भाजपा राज में ठेकेदारों की मनमानी और भ्रष्टाचार
Hansi News : हरियाणा की भाजपा सरकार एक तरफ तो भ्रष्टाचार-मुक्त शासन देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो दूसरी तरफ ठेकेदार सरेआम भ्रष्टाचार और धांधली करके सरकारी खजाने से जनता के खून-पसीने की कमाई को दीमक की तरह चाटकर खोखला कर रहे हैं। अगर यही हाल चलता रहा, तो भाजपा की मजबूत नींव को हिलाने में भ्रष्टाचार में लिप्त ठेकेदार और अधिकारियों की बड़ी भूमिका होगी।
गामड़ा गांव के ग्रामीणों का सड़क निर्माण के खिलाफ प्रदर्शन
नारनौंद क्षेत्र के गांव गामड़ा में ठेकेदार ने शुक्रवार की रात को सड़क का निर्माण कार्य किया और जब सुबह ग्रामीण टहलने के लिए निकले, तो सड़क कई जगह से टूटी हुई पाई गई। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत संबंधित विभाग के अधिकारियों से कर इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है। सड़क निर्माण कार्य में धांधली करते हुए घटिया किस्म की सामग्री इस्तेमाल किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
गामड़ा से राखी सड़क निर्माण धांधली
ग्रामीण कुलदीप, शीलू, सोनू, मंदीप, किताब सिंह, रामकेश, बिल्लू, बलजीत, रणबीर, रमेश, सोनू इत्यादि लोगों ने बताया कि गांव गामड़ा से नारनौंद-उचाना मार्ग पर स्थित राखी शाहपुर आईटीआई तक सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है। शुक्रवार की रात को ठेकेदार ने अपने कर्मचारियों के साथ मिलकर इस सड़क पर तारकोल का काला माल डालकर सड़क निर्माण कार्य पूरा किया, ताकि वह इसकी पेमेंट ले सके। लेकिन सड़क निर्माण कार्य में ठेकेदार ने बहुत ही घटिया किस्म की सामग्री का इस्तेमाल किया है।
नारनौंद सड़क निर्माण में घटिया सामग्री
ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि ठेकेदार ने तय मापदंडों को दरकिनार कर भारी धांधली करते हुए सरकारी खजाने के पैसे को चूना लगाया है, क्योंकि रात को बनाई गई सड़क सुबह तक कई जगह से टूट चुकी थी। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की साइड में बिना रोड़ा डाले ही ऊपर काला माल डालकर सड़क को चौड़ा दिखाया गया है। जब इस बात की भनक अन्य ग्रामीणों को लगी, तो वे भी मौके पर पहुंचे और सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि जब उन्होंने इसकी शिकायत संबंधित विभाग में की, तो अधिकारियों ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया के तहत सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी तीन साल तक ठेकेदार की है। जबकि यह सड़क बनने के तीन घंटे भी नहीं चली, तो तीन साल कैसे चलेगी, यह सब जानते हैं। ठेकेदार के इस गोलमाल को अधिकारियों से मिलीभगत करके कागजों में दबा दिया जाएगा और ठेकेदार पूरी पेमेंट लेकर जनता को इसी तरह से चूसते रहेंगे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक इस सड़क निर्माण कार्य को पूरे नियमों के तहत नहीं बनाया जाता, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। क्योंकि टूटी सड़क की वजह से आए दिन हादसे होते रहते हैं और कई बार टूटी सड़कों की वजह से लोगों की जान भी चली जाती है। उन्होंने कहा कि यदि इसे जल्द ही दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
इस संबंध में पीडब्ल्यूडी विभाग के एसडीओ रोहताश से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत मिली है जिसमें घटिया सामग्री के प्रयोग का आरोप लगाया गया है। विभाग की तरफ से जांच की जाएगी। तीन साल तक सड़क के रखरखाव और टूटी सड़क को ठीक करने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ईमानदारी की मिसाल हैं और आए दिन भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लोगों को जागरूक करने का अभियान भी चलाए हुए हैं, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के सपने को साकार किया जा सके। लेकिन सरकारी कार्यों में हो रहा खुलेआम भ्रष्टाचार बिना किसी ठेकेदार या अधिकारी की ऊंची पहुंच और रसूक के नहीं हो सकता। अगर भाजपा अपनी नींव को मजबूत रखना चाहती है, तो इस तरह के मामलों की उच्च स्तरीय जांच करवाकर जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों के साथ-साथ उनके रसूकदारों के खिलाफ ठोस एक्शन लेना होगा।
कैसे होती है सरकारी खजाने में लूट?
सरकार की तरफ से नियम बनाए गए हैं कि कहीं भी सरकार की तरफ से निर्माण कार्य करवाया जाता है, तो उसमें लगने वाली हर सामग्री के सैंपल पीडब्ल्यूडी विभाग में भेजकर जांच करवाई जाती है। लेकिन इस मामले से जुड़े एक जानकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकारी लैब में हर सामग्री के पहले से ही रेट तय होते हैं, चाहे सैंपल में कितना भी घटिया माल भेज दिया जाए। अगर लैब कर्मचारियों की ठेकेदार से सांठ-गांठ है, तो वे सैंपल तय मापदंडों के अनुसार सही साबित कर देते हैं और कई मामलों में प्राइवेट लैब की रिपोर्ट मान्य नहीं होती। इस हिसाब से ठेकेदार कुछ भ्रष्ट अधिकारियों व नेताओं के आशीर्वाद से धड़ल्ले से भ्रष्टाचार कर रहे हैं। अगर यही हाल रहा, तो मोदी सरकार का ‘मेक इन इंडिया’ और ‘विकसित भारत’ का सपना अंदर से पूरी तरह से खोखला साबित होगा।










