राखीगढ़ी महोत्सव 2026: एक मंच पर जुटेंगे देश-विदेश के पुरातत्वविद, हड़प्पा सभ्यता के रहस्यों पर होगा मंथन
Rakhigarhi Festival 2026: 22 से 24 अक्टूबर तक चलेगा International Archaeology Conference, खुदाई और रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञ साझा करेंगे अहम जानकारियां
Rakhigarhi Mahotsav 2026: नारनौंद (सुनील कोहाड़); हरियाणा के राखीगढ़ी में आयोजित होने वाला राखीगढ़ी महोत्सव इस बार खास रहने वाला है। हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilization Rakhigarhi) के इतिहास, संस्कृति और अब तक हुई खुदाई (Archaeological Excavation) से जुड़े रहस्यों को दुनिया के सामने लाने के लिए देश-विदेश के प्रमुख पुरातत्वविद (Archaeologists) और रिसर्च विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे। 22 से 24 अक्टूबर तक चलने वाले अकादमिक सत्रों (Academic Sessions) में राखीगढ़ी की ऐतिहासिक विरासत पर गहन चर्चा होगी।
इस दौरान राखीगढ़ी में खुदाई का नेतृत्व कर चुके प्रमुख विशेषज्ञ एक साथ बैठकर अब तक सामने आए पुरातात्विक साक्ष्यों (Archaeological Evidence), शोध के निष्कर्षों और हड़प्पा सभ्यता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे। इसका उद्देश्य राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और यहां की प्राचीन सभ्यता के बारे में नई जानकारियां सामने लाना है।
1997 में शुरू हुई थी राखीगढ़ी में खुदाई

राखीगढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता की खोज के लिए वर्ष 1997 में खुदाई शुरू की गई थी। इसके बाद से विभिन्न चरणों में पुरातत्व विभाग और शोधकर्ताओं ने यहां उत्खनन (Excavation) कर प्राचीन सभ्यता से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं।
Archaeological Survey of India-ASI
सबसे पहले पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक अमरेंद्र नाथ के नेतृत्व में खुदाई की गई। इसके बाद डेक्कन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर वसंत शिंदे ने खुदाई का नेतृत्व किया। आगे चलकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India-ASI) के महानिदेशक डॉ. संजय मंजुल भी राखीगढ़ी से जुड़े उत्खनन कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। फिलहाल यहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, नोएडा के अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज सक्सेना के नेतृत्व में खुदाई का कार्य किया जा रहा है।
राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान इन प्रमुख विशेषज्ञों के अनुभव और शोध से जुड़ी जानकारियां अकादमिक सत्रों का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी। इससे लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि अलग-अलग चरणों में हुई खुदाई से हड़प्पा सभ्यता के बारे में क्या-क्या जानकारियां सामने आई हैं।
DNA Analysis से खेती और तकनीक तक पर होगी चर्चा
राखीगढ़ी पर शोध करने वाले देश-विदेश के कई विशेषज्ञों को महोत्सव में आमंत्रित किया गया है। इनमें कंकालों के डीएनए विश्लेषण (DNA Analysis) से जुड़े शोधकर्ता डॉ. नीरज राय, प्राचीन कृषि व्यवस्था (Ancient Agriculture) पर अध्ययन करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनिल पोखरिया और पशुओं से जुड़े शोध में योगदान देने वाले डॉ. अभ्यन तथा जीवन खरकवाल शामिल हैं।
इसके अलावा प्राचीन तकनीक (Ancient Technology) से जुड़े शोधकर्ता वीएन प्रभाकर भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे। विदेशी विशेषज्ञों में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के कैमरून पैटरी, ब्रिटेन के डॉ. एडम ग्रीन तथा जापान और कोरिया से आने वाले शोधकर्ताओं को भी आमंत्रित किया गया है।
इन विशेषज्ञों ने राखीगढ़ी में अलग-अलग विषयों पर शोध करके हड़प्पा सभ्यता के इतिहास को समझने में योगदान दिया है। महोत्सव में उनके शोध अनुभवों और निष्कर्षों पर चर्चा से प्राचीन मानव जीवन, कृषि, पशुपालन, तकनीक और सभ्यता के विकास जैसे विषयों को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राखीगढ़ी को मिलेगी नई पहचान
राखीगढ़ी को हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में गिना जाता है। यहां मिली ऐतिहासिक सामग्री और पुरातात्विक साक्ष्य प्राचीन समाज की जीवनशैली, आर्थिक गतिविधियों और सांस्कृतिक विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महोत्सव में विशेषज्ञों के एक मंच पर आने से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों और आम नागरिकों को प्राचीन सभ्यता से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, राखीगढ़ी की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने और भविष्य के शोध को प्रोत्साहित करने में भी यह आयोजन अहम साबित हो सकता है।
22 से 24 अक्टूबर तक होंगे अकादमिक सत्र
पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, हरियाणा के डिप्टी डायरेक्टर नरेंद्र परमार ने बताया कि राखीगढ़ी महोत्सव के तहत 22 से 24 अक्टूबर तक अकादमिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए देश-विदेश के उन विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है, जिन्होंने राखीगढ़ी की खुदाई और शोध कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि सभी विशेषज्ञ एक मंच पर बैठकर अब तक हुई खुदाई और शोध से जुड़ी जानकारियों पर मंथन करेंगे। यह आयोजन देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगा और राखीगढ़ी की ऐतिहासिक विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद करेगा।












