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देवर भाभी की प्रेम कहानी! रिश्तों का ऐसा खेल जिसने पूरे परिवार को कर दिया हैरान

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devar bhabhi ki prem kahani

देवर भाभी की प्रेम कहानी ऐसी काल्पनिक कहानी है कि भाभी देवर को अपने प्रेम जाल में फंसाकर उसका घर तोडऩे का प्रयास करती है और देवर के हिस्से की संपति पर कब्जा लेती है। लेकिन घर में एक ऐसी घटना घटित होती है कि चालू भाभी का नकाब उतर जाता है और भोला देवर एक बार फिर हीरो बनकर उभरता है।

 

गांव के एक परिवार में सब मिलजुलकर रहते थे, भाई बहनों में बहुत ही प्यार था और वो अपनी मां से भी बेहद प्यार करते थे। कुछ समय के बाद बड़े भाई कपिल की शादी होती है और उसकी पत्नी सीमा (काल्पनिक नाम) अपनी मीठी बातों और चालाक स्वभाव के लिए जानी जाती थी। परिवार में सभी को लगता था कि सीमा सबसे ज्यादा परिवार की चिंता करती है, लेकिन उसके मन में कुछ और ही चल रहा था। ( Love Story in Hindi )

देवर अंकित (काल्पनिक नाम) बेहद सीधा-सादा और मेहनती युवक था। माता-पिता की जमीन और घर में उसका भी बराबर का हिस्सा था। इसी वजह से सीमा को ये चिंता मन ही मन खटकने लगी। सीमा ने ऐसा जाल बुना की अंकित अपनी चालू भाभी की चिपड़ी बातें में फंस गया।

मीठी बातों से जीत लिया देवर का भरोसा

देवर भाभी की प्रेम कहानी! रिश्तों का ऐसा खेल जिसने पूरे परिवार को कर दिया हैरान
AI Photo

धीरे-धीरे सीमा भाभी ने अपने देवर अंकित पर प्रेम जाल बिछाना शुरू कर दिया और उसका भरोसा जीतना लिया। वह हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखती, उसकी पसंद का खाना बनाती और हर बात में साथ देने का दिखावा करती। देवर भाभी के प्रेम जाल में पूरी तरह से फंस चुका था। वो स्कूल कॉलेज जाता तो उसके लिए तरह तरह का सामान लाकर अपनी प्यारी भाभी को देता। ताकि भाभी खुश रहे और उससे इसी तरह से प्यार करती रहे ताकि परिवार मिल जुलकर रह सके और दोनों भाईयों के बीच कभी दरार ना पड़े। लेकिन सीमा के मन में खोट और लालच लगातार बढ़ता जा रहा था।

कुछ सालों बाद सीमा भाभी के लाडले देवर की शादी हो जाती है और अंकित अपनी पत्नी को समझाता है कि बड़ी भाभी के कहने में रहना, लेकिन बात बात पर सीमा भाभी अंकित को उसकी पत्नी के खिलाफ भडक़ाती रहती। जिससे अंकित और उसकी पत्नी के बीच मनमुटाव रहने लगा। ये बात ना ही तो अंकित के समझ में आई और ना ही उसकी पत्नी के कि ये सब चाल उनकी भाभी सीमा चल रही है। ( Devar Bhabhi Love Story in Hindi ) 

संपत्ति पर शुरू हुआ असली खेल

कुछ समय बाद अंकित की पत्नी ने शर्त रख दी कि वो परिवार से अलग होकर रहेगी। जिसके बाद पैतृक संपत्ति के बंटवारे की चर्चा शुरू हुई। भाईयों में बड़ी बहन ने बंटवारा कर दिया। पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी जो खेती बाड़ी करते थे। लेकिन अंकित की मां अभी जिंदा थी और वो सरकारी नौकरी करती थी। अंकित की मां ने दोनों भाईयों से अलग रहने का निर्णय लिया और अपनी सेवानिवृत पैंशन में से किसी को कुछ नहीं दिया। केवल पैतृक संपति यानी खेती बाड़ी की जमीन और कृषि यंत्रों का बटवारा किया गया। जिनमें खेत की जमीन आधी आधी बांट दी, परंतु दो मकानों में एक मकान कुछ समय पहले ही बनाया गया था जबकि दूसरा मकान कई दशकों पुराना था। पुराने मकान में जमीन ज्यादा थी और नए मकान में कुछ ही गज जगह कम थी। छोटे भाई की छूट होती है हमेशा, लेकिन इस बंटवारे में बड़े भाई यानी सीमा भाभी और उसके पति की छूट हुई और उन्होंने नया मकान ले लिया साथ में ट्रैक्टर और हिस्से पर ली गई जमीन भी ले ली।

जबकि अंकित के हिस्से में पुराना मकान, ट्रैक्टर कृषि यंत्र ही हिस्से में मिल पाए। जबकि अंकित को नगद राशि व जेवरात की जगह कुछ नहीं मिला। बल्कि कर्ज का हिस्सा थमा दिया गया। लेकिन अंकित सीमा भाभी और भाई को नाराज नहीं करना चाहता था सब हंसते हुए स्वीकार कर लिया ताकि दोनों भाईयों के परिवार के बीच ऐसा ही प्यार बना रहे।

लेकिन कुछ समय के बाद सीमा भाभी के पति यानी बड़े भाई ने ट्रैक्टर का लोन भरने से मना कर दिया तो अंकित ने आधा लोन चुकता किया। परंतु अंकित तब भी नहीं समझा और अपनी भाभी की चिपड़ी बातें में फंसा रहा। लेकिन अंकित की पत्नी सब खेल जान चुकी थी। कुछ समय के बाद अंकित की पत्नी अपने मायके चली गई तो सीमा भाभी ने अंकित से उसके पास अच्छी नस्ल की भैंस मुफ्त में ले ली। तब भी अंकित की आंख नहीं खुली।

इसी तरह से सालों बीत गए लेकिन परिवार और रिस्तेदार सब सीमा भाभी की ही बातों से सहमत नजर आते। कुछ साल बाद अंकित की मां यानी सीमा की सास का देहांत हो गया और उनके देहांत के बाद जब उनकी जमा पूंजी व मौजूदा संपति के बंटवारे की बात उठी तो सीमा भाभी और उसके पति ने देने से मना कर दिया। तब अंकित की बहनों व अन्य रिश्तेदारों को इस बात का अहसास हुआ कि सीमा तो सास व देवर की संपति को ऐठना चाहती थी और वो इस चाल में कामयाब हो चुकी है। अब तो अंकित भी पूरी तरह से अपने भाई भाभी से नफरत करने लगा था।

ननदों व अंकित की पत्नी ने कई बार इस बात का विरोध किया, लेकिन उनकी बात किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। अंकित के साथ साथ उसकी बहनें भी अपनी मां की संपति से वंचित रह गई। सीमा अपनी बेटियों की शादी अपनी सास के जीते जी कर चुकी थी लेकिन सास की मौत के बाद बेटे की भी शादी कर दी। लेकिन सीमा और उसका परिवार ननंदों से दूर हो चुका था। वहीं सीमा की बातों में आकर उसके पति ने अपनी दादी सास की रिश्तेदारी से भी मुंह मोड़ लिया। लेकिन अंकित के घर उसकी बहनों व सब रिश्तेदारियों का आना जाना लगा रहता है।

घरेलू झगड़ों में उलझ गया पूरा परिवार

हर दिन घर में नई बहस होती।

कोई राहुल का पक्ष लेता।

कोई सीमा का समर्थन करता।

कोई समझौते की बात करता।

धीरे-धीरे रिश्तों की मिठास खत्म होने लगी और पूरा परिवार तनाव में रहने लगा।

क्या रिश्तों से बड़ा है लालच?
कहानी यह संदेश देती है कि जब परिवार में भरोसे की जगह लालच ले लेता है, तो रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं।

संपत्ति का विवाद केवल जमीन का नहीं होता, बल्कि परिवार की एकता और विश्वास भी दांव पर लग जाता है।

कहानी से सीख
किसी भी दस्तावेज पर पढ़े बिना हस्ताक्षर न करें।

संपत्ति से जुड़े मामलों में कानूनी सलाह अवश्य लें।

परिवार में पारदर्शिता बनाए रखें।

लालच अक्सर रिश्तों को नुकसान पहुंचाता है।

बातचीत और समझदारी से कई विवाद टाले जा सकते हैं।

 

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