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Harappan Civilization: न बैटरी, न आधुनिक मशीनें… राखीगढ़ी में फिर दिखेगा हजारों साल पुराना हुनर, विदेशी भी होंगे हैरान!

By sunilkohar

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Harappan Civilization Pottery Making

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Rakhigarhi Festival 2026: हड़प्पा सभ्यता का देसी अंदाज, राखीगढ़ी महोत्सव में बैलगाड़ी की सवारी करेंगे विदेशी मेहमान

19 से 25 अक्टूबर तक सात दिवसीय महोत्सव का आयोजन, मिट्टी के बर्तन बनाने से लेकर हड़प्पन सील और पारंपरिक कलाकृतियों तक दिखेगी हजारों साल पुरानी संस्कृति की झलक

हरियाणा न्यूज ( सुनील कोहाड़ )। हजारों साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता ( Harappan Civilization Exhibition in Haryana ) की विरासत को करीब से जानने और महसूस करने का मौका इस बार राखीगढ़ी महोत्सव में मिलेगा। 19 से 25 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले सात दिवसीय महोत्सव को खास बनाने के लिए प्राचीन संस्कृति और हरियाणा की देसी परंपराओं का अनूठा संगम तैयार किया जा रहा है। यहां विदेशी मेहमान हड़प्पन शैली की बैलगाड़ी में सवारी करने के साथ हरियाणवी व्यंजनों का स्वाद चख सकेंगे। वहीं, मिट्टी के चाक पर अपने हाथों से हड़प्पा कालीन शैली के बर्तन बनाने और प्राचीन कलाकृतियों को करीब से देखने का अवसर भी मिलेगा।


 

Harappan Civilization in Rakhigarhi Haryana

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राखीगढ़ी की पहचान स्थापित करने के उद्देश्य से इस बार महोत्सव का आयोजन सात दिनों तक किया जा रहा है। पहले यहां एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित होता था, जबकि पिछले वर्ष तीन दिवसीय महोत्सव रखा गया था। अब सात दिवसीय आयोजन के जरिए राखीगढ़ी को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

विदेशी मेहमानों को मिलेगा हरियाणा की संस्कृति का अनुभव ( Harappan Civilization Exhibition in Haryana )

महोत्सव में आने वाले विदेशी मेहमानों के स्वागत और उनके अनुभव को यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। उन्हें हड़प्पन शैली की पारंपरिक बैलगाड़ी में सवारी कराने की योजना है। खानपान में भी हड़प्पा सभ्यता से प्रेरित व्यंजनों के साथ हरियाणा के पारंपरिक देसी पकवान परोसने की तैयारी है।

महोत्सव में प्राचीन सभ्यता से जुड़ी वस्तुओं और कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसका उद्देश्य लोगों को हजारों साल पुरानी जीवनशैली, कला और शिल्प परंपराओं से रूबरू कराना है। खास बात यह है कि राखीगढ़ी की स्थानीय महिलाएं भी अपनी कला के माध्यम से इस विरासत को सहेजने में योगदान दे रही हैं। वे हड़प्पा कालीन अवशेषों से प्रेरित आकृतियों को दरी पर उकेरकर पारंपरिक हस्तकला को नया रूप दे रही हैं।

मिट्टी के चाक पर खुद बना सकेंगे हड़प्पा शैली के बर्तन

Indus Valley Civilization Culture and Heritage
मिट्टी से बनाया हुआ छेद वाले बर्तन को दिखाते हुए कलाकार राहुल कालवा।

जींद जिले के गांव कालवा के कलाकार राहुल लंबे समय से हड़प्पा सभ्यता की शैली के मिट्टी के बर्तन और कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। उन्होंने खुदाई में मिली प्राचीन मुहरों से प्रेरित आकृतियों को मिट्टी में उकेरकर उनके प्रतिरूप बनाए हैं। इनमें बैल, हाथी, सींग वाले गैंडे, यूनिकॉर्न, पशुपति और स्वास्तिक चिह्न जैसी आकृतियां शामिल हैं। इन प्रतिरूपों को फ्रेम में सजाकर उपहार के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

राहुल के अनुसार, इन कलाकृतियों को लोग अपने घरों के ड्राइंग रूम में सजावट के लिए भी रखते हैं। विभिन्न बड़े आयोजनों में भी इनका इस्तेमाल उपहार के रूप में किया जाता है।

राखीगढ़ी महोत्सव में कलाकार राहुल मिट्टी के चाक पर बर्तन बनाने की कार्यशाला लगाएंगे। यहां आने वाले लोग खुद अपने हाथों से हड़प्पा शैली से प्रेरित बर्तन बना सकेंगे। प्रदर्शनी में डिश ऑन स्टैंड, छेद वाले बर्तन, एस-शेप जार, छोटी मटकी, मिट्टी के झुनझुने और दीपावली के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए दीये भी देखने को मिलेंगे।

दरी पर उकेरी जा रही हजारों साल पुरानी विरासत

राखीगढ़ी की महिलाएं पारंपरिक दरी निर्माण के माध्यम से प्राचीन सभ्यता की कलात्मक पहचान को जीवंत रखने का प्रयास कर रही हैं। गांव की वीरमति देवी, भतेरी देवी, मनीषा और शीला दरी बनाने में निपुण हैं। वे हड़प्पा कालीन अवशेषों और उनसे प्रेरित आकृतियों को दरी के डिजाइन में शामिल कर इन्हें आकर्षक रूप देती हैं।

स्थानीय परंपराओं में भी इस प्राचीन विरासत की झलक देखने को मिलती है। दीपावली जैसे त्योहारों पर मिट्टी के पारंपरिक दीयों का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह राखीगढ़ी में पुरानी सभ्यता से प्रेरित कला और ग्रामीण जीवनशैली आज भी लोगों से जुड़ी हुई है।

सात दिन तक संस्कृति और सभ्यता का संगम

19 से 25 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला राखीगढ़ी महोत्सव प्राचीन विरासत, पारंपरिक खानपान, हस्तकला और स्थानीय संस्कृति को एक मंच पर लाने का प्रयास है। महोत्सव के जरिए देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को यह दिखाने की तैयारी है कि हजारों साल पुरानी सभ्यता की कलात्मक परंपराएं आज भी स्थानीय कलाकारों और ग्रामीण जीवन में दिखाई देती हैं।

हड़प्पन शैली की बैलगाड़ी, मिट्टी के बर्तन बनाने की कार्यशाला, प्राचीन मुहरों के प्रतिरूप और महिलाओं की हस्तकला इस आयोजन को खास पहचान दे सकते हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर रहेंगी कि सात दिवसीय महोत्सव राखीगढ़ी को पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में कितनी भूमिका निभाता है।

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