जहां पैरालाइज हो गया है, वहीं बेटी 65 वर्षीय विनोद बाला मौत से भी बदत्तर जिंदगी जीने को मजबूर है। स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सम्मानित करने की कड़ी में जब सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन के पदाधिकारी जब अम्बाला में स्वतंत्रता सेनानी साधुराम की पुत्री विनोद बाला को सम्मानित करने पहुंंचे तो उनकी स्थिति को देखकर उनकी रुह तक कांप गई।

 तब संस्था के पदाधिकारियों ने इस मामले में स्वतंत्रता सेनानी के परिवार को न्याय दिलवाने के लिए तीन लोगों की जिम्मेवारी तय की है। मामले में सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन के चेयरमैन नरेश सेलपाड़ की मदद से विनोद बाला व बलदेव सिंह ने अपनी जान व मान की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास गुहार लगाई है। इसी प्रकार इस मामले की लिखित शिकायत प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज, हरियाणा पुलिस के डीजीपी, अम्बाला रेंज के आईजी व एसपी कार्यालय अम्बाला से गुहार लगाई है।

ये है पीडि़त परिवार की शिकायत का मसौदा:-

मैं विनोद बाला (उम्र 65 वर्ष) पुत्री स्वतंत्रता सेनानी साधुराम उर्फ बच्चु व पत्नी बलदेव सिंह (उम्र 70 वर्ष) गांव जण्डली/हाल नाम लक्ष्मी नगर रोड नजदीक टयूबवेल नंबर एक, जण्डली अम्बाला निवासी आपसे अनुरोध करती हंू कि मैंने अपने खून पसीने की कमाई से एक मकान खरीदा था। जिस पर हमारे सौतेले बेटे आशीष, उसके दो रिश्तदारों (कई मामलों में आपराधिक मामलों में आरोपियों ) सहित कुल चार लोगों ने कब्जा कर रखा है। साथ ही वो हमें मारते पिटते हैं, जान से मारने की धमकी देते हैं और यह मकान व दूसरी जायदाद अपने नाम करने का दबाव डालते हैं। इन सभी इरादा हमें जान से मार कर हमारी जमीन-जायदाद हथियाना है। जिसके कारण हमेशा हमारी जान का खतरा बना हुआ है। उसके कारण ही मेरी व मेरे पति की मानसिक व  शारीरिक हालात खराब हो गई है। इसलिए आप से अनुरोध है कि हमें हमारा मकान व न्याय दिलवाने की कृपा करे।

सौतला बेटा करता हैं बेरहमी से पिटाई:-

बकौल स्वतंत्रता सेनानी साधुराम की बेटी विनोद कुमारी पोपर्टी के लालच में उनका सौतेला बेटा आशीष उनके पति 70 वर्षीय बलदेव सिंह की चप्पल व जूतों से पिटाई करता है व सर्दी में उसे जबरदस्ती से ठंडे पानी से नहलाता था। जिसके कारण बलदेव सिंह को पैरालाइज हो गया है।

अदालत में भी जीत चुके हैं केस:-

स्वतंत्रता सेनानी की 65 वर्षीय बेटी विनोद बाला के अनुसार इस मकान को लेकर एडीसी साहब की अदालत में एक केस चला था। जिसमें अदालत ने संबंधित केस का फैसला 30 मार्च 2021 को उनके  हक में दिया था। जिसमें आशीष व दूसरे सभी चारों को यह मकान 30 जून 2021 से पहले यह मकान खाली करना था। मगर उनकी उम्र की अधिकता के कारण आरोपी मकान खाली करना तो दूर उन्हें मारने व पीटने लगे हैं।

क्या चाहती हैं विनोद बाला

यह है कि मुझे एक मकान जहां मेरी मां ने उपहार में दिया था, वहीं दूसरा मकान मैने अपनी कमाई से खरीदा था। हम यू लक्ष्मी नगर कॉलोनी जण्डली अम्बाला शहर नजदीक मॉर्निग गलोरी स्कूल वाले मकान में गरीब व जरूरतमंद बच्चों या बुजुर्गों के लिए एक आश्रम बनाना चाहते हैं, जिसमें कि हमारे जैसे लाचार व पीडि़त लोगों को आश्रय मिल सके। इसलिए हमारे मकान को अलिवंब खाली करवाया जाए।

आखिर कौन थे स्वतंत्रता सेनानी साधुराम:-

अमर शहीद भगत सिंह, दुर्गा भाभी व आजाद सिंह जैसे क्रांतिकारियों को अपना आदर्श मानने वाले स्वतंत्रता सेनानी साधुराम ने बटुकेश्वर दत्त की बम दस्ता टीम में सक्रिय भूमिका निभाई थी। वो इस टीम में सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी थे। वर्ष 1940 में बम बनाते समय एक बम उनके हाथ में ही फट गया था। जिसमें उनका एक हाथ पूर्णरुप से क्षतिग्रस्त हो गया था। स्वतंत्रता सेनानी साधुराम सत्याग्रह आंदोलन व भारत छोड़ो आंदोलनों का हिस्सा बने रहे। इसी कड़ी में 10 फरवरी 1941 को सरकार विरोधी भाषण देने की सजा के तौर पर उन्हें गिरफ्तार किया और 1 साल तक जेल में रखा गया। इसी प्रकार वर्ष 1942 में 5 जून और 15 अगस्त को फिर से गिरफ्तार किया। इस दौरान वो स्वतंत्रता सेनानी लाला बलवंत राय तायल व अन्य अग्रिम पक्ति के स्वतंत्रता सेनानियों के साथ वो सेंट्रल जेल लाहौर व मुल्तान सहित देश की अलग-अलग जेलों में करीब छह वर्ष तक बंद रहे। आजादी के इस नायक को तीन ताम्र पत्रों व कई अवार्डों से संयुक्त पंजाब व हरियाणा सरकारों द्वारा नवाजा गया।

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इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए राह संस्था के चेयरमैन नरेश सेलपाड़ से उनके फोन नंम्बर 9896999911 पर संपंर्क किया जा सकता है।

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