Rakhigarhi Festival: राखीगढ़ी महोत्सव में हड़प्पा कालीन बर्तनों में परोसा जाएगा देसी खाना, 5 हजार साल पुरानी संस्कृति का मिलेगा अनुभव

By sunilkohar

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Rakhigarhi Festival: Harappan Food & History

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Rakhigarhi Festival: हड़प्पा कालीन बर्तनों में परोसा जाएगा देसी खाना, 5,000 साल पुरानी संस्कृति का अनुभव करेंगे देश-विदेश के मेहमान

Rakhigarhi History: राखीगढ़ी महोत्सव में मेहमानों को मिलेगा हरियाणवी देसी व्यंजनों और हड़प्पा कालीन खानपान का स्वाद। डाइनिंग टेबल की जगह ‘डिश ऑन स्टैंड’ पर परोसा जाएगा खाना, चूल्हे और हारे में पकेंगे पारंपरिक व्यंजन।

सुनील कोहाड़, नारनौंद। 

हिसार, हरियाणा: हरियाणा में आयोजित होने वाले राखीगढ़ी महोत्सव को यादगार बनाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। इस बार महोत्सव में देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को हड़प्पा कालीन सभ्यता की संस्कृति और खानपान से रूबरू कराने की विशेष योजना बनाई जा रही है। मेहमानों को आधुनिक डाइनिंग टेबल की बजाय हड़प्पा कालीन शैली के ‘डिश ऑन स्टैंड’ में खाना परोसने की तैयारी है। वहीं, हरियाणा के पारंपरिक देसी व्यंजनों के साथ प्राचीन खानपान की झलक भी देखने को मिलेगी।

महोत्सव का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि राखीगढ़ी की ऐतिहासिक विरासत को देश-विदेश में पहचान दिलाना और नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन सभ्यता से जोड़ना भी है।

Rakhigarhi Festival में चूल्हे और हारे में तैयार होगा देसी खाना

राखीगढ़ी महोत्सव में आने वाले मेहमानों को पारंपरिक देसी स्वाद का अनुभव कराने के लिए गांव की महिलाओं की मदद से खाना तैयार करवाने की योजना है। इसके लिए ऐसे व्यंजनों को शामिल किया जा रहा है, जो हरियाणा की ग्रामीण खानपान परंपरा और हड़प्पा सभ्यता से जुड़ी ऐतिहासिक समझ को प्रदर्शित कर सकें।

खाना आधुनिक रसोई के बजाय देसी चूल्हे और हारे में तैयार करने की तैयारी है, ताकि मेहमानों को ग्रामीण जीवन और पारंपरिक भोजन बनाने की प्रक्रिया का अनुभव मिल सके। पुरातत्व विभाग की ओर से व्यंजनों की सूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

डाइनिंग टेबल नहीं, ‘डिश ऑन स्टैंड’ पर परोसा जाएगा खाना (Harappan-style serving vessels)

राखीगढ़ी महोत्सव में खानपान की व्यवस्था को खास बनाने के लिए परोसने के बर्तनों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हड़प्पा कालीन शैली से प्रेरित ‘डिश ऑन स्टैंड’ तैयार करवाए जा रहे हैं, जिनमें मेहमानों को व्यंजन परोसने की योजना है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य महोत्सव में आने वाले लोगों को प्राचीन सभ्यता के खानपान और बर्तनों की शैली से परिचित कराना है। बर्तन तैयार करवाने के लिए हड़प्पा कालीन सभ्यता की मुहरें बनाने वाले विशेषज्ञ राहुल की मदद ली जा रही है।

खट्टी दाल से बाजरे के लड्डू तक, इन देसी व्यंजनों का मिलेगा स्वाद

महोत्सव में हरियाणा के पारंपरिक खानपान को प्रमुखता देने की तैयारी है। प्रस्तावित व्यंजनों में शामिल हैं:

  • खट्टी दाल और मीठे चावल
  • बाजरे की रोटी और सामान्य रोटी
  • देसी दाल और चूरमा
  • कचरी की चटनी
  • गुड़ से बने पारंपरिक व्यंजन
  • बाजरे के लड्डू और खिचड़ी
  • लस्सी और रायता

इन व्यंजनों के माध्यम से मेहमानों को हरियाणा की ग्रामीण खाद्य संस्कृति और पारंपरिक स्वाद से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। प्राचीन हड़प्पा काल के भोजन से संबंधित प्रस्तुति को ऐतिहासिक जानकारी और उपलब्ध पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुरूप रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

क्यों खास है राखीगढ़ी? जानिए Rakhigarhi History

हरियाणा के हिसार जिले में स्थित राखीगढ़ी भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे बड़े ज्ञात हड़प्पा कालीन पुरातात्विक स्थलों में से एक है। यह स्थल प्राचीन नगरीय जीवन, शिल्पकला, आर्थिक गतिविधियों और उस समय की सामाजिक व्यवस्था को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

1. योजनाबद्ध नगर व्यवस्था

राखीगढ़ी से मिले पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा सभ्यता की विकसित नगर व्यवस्था को समझने में मदद करते हैं। इस सभ्यता के विभिन्न स्थलों पर नियोजित बस्तियों, गलियों और जल निकासी की व्यवस्थाओं के प्रमाण मिले हैं।

2. शिल्पकला और व्यापार

हड़प्पा सभ्यता के विभिन्न पुरातात्विक स्थलों से मनके बनाने, आभूषण निर्माण, मिट्टी के बर्तन तैयार करने और अन्य शिल्प गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं। इनसे उस दौर के आर्थिक जीवन और दूरस्थ व्यापारिक संपर्कों की जानकारी मिलती है।

3. प्राचीन जीवनशैली को समझने का अवसर

राखीगढ़ी में होने वाली पुरातात्विक खोजें हजारों साल पहले रहने वाले लोगों के रहन-सहन, खानपान और सांस्कृतिक गतिविधियों को समझने में सहायक हैं। महोत्सव के माध्यम से इन ऐतिहासिक पहलुओं को आम लोगों और पर्यटकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा सकता है।

हरियाणवी संस्कृति और ग्रामीण खेल भी होंगे आकर्षण

राखीगढ़ी महोत्सव में पारंपरिक खानपान के साथ हरियाणवी लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक भी देखने को मिलेगी। दंगल, पारंपरिक ग्रामीण खेल, लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

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