Hansi News Today: CM Nayab Singh Saini visit Rakhigadhi Mahotsav
Hansi News Today : हरियाणा के मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को हांसी जिले के राखीगढ़ी में पहुंचकर राखीगढ़ी महोत्सव 2025 का शुभारंभ किया गया। Rakhigadhi Mahotsav 2025 में पहुंचने पर मुख्यमंत्री का ढोल नगाड़ों के साथ बड़े ही गर्म जोशी से स्वागत किया गया। हड़प्पा सभ्यता के टीलों पास बनाए गए तालाब ( झील ) में पर्यटकों ने किश्ती का भी मजा लूटा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी राखीगढ़ी महोत्सव का शुभारंभ करने करीब साढ़े 11 बजे राखीगढ़ी ( Ancient Harappan festival in Rakhigarhi 2025 ) पहुंचे। मुख्यमंत्री के यहां पर पहुंचने पर स्कूली छात्रों और ग्रामीण महिलाओं द्वारा ढ़ोल नगाड़ों से स्वागत किया गया। उन्होंने यहां पर बनाए गए हड़प्पा ज्ञान केंद्र ( hadappa knowledge Center ) का उद्घाटन किया। Haryana CM Nayab Singh Saini ने हड़प्पा कालीन सभ्यता के टीलों की अलग-अलग साइटों से खुदाई के दौरान निकले अवशेषों का बारीकी से अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा और पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा, हांसी विधायक विनोद भयाना भी Indus valley civilization Rakhigadhi पहुंचे। यहां पर उन्होंने राखीगढ़ी महोत्सव में हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने राखीगढ़ी में बनाए गए हड़प्पा नॉलेज सेंटर का भी उद्घाटन किया। राखी गढ़ी म्यूजियम परिसर के हाल में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक कर इस सभ्यता को और भी विकसित करने पर आगमी रणनीति पर चर्चा की।
सरस्वती-सिंधु सभ्यता के महत्वपूर्ण स्थल राखीगढ़ी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा संचालित हड़प्पा ज्ञान केंद्र का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद शर्मा, सुप्रसिद्ध पुरातत्व विद प्रोफेसर वसंत शिंदे, अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रोफेसर कुलदीप चंद अग्निहोत्री भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हड़प्पा ज्ञान केंद्र आमजन को समर्पित करते हुए कहा कि इस ज्ञान केंद्र का लक्ष्य सरस्वती सिंधु सभ्यता की विशालता व समृद्ध परंपरा की जानकारी प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि विश्व को पहिए का उपहार भी भारत की इस प्राचीन सभ्यता द्वारा प्रदान किया गया। यहां पर प्राप्त विभिन्न कलाकृतियां इस बात का सशक्त प्रमाण है कि हमारी प्राचीन सभ्यता में नमस्कार तथा योग हमारे दैनिक जीवन के अभिन्न अंग रहे हैं।
हड़प्पा ज्ञान केंद्र सरस्वती सिंधु सभ्यता का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है, जिससे हमारे प्राचीन जीवन ,प्रौद्योगिकी व सांस्कृतिक विरासत की जानकारी प्राप्त होती है। उन्होंने कहा राखीगढ़ी भारत में सरस्वती सिंधु सभ्यता के सबसे बड़े स्थल के रूप में विशेष महत्व रखती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा प्रतीकात्मक उत्खनन भी किया गया जिसमें मृदभांड व पुरानी मोहरे प्राप्त हुई।
अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रोफेसर कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने बताया कि अकादमी द्वारा हड़प्पा ज्ञान केंद्र का विधिवत संचालन किया जाएगा तथा शोधार्थियों के लिए अनुकूल परिवेश का निर्माण किया जाएगा। इस अवसर पर अकादमी के सदस्य सचिव मनजीत सिंह, अकादमी निदेशक हरपाल सिंह, डॉक्टर नरेंद्र परमार, उपनिदेशक, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग हरियाणा सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

राखी गढ़ी महोत्सव में स्थानीय क्षेत्र के स्कूलों सहित दूरदराज के स्कूलों से भी हजारों की संख्या में स्कूली छात्र हड़प्पा कालीन सभ्यता के राज जानने के लिए यहां पर पहुंचे। इस तीन दिवसीय राखीगढ़ी महोत्सव में छात्रों को सीखने के लिए प्रबंध किया गया है। ताकि छात्र पुरातात्विक साइट की खुदाई से लेकर उनके अंदर से निकलने वाले अवशेषों का शुद्धिकरण, साफ सफाई और उनके संग्रह की बारीकी से जानकारी (Rakhigarhi Mahotsav archaeological experience ) हासिल करेंगे।
आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल तथा निदेशक अमित खत्री ने किया दौरा हड़प्पा कालीन पुरातात्विक साइटों का दौरा

Narnaund News Today : Rakhigadhi Mahotsav के दौरान विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल तथा विभाग के निदेशक अमित खत्री ने शुक्रवार को विश्व प्रसिद्ध राखीगढ़ी स्थित पुरातत्व विभाग की विभिन्न साइटों का दौरा किया। इस अवसर पर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार, पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. बनानी भट्टाचार्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

दौरे के दौरान आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल ने राखीगढ़ी के टीला नंबर एक तथा टीला नंबर तीन का गहन अवलोकन किया। उन्होंने खुदाई के दौरान प्राप्त हड़प्पा कालीन कच्ची एवं पक्की ईंटों, कच्चे मकानों के अवशेषों तथा अन्य महत्वपूर्ण पुरावशेषों को नजदीक से देखा और इनके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश की प्राचीन सभ्यता की अमूल्य धरोहर है, जिसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

आयुक्त एवं सचिव ने टीला नंबर एक पर स्थित अस्थाई संग्रहालय का भी दौरा किया। यहां उन्होंने खुदाई में प्राप्त विभिन्न वस्तुओं का अवलोकन किया तथा इनके संरक्षण, प्रदर्शन और पर्यटकों के लिए बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने को लेकर अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल तथा निदेशक अमित खत्री को जानकारी देते हुए बताया कि टीला नंबर एक स्थित पुरातात्विक साइट पर सेड के निर्माण को लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया है, ताकि खुदाई क्षेत्र को मौसम की मार से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि टीला नंबर तीन पर पहले से बनाए गए शेड का विस्तार किए जाने का प्रस्ताव है, जिससे वहां मौजूद पुरावशेषों का संरक्षण और बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।

आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित कार्यों को शीघ्र गति प्रदान की जाए तथा सभी विकास एवं संरक्षण कार्य आपसी समन्वय से समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यहां आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ पुरातात्विक महत्व को संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है।
फोटो कैप्शन: राखीगढ़ी गांव में हड़प्पा कालीन पुरातात्विक स्थलों का अवलोकन निरीक्षण करते आयुक्त सचिव अमित अग्रवाल साथ है निदेशक अमित खत्री।

पुरातात्विक विद् एवं कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉक्टर अप्पू सहाराण ने बताया कि तीन दिवसीय महोत्सव में आने वाले छात्रों को पुरातात्विक साइट पर अवशेषों को खोजने के लिए की मिट्टी की अलग-अलग परतों को हटाने के लिए खुदाई, खुदाई के दौरान निकलने वाले अवशेषों को सुरक्षित बाहर निकलना, उनको संग्रह करने सहित तमाम जानकारी प्रैक्टिकल रूप से सिखाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि छात्रों को यह पता चलेगा कि इतिहास को खोजने के लिए वैज्ञानिक किस प्रक्रिया से गुजरते हैं और इस दौरान किन-किन सावधानियां का ध्यान रखना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि ( Rakhigarhi Mahotsav heritage walk and performances ) मॉक खुदाई के लिए पंचायती भूमि पर 5 बाई 5 मीटर के डम्मी स्ट्रेचर तैयार किए गए हैं। जिम पुरानी सभ्यता से जुड़े अवशेष दबाए गए हैं। पहले स्ट्रेचर में मनके, चूड़ियां इत्यादि अवशेषों को मिट्टी के परत हटाकर खोजना उन्हें सुरक्षित बाहर निकलना और उनकी साफ सफाई तथा संगीत करने की तमाम जानकारी दी जाएगी। दूसरे मोक्ष स्ट्रेचर में प्राचीन कच्ची ईटों की दीवारें और प्राचीन कुएं को तलाशा जाएगा। जबकि तीसरे स्ट्रेचर में मानव कंकाल की डम्मी को खोजकर बाहर निकाला जाएगा।


राखी गढ़ी महोत्सव तीन दिनों तक चलेगा और हड़प्पा संस्कृति सहित पुरानी सभ्यता की जिज्ञासा रखने वाले लोग अपने बच्चों और परिवार के साथ यहां पर आकर तीन दिन इस सभ्यता से जुड़े राज्यों को जानकर अपनी जिज्ञासा शांत कर पाएंगे। वैसे तो राखी गाड़ी में हर वर्ष हजारों पर्यटक घूमने फिरने के लिए और 8000 वर्ष पुरानी सभ्यता के रहस्य जानने के लिए आते रहते हैं लेकिन इस महोत्सव में उन्हें हर जानकारी बारीकी से गाइडों के द्वारा दी जाएगी।
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