कुएं से पानी निकालने वाला डोल, लकड़ी का उखल, चक्की और पुराने बाट बने आकर्षण, बुधवार से प्रदर्शित की जाएगी प्राचीन मुद्रा
हरियाणा न्यूज ( सुनील कोहाड़ ) नारनौंद : अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव में जहां एक ओर सभ्यता की समृद्ध विरासत, ऐतिहासिक नगर नियोजन और प्राचीन जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली पुरानी वस्तुएं भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। महोत्सव में लगाई गई रंगा धरोहर स्टॉल पर प्राचीन घरेलू उपकरणों, पारंपरिक कृषि एवं दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुओं को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। स्टॉल पर प्रदर्शित लकड़ी का उखल, प्राचीन चक्की, कुएं से पानी निकालने वाला डोल, मिट्टी के बर्तन, लालटेन और पुराने समय में वजन मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले बाट लोगों की जिज्ञासा बढ़ा रहे हैं।
रंगा धरोहर स्टॉल पर प्राचीन वस्तुओं का ऐसा संग्रह प्रदर्शित किया गया है, जो लोगों को पुराने समय की जीवनशैली और पारंपरिक तौर-तरीकों से परिचित कराता है। स्टॉल पर पहुंचने वाले पर्यटक इन वस्तुओं को न केवल उत्सुकता से देख रहे हैं, बल्कि इनके इस्तेमाल और ऐतिहासिक महत्व के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं। आधुनिक सुविधाओं के दौर में इन पारंपरिक वस्तुओं को देखकर पर्यटकों को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि पहले के समय में लोग घरेलू कार्यों, खेती-बाड़ी, पानी की व्यवस्था और अन्य दैनिक जरूरतों को किस प्रकार पूरा करते थे।
स्टॉल संचालक सत्यवान रंगा ने बताया कि अब तक हजारों लोग स्टॉल पर प्रदर्शित ऐतिहासिक एवं पारंपरिक वस्तुओं का अवलोकन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि महोत्सव में आने वाले लोग इन वस्तुओं को देखकर काफी उत्साहित हैं। विशेष रूप से पुरानी पीढ़ी से जुड़ी वस्तुओं को देखकर लोग अपने पुराने अनुभवों को याद कर रहे हैं, जबकि युवा पीढ़ी इनके माध्यम से पारंपरिक जीवनशैली को समझने का प्रयास कर रही है। पर्यटक इन प्राचीन धरोहरों के साथ सेल्फी लेकर महोत्सव की यादों को भी संजो रहे हैं।
पारंपरिक जीवनशैली की झलक दिखा रही हैं प्राचीन वस्तुएं

धरोहर स्टॉल पर कुएं से पानी निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाला ढोल, मिट्टी का पात्र, लालटेन, बड़े-बड़े टोकने, टोकनी, घोड़े की काठी, पीतल के बर्तन और अन्य पारंपरिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। इसके साथ ही सेर और आधा सेर के बाट सहित पुराने समय में वजन मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले बाट भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। ये वस्तुएं उस दौर की याद दिलाती हैं, जब घरेलू कामकाज से लेकर बाजार में खरीद-फरोख्त तक के लिए पारंपरिक उपकरणों और माप-तौल की व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जाता था।
लकड़ी का उखल और पुरानी चक्की भी स्टॉल के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। पहले के समय में अनाज को कूटने, पीसने और भोजन तैयार करने जैसे कार्यों में इन उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। आज मशीनों और आधुनिक उपकरणों ने इनका स्थान काफी हद तक ले लिया है, लेकिन इनका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व अब भी बरकरार है। महोत्सव में इन वस्तुओं का प्रदर्शन लोगों को बीते समय की यादों से जोड़ने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय विरासत के संरक्षण का संदेश भी दे रहा है।
प्राचीन करेंसी और हड़प्पा कालीन चक्की भी होगी प्रदर्शित
स्टॉल संचालक सत्यवान रंगा ने बताया कि पर्यटकों को प्राचीन इतिहास से जुड़ी और अधिक जानकारी उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से जल् ही स्टॉल पर कौड़ी से लेकर रुपये तक की पुरानी मुद्रा भी प्रदर्शित की जाएगी। इससे पर्यटकों को पुराने समय में लेन-देन और मुद्रा के विभिन्न स्वरूपों को समझने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त हड़प्पा कालीन एक पाट वाली पत्थर की आटा चक्की भी स्टॉल पर रखी जाएगी, जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि स्टॉल पर पुरानी वस्तुओं को एक साथ प्रदर्शित करने का उद्देश्य लोगों को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित करवाना है। इस प्रकार की प्रदर्शनियां नई पीढ़ी के लिए विशेष महत्व रखती हैं, क्योंकि इनके माध्यम से वे पुस्तकों में पढ़े गए पुराने समय के रहन-सहन और दैनिक जीवन से जुड़ी चीजों को प्रत्यक्ष रूप से देख सकते हैं।
विरासत से जुड़ने का अवसर दे रहा राखीगढ़ी महोत्सव

अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव ऐतिहासिक धरोहरों और हरियाणवी संस्कृति को करीब से जानने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है। रंगा धरोहर स्टॉल इस आयोजन में प्राचीन वस्तुओं के माध्यम से बीते समय की जीवनशैली को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रही है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए यह केवल पुरानी वस्तुओं को देखने का अनुभव नहीं, बल्कि अपने इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों को समझने का अवसर भी है।
राखीगढ़ी की ऐतिहासिक पहचान के बीच ऐसी प्रदर्शनियां महोत्सव के आकर्षण को और बढ़ा रही हैं। प्राचीन घरेलू उपकरणों, पारंपरिक माप-तौल के साधनों और पुरानी मुद्रा का संग्रह लोगों को यह संदेश देता है कि किसी भी सभ्यता की पहचान केवल उसके भव्य अवशेषों से ही नहीं, बल्कि उसके दैनिक जीवन, उपयोगी उपकरणों और सामाजिक परंपराओं से भी होती है। यही वजह है कि रंगा धरोहर स्टॉल महोत्सव में पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है।













