NIILM University PI-RAHI MoU : विद्यार्थियों को शोध और स्टार्टअप के मिलेंगे नए अवसर
कैथल में विज्ञान, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने की पहल; शिक्षकों व शोधकर्ताओं को भी मिल सकती है तकनीकी संसाधनों और पेटेंट मार्गदर्शन की सुविधा
कैथल, हरियाणा न्यूज ( सुनील कोहाड़ ) । हरियाणा के कैथल स्थित NIILM विश्वविद्यालय ने शोध, विज्ञान एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय ने पंजाब विश्वविद्यालय–आईआईटी रोपड़ रीजनल एक्सीलरेटर फॉर होलिस्टिक इनोवेशन्स फाउंडेशन (PI-RAHI) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को नए विचारों पर काम करने, तकनीकी समाधान विकसित करने तथा स्टार्टअप की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इस समझौते पर NIILM विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. सी. कुहाड़ और PI-RAHI के निदेशक प्रो. रजत संधीर ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. आर. के. गुप्ता और प्रो. नवीन कुमार गुप्ता साक्षी के रूप में मौजूद रहे। समझौते का आदान-प्रदान विश्वविद्यालय के चेयरमैन की उपस्थिति में किया गया।
शोध और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

NIILM विश्वविद्यालय और PI-RAHI के बीच हुआ यह समझौता शैक्षणिक शोध को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को अपने नए विचारों को विकसित करने, तकनीकी नवाचार पर काम करने तथा संभावित उद्यमों और स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
समझौते के तहत संबंधित योजनाओं और पात्रता के अनुसार वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं, तकनीकी संसाधनों, पेटेंट संबंधी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता के संभावित अवसरों तक पहुंच बनाने में भी सहयोग मिल सकता है। इससे शोधकर्ताओं को अपने शोध को केवल अकादमिक स्तर तक सीमित रखने के बजाय उपयोगी तकनीक और उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
कृषि से लेकर हरित ऊर्जा तक नए अवसर
PI-RAHI की गतिविधियों में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वदेशी तकनीक, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में शोध एवं नवाचार के जरिए समाज और उद्योगों की वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने की संभावनाएं हैं।
विश्वविद्यालय और PI-RAHI के बीच सहयोग से इन क्षेत्रों में नए शोध विचारों को आगे बढ़ाने और तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है। इससे विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक सोच को व्यावहारिक परियोजनाओं में बदलने का अवसर भी मिल सकता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में पहल
वर्तमान समय में शिक्षा संस्थानों के लिए शोध, तकनीक और उद्यमिता को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में NIILM विश्वविद्यालय और PI-RAHI का यह समझौता अकादमिक संस्थानों तथा नवाचार से जुड़े संसाधनों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
इस सहयोग से विश्वविद्यालय में शोध आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने, विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की भावना विकसित होने और नई तकनीकों के माध्यम से सामाजिक एवं औद्योगिक समस्याओं के समाधान तलाशने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
कुल मिलाकर, NIILM विश्वविद्यालय और PI-RAHI के बीच हुआ यह समझौता शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में तकनीकी विकास, उपयोगी शोध और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देने में योगदान मिलने की उम्मीद है।














