फाइनेंस कर्मचारी किसान के घर ताला लगाने पहुंचे तो किसान यूनियन ने लौटाया बेरिंग
हरियाणा न्यूज ( सुनील कोहाड़ ) नारनौंद : गांव मदनहेड़ी में फाइनेंस कंपनी की जबरन ताला लगाने की कार्रवाई का किसान संगठनों ने किया विरोध किया तो किसान नेताओं के विरोध के बाद बैरंग लौटा प्रशासन। गांव मदनहेड़ी में एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी पुलिस कर्मचारियों को साथ लेकर ग्रामीण सुनिल और लीला चहल के घर पर जबरन ताला लगाने पहुंचे। इसकी सूचना मिलते ही भारतीय किसान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर तथा भारतीय किसान मजदूर समिति के महासचिव धर्मपाल बड़ाला के नेतृत्व में किसान-मजदूर संगठनों की पूरी टीम मौके पर पहुंची और इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया।
किसान नेताओं ने फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन से लंबी चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर किसी परिवार पर आर्थिक संकट है, तो क्या उसकी सजा परिवार के बच्चों को दी जाएगी। उन मासूम बच्चों का क्या कसूर है, जो इस घर में रहते हैं। आखिर किस कानून के तहत किसी परिवार को उसके सिर की छत से वंचित करने की कार्रवाई की जा रही है। किसान नेताओं ने विरोध जताते हुए नारेबाजी भी की।
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि किसी भी आर्थिक विवाद का समाधान कानून और न्यायपूर्ण प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। गरीब और मेहनतकश परिवारों को डराकर या दबाव बनाकर उनके घरों से बेदखल करने की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि किसान-मजदूर संगठन केवल खेतों और फसलों की लड़ाई नहीं लड़ते, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के साथ खड़े हैं, जिसके साथ अन्याय होता है। जब किसी परिवार के सामने रोजी-रोटी और बच्चों के भविष्य का संकट खड़ा हो, तब समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके साथ मजबूती से खड़ा हो।
किसान नेताओं के कड़े विरोध और सवाल-जवाब के बाद फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों को घर पर ताला लगाए बिना ही लौटना पड़ा और प्रशासन को भी बैरंग वापस जाना पड़ा। इस दौरान संदीप चहल, बबलू खरड़, कुलवंत देपल, दलबीर खरड़, सोमबीर भगाना, जोगेंद्र मायड़ सहित अनेक किसान-मजदूर साथी मौजूद रहे।
किसान संगठनों का स्पष्ट संदेश
गरीब के घर की चौखट पर अन्याय होगा, तो किसान-मजदूर की आवाज बंद करने के लिए यूनियन हमेशा तैयार रहेगी। किसान नेताओं ने कहा कि कर्ज और आर्थिक समस्याओं का समाधान मानवीय दृष्टिकोण, न्यायपूर्ण प्रक्रिया और कानून के दायरे में होना चाहिए। किसी भी परिवार की गरिमा, बच्चों के भविष्य और सम्मानजनक जीवन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।









