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सिंधु घाटी सभ्यता का हैरान करने वाला सच: 5 हजार साल पहले भी इस्तेमाल होता था हर्बल साबुन और शैम्पू!

By sunilkohar

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सिंधु घाटी सभ्यता का हैरान करने वाला सच: 5 हजार साल पहले भी इस्तेमाल होता था हर्बल साबुन और शैम्पू!

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Ancient India History Monuments : बनावली पद्धति के चलते, आज बंद बोतलों में आ रहा है शैंपू और साबुन

हरियाणा न्यूज ( सुनील कोहाड़ ) नारनौंद : सरस्वती-सिंधु सभ्यता केवल नगर नियोजन, जल प्रबंधन और व्यापार के लिए ही प्रसिद्ध नहीं थी, बल्कि यहां के निवासियों को दैनिक जीवन में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का भी ज्ञान था। हरियाणा के बनावली पुरास्थल से प्राप्त सैपोनिन वृक्ष आंवला तथा शिकाकाई के फलियों के मिश्रण के साक्ष्य से हर्बल साबुन और शैम्पू तैयार करने के प्रमाण मिले है। इस प्रकार के प्राकृतिक वनस्पतियों से तैयार हर्बल साबुन और शैम्पू आज भी उपयोग में लाया जाता है।
सरस्वती-सिंधु सभ्यता से प्राप्त साक्ष्य उनके दैनिक जीवन में सौंदर्यबोध और स्वच्छता के प्रति जागरूकता को दर्शाते हैं। उस समय की मिट्टी की मूर्तियों में दिखाई देने वाली केश-सज्जा के पता चलता है कि उस समय की महिलाएं अपने बालों की सुंदरता और सजावट पर विशेष ध्यान देती थीं। उनकी केश-विन्यास की विविध शैलियाँ सौंदर्य-बोध और श्रृंगार के प्रति उनकी रुचि को दर्शाती हैं। बनावली से प्राप्त शैम्पू जैसे पदार्थों के साक्ष्य संकेत करते हैं कि उस समय बालों की सफाई और देखभाल के लिए विशेष उत्पादों का उपयोग किया जाता रहा होगा। इससे सरस्वती-सिंधु सभ्यता की महिलाओं में केश-सज्जा और सौंदर्य-प्रसाधनों के प्रति विकसित समझ का परिचय मिलता है।
 हरियाणा की बनवाली में जब खुदाई हुई थी तो उसे दौरान कुछ बर्तन मिले थे और उन बर्तनों की कार्बन डेटिंग करवाई गई तो उनमें आवला और शिकाकाई के अवशेष पाए गए हैं। इनका प्रयोग केवल बालों के लिए ही किया जाता होगा ऐसा उनका मानना है की महिलाएं इनका प्रयोग करके एक पेस्ट तैयार करती थी और इस पेस्ट से अपने बालों की सफाई करके उनको संवारने का काम करती थी।
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 सरस्वती सिंधु सभ्यता की खोदाई के दौरान अलग-अलग जगह पर पाई गई मिट्टी की मूर्तियां साफ दर्शाती है कि महिलाओं के सिर पर जो बाल बनाए गए हैं। वह काफी सुंदर हैं जैसा कि आजकल ब्यूटी पार्लर में सजावट करके तैयार किए जाते हैं। उस समय भी महिलाएं अपने आप को तैयार करने के लिए काफी ऐसी प्राकृतिक चीजों का प्रयोग करती थी। जिनका प्रयोग आज भी हम कर रहे हैं।
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 हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उप निर्देशक नरेंद्र परमार ने  बताया कि बनवाली में साबुन और शैंपू के कुछ अवशेष पाए गए थे। उन्हीं  अवशेषों की तर्ज पर शैंपू और साबुन तैयार किए गए हैं। जो की राखी गढ़ी  महोत्सव में एक स्टाल पर रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने भी इस स्टॉल पर रूक कर सभी चीजों की जानकारी बारीकी से ली।

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