Fake government office Sirsa Fraud Case Update
सिरसा बस स्टैंड के पास सिविल लाइन थाना पुलिस ने फर्जी सरकारी कार्यालय ( Fake government office ) का भंडाफोड़ किया था। लेकिन 1 महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद भी पुलिस मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे कर रही है और एक के बाद एक पुलिस इस मामले की परतों को उजागर कर रही है। पुलिस के साथ-साथ अन्य लोगों को भी इस पर अधिक सरकारी कार्यालय में किसी बड़े व्यक्ति के हाथ होने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन इस बात की पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने और आरोपी रामहेर की पुलिस गिरफ्त में आने के बाद ही साफ हो पाएगा।

हिसार सिरसा रोड़ पर पेट्रोल पंप और बस स्टैंड के नजदीक सिरसा सिविल लाइन थाना पुलिस ने करीब सवा महीने पहले छापेमारी कर समाधान ग्रामीण वेलफेयर एंड इम्पलायमेंट सर्विसेस लिमिटेड ( भारत सरकार ) के नाम से करीब चार महीने से फर्जी सरकारी कार्यालय चल रहा था। धोखाधड़ी करने के लिए मुख्य आरोपित राममेहर पंडित ने आइसीआइसीआइ बैंक पंचकूला में हिसार जिले के गांव मिरकां और चिकनवास गांव के दो लोगों के साथ मिलकर जॉइंट अकाउंट ओपन करवाया था। ( Latest News Sirsa )
सिरसा पुलिस की टीम ने पंचकूला जाकर ICICI Bank Panchkula से इस खाते की पूरी डिटेल और जानकारी हासिल कर ली है जिससे पर्दाफाश हो गया है। जब पुलिस अधिकारियों से बैंक कर्मियों को इस फर्जी वाले का पता चला तो वह भी हैरान रह गए। पुलिस इस बैंक खाते की जनता से जांच कर रही है कि इस खाते के माध्यम से कितने रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया है साथ ही बरामद ईमेल की भी जांच की जा रही है। ( Sirsa Fraud Case Update )

हिसार जिले के गांव राजपुरा के रहने वाले राममेहर पंडित ने सन् 2015 में चंडीगढ़ में भी इसी तरह फर्जी कार्यालय खुला था। इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने उसके खिलाफ मामला भी दर्ज किया था लेकिन उसने कोर्ट से अग्रिम जमानत ली हुई है। इस मामले में करीब डेढ करोड रुपए की फर्जी वाले का अनुमान लगाया जा रहा है। ( Siraa News Today )

पुलिस जांच में सामने आया कि सन 2022 में आरोपी ने हिसार में भी फर्जी सरकारी कार्यालय (Fake government office ) खोलकर फर्जीवाड़ा किया है। इसके अलावा हिसार, भिवानी सहित प्रदेश के अन्य शहरों में भी फर्जी सरकारी कार्यालय खोलकर लोगों से रुपए थक चुका है। राममेहर पंडित ने फर्जीवाड़ा की शुरुआत हांसी में सरकारी कार्यालय खोलकर की थी। इस मामले में उसने शुरुआत में ही गांव राजपुरा और नारनौंद के आसपास के लोगों को ठगी का शिकार बनाया था। लेकिन गांव और आसपास के लोगों के शिकार होने की वजह से भाईचारे में ही एक मामला सुलट गया था।
सूत्रों से पता चला है कि आरोपी राममेहर पंडित स्टेनोग्राफर है और उसे सरकारी नौकरी भी मिली थी। लेकिन उसने सरकारी नौकरी में भी फर्जी वादा करके सबको चौंका दिया था। इसके फर्जी बड़े की तरफ से इन दिनों उसके गांव और आसपास के इलाके में भी फिर से चर्चा का विषय बने हुए हैं। लोग तभी जुबान में कह रहे हैं कि इस पर किसी बड़े आदमी का हाथ है जिसकी वजह से इसे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेने में मदद मिलती है और पुलिस से तब तक बचाव किया जाता है जब तक इस अग्रिम जमानत न मिल जाए।
अब तक पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने कार्यालय को ऐसी जगह पर करता था जहां पर लोगों का आना-जाना ज्यादा होता था और उसके कार्यालय पर नजर पड़ने पर वह किसी न किसी काम के बहाने वहां पर आ जाएं। उसके बाद वह है लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे ढाई से तीन लाख रुपए वसूलता था। इसके अलावा गरीब बीपीएल परिवार के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर भी वह प्रति फॉर्म के 1100 रुपए वसूल रहा था।
इस फर्जी वाले को अंजाम देने के लिए वह अपने Fake Government Office में फीमेल स्टाफ को रखता था और सिरसा में भी उसके फीमेल स्टाफ में 4 से 5 महिलाएं शामिल थी। ऑफिस में आने-जाने के लिए वह बोलोरो गाड़ी रखता था जिस पर नीली बत्ती लगी हुई थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह बोलोरो गाड़ी किसी रोहतक जिले के व्यक्ति के नाम दर्ज है। इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि इस गाड़ी का नंबर हिसार जिले के हांसी का है। जिससे आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में लोकल कोई व्यक्ति इसके साथ जुड़ा हो सकता है क्योंकि राममेहर पंडित के गांव के पहले साधनों का रजिस्ट्रेशन हांसी उपमंडल कार्यालय में ही दर्ज होता था। लेकिन अब उसका गांव नारनौंद उपमंडल कार्यालय के अंतर्गत आता है। ( Narnaund News Today )
पुलिस जांच में सामने आया कि उसने अपने फर्जी सरकारी कार्यालय के ऐसे नियम बनाए हुए थे ताकि किसी को शक ना हो कि वह सरकारी है या फर्जी है। जो स्टाफ उसने नियुक्त किया था और दिन की नियुक्ति करने का लालसा देकर वह लोगों को से ठगी कर रहा था उनके लिए नियम पहले ही बनाए हुए थे। नियमों के मुताबिक अगर कोई कर्मचारी कार्यालय में आने में देरी करता है या छुट्टी मारता है तो उसकी सैलरी विभागीय आदेशानुसार काट ली जाएगी। इसके लिए अपने फर्जी सरकारी कार्यालय में एक सूचना पट्ट भी लगाया हुआ था। ताकि सबको ये सरकारी कार्यालय ही दिखाई पड़े और कोई शक की निगाहों से ना देखे। ( Latest News Hisar Hansi )
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी राममेहर पंडित इसके Fake government office में आने वाले किसी भी आवेदक के फॉर्म अपने हाथ से नहीं भरता था बल्कि वहां पर रखे गए फीमेल स्टाफ से ही उनके फॉर्म फिल करवाता था। ताकि हैंडराइटिंग की वजह से अदालत में उसका बचाव किया जा सके। यह किसी कानूनी जानकारी के द्वारा दी गई हिदायत भी हो सकती है।
हरियाणा अब तक न्यूज की तफ्तीश में सामने आया है कि यह इस सरकारी फर्जी कार्यालय में प्रयोग करने के लिए गाड़ी को खरीदता था और उसकी पेमेंट करने के लिए लंबा समय लेता था। लेकिन बाद में पेमेंट नहीं होती और गाड़ी का असल मालिक पैसे के लिए चक्कर काट कर थक जाता और अपनी गाड़ी को ही वापस ले जाने पर मजबूर हो जाता है।
पता चला है कि Fake government office का मुख्य आरोपित राममेहर पंडित की पत्नी किसी राजनेता की रिश्तेदार है और अब तक इसको इतने बड़े फर्जीवाड़े से बचाने में भी उसी राजनेता का हाथ हो सकता है। लेकिन यह सब पुलिस जांच का विषय है। लोगों में चर्चा है कि राजनेता ने ही उसके परिवार को नारनौंद की एक कॉलोनी में रहने के लिए मकान दिया हुआ है। जहां पर यह आरोपी प्राप्त के अंधेरे में कभी कभार आता जाता भी है। गांव में केवल इसका छोटा भाई रहता है। जिसका इसके साथ कोई आना जाना शायद नहीं है।