Lohari Ragho Ramlila में उमड़े श्रद्धालु
Narnaund News: लोहारी राघो की 77 साल पुरानी ऐतिहासिक रामलीला में नारद लीला का जीवंत मंचन, राजकुमारी विश्व मोहिनी के स्वयंवर से लेकर भगवान विष्णु के श्राप तक का प्रसंग देखकर भाव-विभोर हुए दर्शक।
नारनौंद। हरियाणा के गांव लोहारी राघो में चल रही 77 साल पुरानी ऐतिहासिक रामलीला के दूसरे दिन भक्ति, हास्य और रोमांच से भरपूर नारद लीला का मंचन किया गया। श्रीरामा रामलीला क्लब के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से पौराणिक प्रसंगों को जीवंत कर दिया। नारद मुनि के अहंकार और भगवान विष्णु की लीला पर आधारित इस प्रसंग ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। पूरा पंडाल श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगे नजर आए।
तपस्या से बढ़ा नारद का अहंकार, इंद्र की चाल हुई नाकाम

नारद लीला की शुरुआत भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ हुई। मंचन में दिखाया गया कि देवर्षि नारद की कठोर तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है। उनकी तपस्या भंग करने के लिए इंद्र रंभा, उर्वशी और कामदेव को भेजते हैं, लेकिन उनके सभी प्रयास विफल हो जाते हैं।
तपस्या में सफलता मिलने के बाद नारद मुनि के मन में अहंकार पैदा हो जाता है। अपनी उपलब्धि का बखान करने के लिए वे भगवान शिव और ब्रह्मा जी के पास पहुंचते हैं। भगवान शिव उन्हें अपनी तपस्या की सफलता का बखान भगवान विष्णु के सामने न करने की सलाह देते हैं, लेकिन नारद उनकी बात नहीं मानते।
राजकुमारी विश्व मोहिनी को देखकर मोहित हुए नारद
लीला का सबसे रोचक प्रसंग उस समय सामने आया, जब भगवान विष्णु नारद मुनि को राजा शीलनिधि की पुत्री राजकुमारी विश्व मोहिनी के स्वयंवर में ले जाते हैं। राजकुमारी को देखकर नारद मुनि मोहित हो जाते हैं और भगवान विष्णु से उनके समान स्वरूप यानी ‘हरि’ का रूप मांगते हैं।
भगवान विष्णु उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें वानर जैसा स्वरूप प्रदान कर देते हैं। स्वयंवर में अपने रूप के कारण नारद मुनि को उपहास का सामना करना पड़ता है, जबकि राजकुमारी विश्व मोहिनी भगवान विष्णु को वरमाला पहना देती हैं। इस दृश्य को कलाकारों ने प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया, जिससे दर्शकों को भक्ति के साथ हास्य का भी अनुभव हुआ।
नारद ने भगवान विष्णु को दिया श्राप, फिर खुला लीला का रहस्य
स्वयंवर में हुए घटनाक्रम से आहत नारद मुनि भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं कि जिस प्रकार उन्हें नारी वियोग की पीड़ा सहनी पड़ रही है, उसी प्रकार भगवान विष्णु को भी पृथ्वी पर जन्म लेकर स्त्री वियोग सहना पड़ेगा और वानरों की सहायता से जंगलों में भटकना पड़ेगा।
इसके बाद भगवान विष्णु नारद मुनि को पूरी सच्चाई बताते हैं। वे समझाते हैं कि ‘हरि’ शब्द का अर्थ उनके द्वारपाल से भी जुड़ा है, जिसका स्वरूप वानर जैसा है। नारद मुनि ने जब हरि जैसा रूप मांगा, तो उन्हें उनकी मांग के अनुसार ही वानर स्वरूप मिला।
सच्चाई सामने आने पर नारद मुनि को अपनी गलती का एहसास होता है। उनका अहंकार टूट जाता है और वे पश्चाताप करने लगते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने संदेश दिया कि ज्ञान, तपस्या और उपलब्धियों के बावजूद मनुष्य को अहंकार से दूर रहना चाहिए। अहंकार विवेक को कमजोर करता है, जबकि विनम्रता व्यक्ति को सही मार्ग दिखाती है।
77 साल पुरानी रामलीला में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
गांव लोहारी राघो की ऐतिहासिक रामलीला से ग्रामीणों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा जुड़ी हुई है। दूसरे दिन नारद लीला के मंचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से दर्शकों को पौराणिक कथा से जोड़े रखा।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कलाकार जिंदर मुंडा, गोपी, ईश्वर, कैशियर जयपाल, राजकुमार सेठी, विजय कुमार, हैप्पी भयाना, रवि कंबोज, रामप्रकाश उर्फ टीटी मलिक, नंबरदार कृष्ण भ्याणा, सूबे सिंह और रामगोपाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति तथा श्रद्धालु उपस्थित रहे।













1 thought on “नारद के घमंड पर भारी पड़ी श्रीहरि की लीला, वानर रूप मिलने पर हुआ ऐसा घटनाक्रम; Narnaund News”