नई शिक्षा नीति की खामियां उजागर: डॉ. संदीप सिंहमार ने BA विद्यार्थियों पर विज्ञान विषय थोपने पर उठाए सवाल

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नई शिक्षा नीति की खामियां उजागर: डॉ. संदीप सिंहमार ने BA विद्यार्थियों पर विज्ञान विषय थोपने पर उठाए सवाल

हरियाणा में बीए के विद्यार्थियों पर विज्ञान विषय थोपे जाने पर सवाल

नई शिक्षा नीति की खामियों को दूर करे सरकार : डॉ. संदीप सिंहमार
हरियाणा न्यूज टूडे: 
हरियाणा में स्नातक स्तर पर कला संकाय से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे विज्ञान विषय जबरन आवंटित किए जाने के मामले सामने आने लगे हैं। इस व्यवस्था पर शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने गंभीर आपत्ति जताई है। इंटरनेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग के अध्यक्ष डॉ. संदीप सिंहमार ने कहा कि यह व्यवस्था नई शिक्षा नीति के उद्देश्य और विद्यार्थी-हित, दोनों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि जब छात्र 11वीं और 12वीं में कला संकाय चुनकर आगे बढ़ते हैं, तो स्नातक स्तर पर उनके ऊपर विज्ञान विषय थोपना तर्कसंगत नहीं है। 





डॉ. सिंहमार के अनुसार, बीए के विद्यार्थियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि, रुचि और करियर दिशा सामान्यतः मानविकी, समाज विज्ञान, भाषा, इतिहास, राजनीति विज्ञान और संबंधित विषयों की ओर होती है। ऐसे में विज्ञान विषयों का अनिवार्य रूप से आवंटन उनकी पढ़ाई पर अनावश्यक दबाव डालता है और शैक्षणिक गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।









 डॉ. सिंहमार ने कहा कि फिजिक्स, केमिस्ट्री जैसे विषयों के लिए पहले से मजबूत आधार, प्रयोगात्मक प्रशिक्षण और विषयगत तैयारी आवश्यक होती है। बिना उपयुक्त पृष्ठभूमि के इन विषयों को पढ़ना अनेक विद्यार्थियों के लिए कठिन साबित हो सकता है और यह उनके आत्मविश्वास, परिणाम तथा आगे की योजना पर भी असर डाल सकता है। 










शिक्षा नीति का उद्देश्य होगा कमजोर


शिक्षाविदों का मानना है कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य लचीलापन, बहुविषयकता और विकल्प देना है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर यदि विषय-चयन छात्र की रुचि के बजाय बाध्यता बन जाए तो नीति का मूल उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है। इसी कारण इस व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग उठ रही है। उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि कला संकाय के विद्यार्थियों पर विज्ञान विषय अनिवार्य करने की प्रथा की समीक्षा की जाए। साथ ही, विषय चयन के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित नियम बनाए जाएं ताकि हर विद्यार्थी अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार अध्ययन कर सके। 












छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डालना गलत 


डॉ. संदीप सिंहमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों पर बोझ डालना नहीं, बल्कि उन्हें सक्षम बनाना है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में जो व्यावहारिक खामियां सामने आ रही हैं, उन्हें दूर किया जाए और विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

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