अनाज मंडी में बारिश से भीगी हजारों क्विंटल धान, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
धीमी खरीद बनी किसानों की परेशानी, मंडी में 55 हजार क्विंटल धान पड़ा था खुले आसमान के नीचे, खेतों में खड़ी फसलें भी तेज बारिश से बिछीं
हरियाणा न्यूज (सुनील कोहाड़)। वीरवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली और देखते ही देखते दिन में अंधेरा छा गया। तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने नारनौंद की अनाज मंडी में किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ी हजारों क्विंटल धान की फसल बारिश में भीग गई। वहीं, खेतों में खड़ी फसलें भी तेज हवाओं और बारिश के कारण जमीन पर बिछ गईं। इस स्थिति से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ नजर आईं।
किसानों का कहना है कि मंडी में धान पहुंचने के बाद भी समय पर खरीद नहीं होने के कारण उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने सरकार से प्रभावित फसलों की तुरंत गिरदावरी करवाने और उचित मुआवजा देने की मांग की है।
धीमी खरीद के कारण मंडी में जमा हुई हजारों क्विंटल धान

धान की खरीद शुरू होने से पहले सरकार की ओर से किसानों को मंडियों में बेहतर सुविधाएं देने और फसल की समय पर खरीद के दावे किए गए थे, लेकिन नारनौंद अनाज मंडी में पिछले कई दिनों से खरीद की रफ्तार धीमी बनी हुई थी। पिछले तीन दिनों से खरीद में सुस्ती के कारण बड़ी मात्रा में धान खुले आसमान के नीचे पड़ा रहा।
जानकारी के अनुसार, बारिश से पहले मंडी में करीब 55 हजार क्विंटल धान पड़ा हुआ था, जिसमें से लगभग 28 हजार क्विंटल की खरीद हो चुकी थी। ऐसे में बड़ी मात्रा में धान मंडी में ही रह गया। वीरवार को अचानक हुई तेज बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी और मंडी में रखी फसल भीग गई।
मंडी में भरा पानी, निकासी के प्रयास शुरू
बारिश के बाद अनाज मंडी में जगह-जगह पानी भर गया। इससे किसानों और आढ़तियों की परेशानी और बढ़ गई। खुले में रखी धान की फसल को बचाने के लिए तिरपाल की व्यवस्था करने और मंडी से पानी निकालने की जरूरत महसूस हुई।
नारनौंद मार्केट कमेटी के सचिव रवि श्योरान ने बताया कि बारिश के कारण अनाज मंडी में पानी भर गया था। सभी आढ़तियों को निर्देश दिए गए हैं कि खुले में पड़ी फसल पर तिरपाल डालने का काम करें, ताकि उसे और अधिक भीगने से बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि मंडी में भरे पानी की निकासी के प्रयास किए जा रहे हैं।
खेतों में खड़ी फसलें भी प्रभावित, मुआवजे की मांग

तेज आंधी और बारिश का असर केवल अनाज मंडी तक सीमित नहीं रहा। खेतों में खड़ी धान की फसल भी कई जगह जमीन पर बिछ गई। इससे किसानों को फसल की गुणवत्ता और संभावित पैदावार को लेकर चिंता सताने लगी है।
किसानों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मंडी में भीगी धान की फसल और खेतों में प्रभावित फसलों का जल्द सर्वे करवाया जाए। साथ ही, नुकसान का आकलन कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सके।
अब किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई और धान की खरीद में तेजी लाने पर टिकी है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते खरीद और उठान की व्यवस्था बेहतर होती, तो खुले आसमान के नीचे पड़ी फसल को बारिश से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती थी।















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