Sarpanch accused of embezzlement, proposal passed without signature of Panchayat, complaint in CM window
पंचों ने मांगा कार्यों का हिसाब तो लिखा 20 हजार बीडीपीओ, आठ प्रतिशत कमीशन जेई व सचिव को दिया
हरियाणा न्यूज करनाल : पंचायत एवं विकास विभाग में अक्सर कमीशन के खेल के आरोप लगते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला गांव ब्रास खुर्द का सामने आया है जिसमें विकास कार्यों में संदेह होने पर जब ग्राम पंचों द्वारा सरपंच से कार्यों का हिसाब मांगा तो सरपंच की ओर से लिखित में हिसाब देते हुए ग्राम सचिव से लेकर जेई, बीडीपीओ व अन्य एक महिला कर्मचारी को कमीशन देने का भी जिक्र किया गया। मामले को लेकर ग्राम पंच प्रतिनिधि ने पंचायती राशि में गबन व दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए सीएम विंडो में शिकायत की है।
वार्ड एक से पंच सुमन के प्रतिनिधि पवन कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में सरपंच द्वारा कराए गए विकास कार्यों को परखा तो संदेह हुआ कि सरकार के पैसों का दुरुपयोग किया गया है। सरपंच से उसने व अन्य पंचों ने अगस्त में हिसाब मांगा तो उसने फंड न मिलने की बात कही। जबकि अधिकारियों ने बताया कि पंचायत के खाते से 17.50 लाख रुपये निकाले जा चुके हैं। मामला खुलने पर सरपंच ने वार्ड दो के पंच को लिखित में हिसाब दिया। जिसमें सीधे तौर पर पंचायत की राशि की गड़बड़ी सामने आ रही है।
बीडीपीओ, जेई व सचिव को कमीशन शिकायतकर्ता ने बताया कि सरपंच द्वारा दिए गए हिसाब में अधिकारी-कर्मचारियों को विकास कार्य कराने की आड़ में कमीशन देने की बात कही है। इसमें सरपंच ने लिखा कि गांव में गली-नालियों की सफाई आदि पर 1.10 लाख, स्वागत बोर्ड, बस क्यू शेल्टर आदि पर 1.64 लाख, नया नलका, रिपेयर-मोटर पर 1.65 लाख, स्वागत गेट दो लाख खर्च किए। दो लाख जाल, गली-नाली रिपेयर आदि पर खर्च हुए।
चार प्रतिशत जेई और चार प्रतिशत कमीशन ग्राम सचिव को 1.61 लाख रुपये दी गई। बीडीपीओ को 20 हजार और खंड कार्यालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी को बिल चढ़ाने की एवज में 14 हजार रुपये दिए। सरपंच ने अधिकारी-कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी राशि में धोखाधड़ी की है। बता दें कि कुछ माह पहले नीलोखेड़ी में हुए सरपंचों के समारोह में भी सरपंचों ने अधिकारियों पर कमीशन मांगने के आरोप नीलोखेड़ी विधायक के सामने लगाए थे।
पंचों के साइन बिना प्रस्ताव पास:
पवन ने बताया कि ग्राम पंचायत का कार्यवाही रजिस्टर चेक किया तो उसमें भी सचिव के मिलीभगत सामने आई। इस में बिना कुछ पंचों के हस्ताक्षर के प्रस्ताव पास करा लिए गए। जबकि नकल प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर हैं और इन प्रस्तावों को ग्राम सचिव ने सत्यापित भी किया हुआ है। जिसकी नकल कापी भी सबूत के तौर पर उनके पास है। इसकी जांच की जाए कि कार्यवाही रजिस्टर में बिना पंचों के हस्ताक्षर के सचिव ने कैसे इसको सत्यापित कर नियमों को दरकिनार किया गया।
सरपंच विनोद कुमार का कहना है कि उस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। पंचायत की राशि को उचित कार्यों और नियमानुसार खर्च किया गया है।
ये कहते हैं अधिकारी : जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी राजबीर खंडिया ने कहा कि विभाग में प्रत्येक कार्य नियमानुसार और पारदर्शिता के साथ किया जाता है। पंचायती राशि में गबन या धोखाधड़ी करने व कर्मचारियों पर लगे आरोप की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा। उसको किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।