दीनबंधू छोटूराम यूनिवर्सिटी आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी Sonipat स्विमिंग पूल में गोलमाल
हरियाणा पड़ताल, नंदकिशोर भारद्वाज ।
Sonipat News : Deenbandhu Chhotu Ram University of Science and Technology Sonipat (DCRUST) के सूखे स्विमिंग पूल में छह करोड़ रुपये की राशि डूब गई है। वर्ष 2018 में बनाए गए इस पूल के निर्माण पर साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत आई थी, लेकिन तैयार होने के पांच साल बाद भी इसका लाभ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को नहीं मिल पाया है। निर्माण के ददैौरान ही सस्ते वाटर फिल्टर लगाने के घोटाले के बाद से इसके भवन पर ताला लगा दिया गया है, जिससे भवन व पूल कंडम हो चुका है। घोटाले की दहशत इतनी है कि सात साल में दो वीसी बदले लेकिन किसी भी वीसी ने पूल को शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटाई। अब एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम को घोटाले की जांच सौंपी गई है।
Rs 6.5 crore drowned in the dry swimming pool of DCRUST Sonipat News
यूनिवर्सिटी प्रबंधन अब पूल को शुरू करने की बात कह रहा है। डीक्रस्ट में विद्यार्थियों को सुविधा देने के लिए वर्ष 2018 में स्विमिंग पूल निर्माण का कार्य शुरू किया गया। इसके बाद तीन अप्रैल, 2021 को आरटीआइ एक्टीविस्ट पीपी कपूर ने एंटी करप्शन ब्यूरो में डीक्रस्ट में स्विमिंग पूल के निर्माण कार्य में किए गए घोटाले की शिकायत की थी। उसी शिकायत पर अब चार वर्ष बाद एसीबी ने जांच शुरू की है।
शिकायत में बताया गया कि स्विमिंग पूल निर्माण में सस्ते वाटर फिल्टर लगाकर घोटाला किया गया है। निर्माण ठेकेदार ने पूल में पौने 10.82 लाख रुपये की बजाय 3.20 लाख रुपये के वाटर फिल्टर लगाए जबकि उसने बिल 10.82 लाख रुपये के हिसाब से ही लगाए। पूल में तीन वाटर फिल्टर लगाए गए थे। पूल निर्माण में 23 लाख रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया था। पूल बनाने में छह करोड़ रुपये की लागत आई थी।
चार गुना रेट लगाए गए
शिकायत के अनुसार निर्माण कंपनी ने स्विमिंग पूल में 9,60,000 रुपये के वाटर फिल्टर लगकर इनकी लागत 32,86,522 रुपये दिखाते हुए 23 लाख रुपये का घोटाला किया। घोटाले की शिकायत होते ही ठेकेदार की 40 प्रतिशत पेमेंट रोक दी गई। शिकायत में आरोप लगाया कि स्विमिंग पूल निर्माण का ठेका देते समय मिलीभगत करके बनाए गए डिटेल्ड नोटिस इनवाइटिंग टेंडर में भी अधिकतर आइटमों के रेट बाज़ार से चार गुने तय कर दिए। फिर डीएनआइटी के इन्हीं रेटों से पीवीसी पाइप, वाल्व बैटरी, वाटर फिलिंग पंप जैसी आइटमों पर मार्केट रेट से चार गुना ज्यादा भुगतान कर घोटाला किया गया। स्विमिंग पूल के निर्माण पर करीब साढ़े छह करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। पांच वर्ष पहले निर्माण पूरा होने के बावजूद पूल बिना उपयोग के पड़ा है और जर्जर हो रहा है। इस पर ताले लटके हुए हैं।
जिम्मेदार हो चुके हैं रिटायर
शिकायतकर्ता पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि इस घोटाले में यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता बलबीर श्योककंद की अहम भूमिका है, इसीलिए श्योकंद ने शिकायत वापस कराने के लिए उन पर भारी दबाव बनाते हुए हर हथकंडा अपनाया था, लेकिन उन्होंने इसकी जांच के लिए पूरा जोर लगाया। अब श्योकंद रिटायर हो चुके हैं। वहीं एसीबी ने इसकी जांच शुरू की है।
लंबे समय से पूल के भवन पर ताला लगे होने से स्विमिंग पूल व भवन में काफी काम कराया जाना है। अब हम इसे शुरू करने का टेंडर जारी करने पर विचार कर रहे हैं। टेंडर का बेस प्राइज कितना होगा, इस पर टीम काम कर रही है। बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर पूल को शुरू कराया जाएगा ताकि यूनिवर्सिटी के खिलाड़ियों को इसका लाभ मिल सके ।
- डा. एसपी सिंह, वीसी, डीक्रस्ट
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