राखीगढ़ी महोत्सव में दर्शन बड़े और काम छोटे : महोत्सव से नाराज होकर वापस लौट रहे पर्यटक
हरियाणा न्यूज ( सुनील कोहाड़ ) नारनौंद : आईकॉनिक साइट राखीगढ़ी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है और सात दिवसीय राखीगढ़ी महोत्सव का आयोजन चल रहा है। इसमें आने वाले पर्यटक निराश होकर वापस लौट रहे हैं। बोले की दर्शन बड़े और काम छोटे वाले कहावत यहां पर सटीक बैठती है। क्योंकि अवशेषों के देखने के नाम पर एक टीलें को छोड़कर सभी टिलों को पॉलिथीन से ढका हुआ है। पर्यटकों ने सरकार से मांग की है कि इन टिलों को देखने के लिए खोला जाए ताकि बाहर से आने वाले लोगों को निराश होकर ना लौटना पड़े।
सरस्वती सिंधु सभ्यता को लेकर राखीगढ़ी का महत्व पूरी दुनिया में है और इसी महत्व को लेकर सरकार ने राखीगढ़ी में राखीगढ़ी महोत्सव की शुरुआत की है ताकि इसकी पहचान देश-विदेश तक पहुंच सके। महोत्सव 19 अक्टूबर से शुरू हो चुका है जो की 25 अक्टूबर तक चलेगा। इसको देखने के लिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से यहां पर पर्यटक पहुंच रहे हैं लेकिन जब वह टीलों पर पहुंचते हैं तो उन्हें निराश होना पड़ता है।
पैदल चलकर टीलों पर चढ़े लेकिन ढके होने की वजह से कुछ दिखाई नहीं दिया
हिसार से पहुंचे पर्यटक रमेश कुमार, रणधीर, वजीर, कुलबीर, मैना, प्रियंका नहीं बताया कि उनको पिछले काफी दिनों से काफी हसरत थी कि वह राखीगढ़ी में जाकर पुरानी सभ्यता को देख सके। राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान यहां पर आने का अवसर मिला लेकिन यहां पर आने का कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि खोदाई के दौरान निकले अवशेषों को देखना था। सिर्फ टीला नंबर तीन पर ही एक साइट को खुला छोड़ा हुआ है। बाकी सभी टिलों पर खोदाई करने के बाद पॉलिथीन से इन साइट को ढक दिया गया है। जब सरकार का इतना बड़ा महोत्सव चल रहा है तो इस दौरान सरकार ने इन सभी साइटों को खुला रखवाना चाहिए था ताकि पर्यटक सभी चीजों को अच्छी प्रकार से देख सकें यहां पर आने का कोई फायदा नहीं हुआ सरकार महोत्सव के नाम पर लोगों के साथ छलावा करने का काम कर रही है।
कुछ पर्यटकों को नहीं बताया कि मीडिया में ज्यादा प्रचार किया जाता है जबकि यहां पर धरती पर देखने को कुछ नहीं है। सरकार को सबसे पहले इन साइटों को खुला रखवाना चाहिए ताकि बाहर से आने वाले लोग इसके महत्व के बारे में ज्ञान प्राप्त कर सके। प्रशासन की तरफ से काफी खामियां इस महोत्सव में देखने को मिल रही हैं।
हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार ने बताया कि खोदाई के बाद पुरातत्व विभाग की तरफ से इन साइटों को सुरक्षित रखने के लिए ढक दिया जाता है। काफी पर्यटक इनको खोलने की मांग कर रहे हैं। इसके बारे में उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।









