जन्मजात हृदय रोग, मुफ्त सर्जरी के बाद स्वस्थ हुआ मिलकपुर का मासूम वीरन
Hansi News: नारनौंद, 20 सितंबर। समय पर बीमारी की पहचान किसी बच्चे के लिए कितनी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, इसका उदाहरण नारनौंद क्षेत्र के गांव मिलकपुर निवासी मासूम वीरन की कहानी है। सामान्य स्वास्थ्य जांच के दौरान वीरन में जन्मजात हृदय रोग की आशंका सामने आई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसे आगे की जांच और उपचार के लिए रेफर किया। विशेषज्ञ चिकित्सकों के उपचार और सफल हृदय सर्जरी के बाद अब वीरन के स्वास्थ्य में सुधार है और वह सामान्य जीवन की ओर बढ़ रहा है।
वीरन पुत्र बलिंदर की स्वास्थ्य समस्या की पहचान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत हुई। स्वास्थ्य विभाग की टीम बच्चों की नियमित जांच कर रही थी। इसी दौरान चिकित्सकीय जांच में वीरन के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर समस्या की आशंका हुई। टीम ने देरी किए बिना बच्चे को आगे की जांच के लिए सब-डिविजनल सिविल अस्पताल, नारनौंद भेजा।
जांच के बाद सामने आई दिल की बीमारी
नारनौंद अस्पताल में चिकित्सकों ने वीरन की आवश्यक जांच की। जांच में उसके जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि हुई। बच्चे की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने विशेषज्ञ उपचार की प्रक्रिया शुरू की और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उसे उच्च स्वास्थ्य संस्थान में उपचार के लिए रेफर किया।
इसके बाद वीरन को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार मिला। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसकी हृदय सर्जरी कराई गई। सर्जरी सफल रहने के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में लगातार सुधार देखा गया।
परिवार पर नहीं पड़ा इलाज का आर्थिक बोझ
वीरन के परिवार के लिए यह राहत की बात रही कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उसके उपचार और सर्जरी की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। गंभीर बीमारी के इलाज का खर्च परिवार के लिए बड़ी चिंता बन सकता था, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से उपचार मिलने से परिजनों को आर्थिक राहत मिली।
सर्जरी के बाद जब वीरन की हालत में सुधार हुआ तो परिवार में खुशी का माहौल बन गया। परिजनों ने समय रहते बीमारी की पहचान करने और उपचार उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग का आभार जताया।
बच्चों की नियमित जांच क्यों है जरूरी?
सीएमओ डॉ. राहुल बुद्धिराजा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाती है। जांच के दौरान किसी बच्चे में जन्मजात विकार या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या के संकेत मिलने पर उसे आगे की जांच और उपचार के लिए निर्धारित स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाता है।
उन्होंने बताया कि आरबीएसके के माध्यम से जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान की जाती है। इनमें जन्मजात विकार, हृदय रोग, आंखों और सुनने से जुड़ी समस्याएं, पोषण संबंधी कमियां तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें अभिभावक
सीएमओ ने अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को बार-बार परेशानी होती है, सांस लेने में दिक्कत रहती है, वह जल्दी थक जाता है या कमजोरी जैसे असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से होने वाली नियमित जांच में अभिभावकों का सहयोग भी जरूरी है, क्योंकि कई बार बच्चों में बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य नजर आते हैं। ऐसे में समय पर जांच से गंभीर स्वास्थ्य समस्या की पहचान कर उपचार शुरू किया जा सकता है।
समय पर जांच बनी वीरन के लिए उम्मीद
मिलकपुर के वीरन के मामले में भी नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान सामने आई समस्या ने आगे के उपचार का रास्ता खोला। समय पर बीमारी की पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार और सफल सर्जरी के बाद अब वह स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ रहा है। उसकी कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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