दीपावली पर घरों को जगमग करने का काम करेंगे हड़प्पा सभ्यता कालीन मिट्टी के दीये
हरियाणा न्यूज ( सुनील कोहाड़ ), नारनौंद : हजारों साल पुरानी सभ्यता जैसे दिखने वाले मिट्टी के दिये अबकी बार दीपावली पर सभ्यता के गवाह बनेंगे। बुजर्गो की याद दिलाने के लिए दीपावली पर देश भर के अनेक घरों में सरस्वती सिंधु सभ्यता में पाए जाने वाले मिट्टी के दीयों से घर जगमग होंगे। राखीगढ़ी सहित अनेक गांवों के मिट्टी के कलाकारों ने स्पेशल वैसे ही दिये तैयार करके लोगों को देने का काम किया है और ऑनलाइन ऑर्डर भी आ रहे हैं। कुछ लोग राखीगढ़ी महोत्सव से भी इन स्पेशल दीयों को खरीद कर दीपावली पर अपने घरों को जगमग करने का काम करेंगे ताकि इस शुभ त्यौहार पर वह बुजुर्गों की सभ्यता को धरातल पर ला सके। और हमारे देश के मिट्टी के कलाकारों को भी एक नई पहचान दिला सके।
सरस्वती-सिंधु सभ्यता के प्राचीन दीपों की चमक
आईकॉनिक साइट ऐतिहासिक गांव राखीगढ़ी में खोदाई के दौरान ऐसे अवशेष मिल चुके हैं। जो कि आज भी हमारे प्रचलन में हैं। खोदाई के दौरान पुराने बर्तनों सहित उस समय के अलग-अलग प्रकार के मिट्टी के दिये भी मिले थे। जिनकी कार्बन डेटिंग से यह साबित हो गया था कि यह हजारों साल पुराने हैं। उसी आकर दिये पिछले कुछ समय पहले से मिट्टी के कलाकार हूंबहूं बनाकर लोगों के सामने लेकर आए तो उनका खूब पसंद किया गया राखीगढ़ी महोत्सव में भी उन दीयों को देखकर पर्यटक खूब आकर्षित हुए थे। और उनको अच्छी कीमत देकर खरीद कर भी ले गए। महोत्सव में मिट्टी के दिये चर्चा का विषय बने और उनकी खूब बिक्री हुई। क्योंकि दीपावली के त्योहार पर वह लोग चाहते थे कि उनके घरों को हजारों साल पुरानी सभ्यता के आकार में पाए जाने वाले दीयों से ही जगमग किया जाए।
मिट्टी के दीयों से घर जगमग
नारनौंद : छात्रों को मिट्टी का बर्तन बनाने की कला सिखाते हुए कलाकार राहुल।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी संदेश है कि त्योहारों पर लोग स्वदेशी चीजों का प्रयोग करें। दीपावली के त्योहार पर काफी लोग चाइनीज चीजों का प्रयोग करते हैं लेकिन प्रधानमंत्री की अपील के बाद लोगों की सोच में बदलाव आया और काफी लोग देश में ही बनी चीजों का प्रयोग कर रहे हैं। अधिकतर लोग इस त्यौहार पर चाइनीज लाइटों की बजाए मिट्टी के कलाकारों द्वारा बनाए हुए मिट्टी के दीयों से ही अपने घरों को जगमग करने का काम करेंगे और हजारों साल पुरानी सभ्यता जैसे दिखने वाले दीयों की खरीददारी कर रहें हैं।
सरस्वती सिंधु सभ्यता में पाई जाने वाले मिट्टी के बर्तन, सील और मिट्टी के दीए बनाने का काम
जींद जिले के गांव कालवा निवासी राहुल ने बताया कि पिछले काफी समय से सरस्वती सिंधु सभ्यता में पाई जाने वाले मिट्टी के बर्तन, सील और मिट्टी के दीए बनाने का काम कर रहे हैं अबकी बार राखीगढ़ी महोत्सव दीपावली त्यौहार से पहले मनाया गया था। वहां स्टॉल पर दीए रखे गए थे तो लोगों को काफी पसंद आए। देशभर से आए पर्यटक उनको खरीद कर लेकर गए हैं। बोले की अब की बार दिवाली पर इन्हीं दीयों से घर को रोशन करेंगे ताकि हमारी नई पीढ़ी को भी पता चल सके की हजारों साल पहले हमारे बुजुर्ग आधुनिक तकनीक से ही मिट्टी की चीजें बनाने का काम करते थे।
राखीगढ़ी में आज भी हजारों साल पुरानी सभ्यता
जिला पार्षद प्रतिनिधि दिनेश श्योरान बताया कि राखीगढ़ी में आज भी हजारों साल पुरानी सभ्यता देखने को मिलेगी और पिछले साल भी दीपावली पर सरस्वती सिंधु सभ्यता में पाए जाने वाले दीपों जैसे दिखने वाले वीडियो से ही घर को जगमग किया था। गांव के काफी कलाकार यह दिये बनाने का काम कर रहे हैं और बड़ी संख्या में उनके खरीदार भी यहां पहुंच रहे हैं। अबकी बार देश की काफी घरों में सरस्वती सिंधु सभ्यता में जो दिये प्रयोग में लाए जाते थे। उसी प्रकार के दिये बनाकर आज प्रयोग में लाए जा रहे हैं।
माटी कला बोर्ड के चेयरमैन अनूप प्रजापत ने बताया कि कुछ कलाकारों से राखीगढ़ी महोत्सव में मुलाकात हुई थी। बड़े अच्छे तरीके से हजारों साल पहले जो चीज बनाई जाती थी वैसे ही हूबहू चीज बनाकर लोगों के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भी चाक पर मिट्टी का बर्तन बनाने का अनुभव लिया था। दीपावली पर उस समय जैसे दिखने वाले दीपों से घर को रोशन किया जाएगा। प्रदेश के लोगों से भी अपील है कि वह मिट्टी के दिये दीपावली पर जरूर जलाएं।
सुनील कोहाड़ (संस्थापक एवं मुख्य संपादक) सुनील कोहाड़ एक स्वतंत्र पत्रकार और 'अबतक हरियाणा न्यूज' के संस्थापक हैं। उन्होंने वर्ष 2023 में निष्पक्ष और जमीनी स्तर की पत्रकारिता को जीवित रखने के उद्देश्य से 'अबतक हरियाणा न्यूज' की शुरुआत की। आज के डिजिटल युग में जहाँ मुख्यधारा का मीडिया कॉर्पोरेट विज्ञापनों और बड़े स्तर की खबरों तक सीमित रह गया है, वहीं सुनील कोहाड़ का लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति—किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी और आम नागरिकों की आवाज को प्रमुखता से उठाना है। वे स्थानीय समस्याओं, क्राइम रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को बिना किसी दबाव के निडरता से सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।