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किसान महापंचायत में किसान की मौत : गुस्साए किसानों ने दी चेतावनी – Hisar News

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Balsamand Kisan mahapanchayat farmer death Hisar

Hisar News : हिसार जिले के बालसमंद में किसान महापंचायत (Kisan mahapanchayat ) के दौरान एसडीएम के सामने बैठे किसान की अचानक मौत हो गई। गुसाई किसानों ने सरकार को चेतावनी दी थी मोदी सरकार के पास पूंजीपतियों का कर्ज माफ करने के लिए पैसा है। साथ ही अपनी सरकार के विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं उसके बावजूद किसानों को मुआवजा देने के लिए ₹1 भी नहीं है। अगर सरकार ने जल्दी किसानों को मुआवजा नहीं दिया तो किसान बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

 

किसान महापंचायत में किसान रामकुमार की मौत

हिसार जिले के बालसमंद में जल भराव के कारण नष्ट हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग को लेकर किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में किसानों की समस्या सुनने और उसमें सरकार तक पहुंचाने के लिए एसडीएम जय श्रद्धा पहुंची। जब एसडीएम किसानों की समस्याएं सुन रही थी कि उनके सामने बैठा किसान रामकुमार अचानक से गिर गया। उसे अस्पताल में पहुंचाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि किस की हार्ट अटैक आने से मौत हो गई।

विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च :  किसान मजदूर को देने के लिए नहीं पैसा

किसान महापंचायत में पहुंचे कामरेड बलवान सिंह पूनिया ने कहा कि सरकार के पास बेफिजूल विज्ञापनों पर खर्च करने के लिए करोड़ों रुपए हैं लेकिन दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे किसान मजदूर को राहत देने के लिए सरकार के खजाने में ₹1 तक नहीं है। यह लड़ाई अकेले किसान की नहीं बल्कि 36 बिरादरी के लोगों की है।

 

मनरेगा नहीं होती तो छोटे किसान कर चुके होते पलायन

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उन्होंने कहा कि किसानों की फसल नष्ट होने की वजह से मजदूरों को काम नहीं मिल रहा और व्यापारियों का व्यापार ठप पड़ा हुआ है। जब मनरेगा शुरू की गई थी तो सरकार में बैठे कुछ लोग गालियां दे रहे थे। अगर मनरेगा नहीं होती तो आज छोटे किसान पलायन कर चुके होते। उन्होंने कहा कि अगर मनरेगा कुछ समय पर लागू नहीं किया गया होता तो मजदूर कम पैसे में भी दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए मजबूर होते।

 

मुआवजा ना देने के बहाने तलाश में लगी सरकार

पूरा इलाका पानी से जल मग्न है और पूरे हरियाणा में करीब 2 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि बाढ़ की चपेट में आने से किसने की पक्की पक्की फसल नष्ट हो गई। लेकिन भाजपा सरकार किसानों को उनके नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा ना देना पड़े इसके बहाने तलाशने में लगी हुई है।

 

मोदी की सुरक्षा में नहीं कोई भी किसान का बेटा

किसान नेता संदीप धीरणवास खारिया की जमीन पर डोभी गांव के पास अवैध तरीके से शराब का ठेका खोला हुआ है। अगर प्रशासन ने एक सप्ताह के अंदर इसे यहां से नहीं हटाया गया तो किस इसको उखाड़ फेंकेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सुरक्षा घेरे में किसी किसान के बेटे तक को नहीं रखते और खुद को किसान हितैषी होने का झूठ ढ़िडोरा पीट रहे हैं।

 

चुनाव में किसान गरीब मजदूर का मुद्दा : जीतने के बाद आलीशान महलों में चैन की नींद

किसान नेताओं ने कहा कि चुनाव के समय किसान मजदूर के हितों के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वाले भाजपा के नेता चुनाव जीतने के बाद अपने आलीशान महलों में चैंन की नींद सो रहे हैं और किसान मजदूर भूखे पेट सरकार को कोने में लगे हुए हैं। अगर समय रहते सरकार ने किसने और मजदूरों की सुध ले ली होती तो आज किसानों के सामने यह संकट पैदा नहीं होता।

 

12 जनवरी तक किसानों की मांगे नहीं मानी तो होगी आर पार की लड़ाई

किसानों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 12 जनवरी तक किसानों को उनके नुकसान का उचित मुआवजा नहीं दिया गया तो किसान बड़े स्तर पर आंदोलन का बिल्कुल बजा देंगे और प्रत्येक तहसील व जिला मुख्यालय पर पड़ाव डाल देंगे। जिसके जिम्मेवारी सरकार और प्रशासन की होगी।

 

सेटेलाइट से खेतों से उठता धुंआ उठता दिखाई देता है तो किसानों की बर्बाद फैसले क्यों नहीं

किसान नेताओं ने महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि सेटेलाइट से सरकार खेतों से उठता हुआ पराली का धुआं तो दिखाई दे देता है लेकिन इतने लंबे चौड़े इलाके में बर्बाद हुई फसलों का नजारा उन्हें दिखाई नहीं देता। सैटेलाइट और अन्य संसाधन होने के बावजूद भी किसानों को मुआवजा देने के लिए सरकार समय पर समय बढ़ाए जा रही है। ताकि किसान परेशान होकर चुपचाप अपने घरों में बैठ जाए।

 

देश में तानाशाह का राज

किसान सभा हनुमानगढ़ के महासचिव नए संबोधित करते हुए कहा कि देश में तानाशाह का राज आ चुका है। तानाशाही हमेशा गरीब मजदूर और किसानों को ही कुचलना का काम सबसे पहले करती है। यही हाल मौजूदा प्रदेश और केंद्र की सरकार की कार्य प्रणाली को देखकर लग रहा है।

 

दिल्ली की गद्दी मिलते ही किसानों को भूली भाजपा सरकार

किसान दुखों के आंसू रोने के लिए मजबूर है और उसके बच्चे भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। जब तक इनका दिल्ली पर राज नहीं था तो इन्हें चैन की नींद नहीं आती थी और हर तरफ किसान और मजदूर की याद आती थी। लेकिन दिल्ली की राजगद्दी मिलने पर इन्होंने किसानों और मजदूरों को मरने के लिए छोड़ दिया है।

 

किसान महापंचायत में आए किसान की हार्ट अटैक से मौत

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जब किसान नेता महापंचायत में अपने विचार रख रहे थे इस दौरान मंच के सामने ही बालसमंद निवासी किसान रामकुमार बैठकर किसानों की बातें ध्यान से सुन रहा था। करीब 4 एसडीएम जय शरदा किसानों का मांग पत्र लेने के लिए उनके बीच पहुंची तो किसान रामकुमार को अचानक से हार्ट अटैक आ गया। किसान राम कुमार के सीने में दर्द की शिकायत पर वहां पर मौजूद अन्य किसान उसे तुरंत ही उठाकर एक निजी अस्पताल में ले गए जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक किसान को शहीद का दर्जा देने की मांग

महापंचायत में मौजूद किसानों ने एसडीएम से भी मांग की है कि धरना स्थल पर किसान की मौत हुई है और उसे शहीद का दर्जा दिया जाए। मृतक किसान रामकुमार पांच बच्चों का पिता है जिनमें से उसके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। सभी बच्चे शादीशुदा हैं। इसका एक बेटा शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर कार्यरत है।

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