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Shravan Leela Ramlila: नई पीढ़ी को संस्कारों का अनमोल संदेश दे गई श्रवण लीला

By sunilkohar

Updated On:

लोहारी राघो रामलीला में श्रवण कुमार की लीला का मंचन

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लोहारी राघो रामलीला में श्रवण लीला ने रुलाया! माता-पिता की सेवा का संदेश देकर भावुक कर गया मंचन

नारनौंद  (हरियाणा न्यूज़)। माता-पिता की सेवा का कर्ज कभी चुकाया नहीं जा सकता, लेकिन उनके प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण ही संतान के संस्कारों की असली पहचान है। इसी भावुक संदेश को लेकर गांव लोहारी राघो में श्री रामा रामलीला क्लब के बैनर तले चल रही 77 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रामलीला में श्रवण लीला का शानदार मंचन किया गया। श्रवण कुमार के त्याग, माता-पिता के प्रति अटूट प्रेम और उनकी सेवा के लिए समर्पण को देखकर पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कलाकारों के सजीव अभिनय और मार्मिक संवादों ने ऐसा समां बांधा कि कई दर्शकों का गला भर आया। इस प्रस्तुति ने समाज को याद दिलाया कि माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करना हर संतान का परम कर्तव्य है।

सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर चंद्रभान मुंडा ने किया शुभारंभ

रामलीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि को-ऑपरेटिव बैंक के सेवानिवृत्त मैनेजर चंद्रभान मुंडा ने किया। रामलीला क्लब और कलाकारों ने उनके साथ आए विशिष्ट अतिथियों बैंक मैनेजर संदीप, मुकेश, फूला राम, नितिन मुंडा और सक्षम मुंडा का जोरदार स्वागत किया। वेद प्रकाश चांदना ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के स्वागत में स्वागत गीत प्रस्तुत किया।


 

 

माता-पिता की आंखों की रोशनी लौटाने के लिए तीर्थ यात्रा पर निकले श्रवण कुमार

माता-पिता की आंखों की रोशनी लौटाने के लिए तीर्थ यात्रा पर निकले श्रवण कुमार
लोहारी राघो रामलीला में श्रवण कुमार की लीला का मंचन

 

रामलीला के प्रसंग के अनुसार श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता-पिता की आंखों की रोशनी लौटाने की कामना लेकर महाराजा दशरथ के दरबार में पहुंचते हैं। वहां वे गुरु वशिष्ठ से माता-पिता की आंखें ठीक होने का उपाय पूछते हैं। गुरु वशिष्ठ उन्हें बताते हैं कि माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा करवाने से उनकी आंखों की रोशनी लौट सकती है। माता-पिता के प्रति अगाध प्रेम और सेवा भाव से प्रेरित श्रवण कुमार उन्हें कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर निकल पड़ते हैं। इस दौरान श्रवण कुमार, महाराजा दशरथ और गुरु वशिष्ठ के बीच हुए संवादों का कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया। उनके अभिनय और संवादों ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। श्रद्धालुओं ने कलाकारों की मेहनत और शानदार प्रस्तुति की जमकर सराहना की।

तीर्थ यात्रा से लौटते समय जब श्रवण कुमार अयोध्या के निकट पहुंचते हैं, तो उनके माता-पिता को प्यास लगती है। पानी की तलाश में श्रवण कुमार जंगल की ओर जाते हैं। इसी दौरान पानी भरने की आवाज को जंगली जानवर की आहट समझकर महाराजा दशरथ तीर चला देते हैं, जो श्रवण कुमार को लग जाता है। इस घटना में श्रवण कुमार की मृत्यु हो जाती है।

जब महाराजा दशरथ पानी लेकर श्रवण कुमार के नेत्रहीन माता-पिता के पास पहुंचते हैं और उन्हें पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनाते हैं, तो उनके माता-पिता शोक में डूब जाते हैं। पुत्र वियोग में तड़पते हुए वे महाराजा दशरथ को श्राप देते हैं कि जिस प्रकार उन्हें अपने पुत्र से बिछड़ने का असहनीय दुख सहना पड़ रहा है, उसी प्रकार राजा दशरथ को भी पुत्र वियोग में तड़पना पड़ेगा। इस मार्मिक प्रसंग का मंचन देखकर पंडाल में बैठे श्रद्धालु भावुक हो उठे। कलाकारों ने अपने अभिनय से श्रवण कुमार के त्याग और माता-पिता के दुख को जीवंत कर दिया।इस अवसर पर श्री रामा क्लब के प्रधान सेवक गुलशन भ्याना, हास्य कलाकार पुष्कर भ्याणा, कोषाध्यक्ष जयपाल, राजकुमार सेठी, ईश्वर सिंह, गोपी, रामप्रकाश उर्फ टीटी, गुलाब सिंह, रवि मलिक, मास्टर सुबेसिंह, रवि कम्बोज, नंबरदार कृष्ण भ्याना, हैप्पी भ्याना, विक्रम चावला, हर्ष भ्याना समेत गांव के अनेक गणमान्यजन और भारी तादाद में श्रद्धालु मौजूद रहे।

वर्ष 1948 से कायम है ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा

ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा
ऐतिहासिक रामलीला

गांव लोहारी राघो में ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत वर्ष 1948 में हुई थी। 77 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी गांव की सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। रामलीला की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर वर्ष इसे देखने के लिए दूसरे प्रदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

इन कलाकारों ने निभाए विभिन्न किरदार

श्रवण कुमार का अभिनय डॉ. विजेंद्र मुंडा ने किया। महाराजा दशरथ के किरदार में संदीप संभरवाल, गुरु वशिष्ठ की भूमिका में राम भ्याना और शांतनु के किरदार में कृष्ण भ्याना नंबरदार नजर आए। इन कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। वहीं, सौभाग्यवति का किरदार विजय कुमार ने निभाया, जबकि मंत्री की भूमिका में अशोक चावला नजर आए। पांडे के किरदार में वेद प्रकाश चांदना और पुष्कर भ्याणा ने शानदार अभिनय प्रस्तुत किया।

समाज को दे गई अनमोल सीख

नारनौंद के लोहारी राघो गांव में ऐतिहासिक रामलीला के दौरान श्रवण लीला का भावुक मंचन हुआ। श्रवण कुमार के त्याग और माता-पिता की सेवा के संदेश ने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं।
लोहारी राघो गांव में ऐतिहासिक रामलीला

श्रवण लीला ने समाज को संदेश दिया कि माता-पिता की सेवा, उनका सम्मान और उनकी जरूरतों का ध्यान रखना हर संतान की जिम्मेदारी है। आज के बदलते दौर में जब परिवारों में रिश्तों और संस्कारों को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है, तब श्रवण कुमार का जीवन त्याग, प्रेम और कर्तव्य का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। लोहारी राघो की ऐतिहासिक रामलीला ने एक बार फिर साबित किया कि धार्मिक मंचन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को अच्छे संस्कार देने और नई पीढ़ी को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराने का सशक्त माध्यम भी है।

Hisar, Hansi, Narnaund, Jind, Rohtak, Bhiwani, Rewari, Rakhigarhi

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