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Hansi News: सास-बहू के घरेलू क्लेश, सिसाय में बहुओं की प्रताड़ना से तंग आकर सास ने खाया जहर, मौत

By sunilkohar

Updated On:

Narnaund News: पाली गांव में हादसा, सैर कर रही महिलाओं को मोटरसाइकिल ने मारी टक्कर

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Sisai suicide case: मानसिक उत्पीड़न और ‘दहेज की धमकी’ का खौफ: क्या अब बेटों की शादी ही बनती जा रही है परिवारों के लिए काल?

Hansi News : हिंदू समाज में विवाह को दो परिवारों का पवित्र मिलन माना जाता है, लेकिन हिसार के सिसाय कालिरावण गांव में जो घटित हुआ, उसने एक पूरे हंसते-खेलते परिवार को उजाड़कर रख दिया है। घर में दो बहुएं आईं तो खुशियों की उम्मीद थी, लेकिन महज डेढ़ साल के भीतर वही शादी एक 53 वर्षीय मां के लिए खौफ और मौत की वजह बन गई।

झूठे मामलों में फंसाने की धमकियों और रोजाना के मानसिक दंश से टूटकर शनिवार सुबह 53 वर्षीय कमलेश ने गेहूं में रखी सल्फास निगल ली। हिसार के जिंदल अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में उनकी सांसें टूट गईं—लेकिन टूटने से पहले उन्होंने उन चेहरों को उजागर कर दिया जिनके तानों और दबाव ने उन्हें तिल-तिल मरने पर मजबूर किया।

‘तुम्हारी छाती पर मूंग दलेगी’—संवाद नहीं, सीधे मानसिक प्रहार

यह मामला सिर्फ आम सास-बहू के घरेलू क्लेश का नहीं है, बल्कि उस सुनियोजित ब्लैकमेलिंग और सामाजिक खौफ का है, जिसमें पूरा ससुराल पक्ष घिरता चला गया। मृतका के पति भूपेंद्र (53) द्वारा पुलिस में दर्ज कराए गए बयानों के मुताबिक, 28 मार्च 2025 को उनके दो बेटों (राकेश व पवन) की शादी गांव बैरियां की दो सगी बहनों (ज्योति व पूनम) से हुई थी।

आरोप है कि विवाह के 2-3 महीने बाद ही दोनों बहुओं ने घर का काम ठप कर दिया। बात-बात पर अपनी मां रानी, भाई दीपक और फतेहाबाद (समैण) निवासी अपनी नानी से फोन करवाकर सास को “झूठे दहेज केस में फंसाकर जेल भिजवाने” की धमकियां दी जाने लगीं। भारतीय कानून में महिलाओं के लिए बने सुरक्षा कवच को हथियार बनाकर बुजुर्ग सास को दिन-रात डराया गया।

घरेलू हिंसा और कलह का स्तर इस कदर था कि 4 महीने पहले बड़ी बहू द्वारा शराब पीकर हंगामा करने तक की नौबत आ गई थी। जब मामले को सुलझाने के लिए पंचायत और रिश्तेदारों की मौजूदगी में 14 सितंबर को बातचीत रखी गई, तो बहू के भाई दीपक ने मिन्नतें करती सास के सामने साफ कह दिया—“दोनों बहनें यहीं रहेंगी और तुम्हारी छाती पर मूंग दलेंगी।”

‘मुझे इनके तानों ने मार डाला…’—मौत से पहले सास का आखिरी बयान

19 सितंबर की सुबह करीब 8 बजे जब प्रताड़ना सहने की हद पार हो गई, तो कमलेश ने गेहूं की टंकी से सल्फास का पाउडर निकालकर खा लिया।

जब पति भूपेंद्र, बेटा पवन और ग्रामीण उन्हें एंबुलेंस/गाड़ी में लेकर जिंदल अस्पताल भाग रहे थे, तब तड़पती हुई कमलेश ने आखिरी शब्द कहे:

“मैं दोनों बहुओं ज्योति-पूनम, उनकी मां रानी, भाई दीपक और उनकी नानी के तानों व झूठे केस के दबाव से तंग आकर जान दे रही हूं।”

इलाज के दौरान अस्पताल में कमलेश ने दम तोड़ दिया।

कानूनी शिकंजे में पूरा मायका पक्ष

फिलहाल इस मामले ने समाज के उस काले पहलू को उजागर किया है, जहां कानून के डर का इस्तेमाल कर बुजुर्गों को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ा जा रहा है कि वे मौत को चुन रहे हैं। मृतका के पति ने पुलिस के पास गुहार लगाई है कि:

  • बड़ी बहू ज्योति व छोटी बहू पूनम

  • बहुओं का भाई दीपक व मां रानी (निवासी बैरियां, हिसार)

  • बहुओं की नानी (निवासी समैण, फतेहाबाद)

इन सभी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to Suicide) और साजिश रचने के तहत कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर जांच शुरू कर दी है।

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