धारूहेड़ा नाला सफाई घोटाला का मामला: बिना नाले साफ किए बिल पास कराने के आरोप
Rewari News Today: नगर पालिका धारूहेड़ा क्षेत्र में बिना नाले साफ किए ही कथित 12 लाख रुपये का फर्जी बिल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में मिलीभगत और लीपापोती का खेल के भी आरोप हैं। गुरुवार को निर्धारित भौतिक सत्यापन के लिए कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) मौके पर पहुंचे ही नहीं। अधिकारियों के न आने से एक महीने के भीतर दूसरी बार भौतिक निरीक्षण टल गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी रोष व्याप्त है।
धारूहेड़ा नाला सफाई घोटाला
दरअसल, सेवानिवृत्त जिला लोक संपर्क अधिकारी (डीपीआरओ) जेपी यादव ने करीब दो महीने पहले निदेशक, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, मुकुल कुमार को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सफाई कराने की मांग उठ रही थी, लेकिन धरातल पर एक भी काम किए बिना ही 12 लाख रुपये का भुगतान हड़पने के लिए बिल तैयार कर लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए शहरी स्थानीय निकाय निदेशक मुकुल कुमार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बिल के भुगतान पर रोक लगा दी थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पिछले दो महीनों से अधिकारी कार्रवाई के नाम पर केवल लीपापोती करने में जुटे हैं।
शिकायतकर्ता को भी पत्र जारी कर बुलाया, खुद नहीं आए नगर पालिका अधिकारी
नगरपालिका धारूहेड़ा द्वारा जारी पत्र के मुताबिक, नगर परिषद रेवाड़ी के कार्यकारी अभियंता द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को नालों की सफाई का भौतिक निरीक्षण किया जाना था। इस पत्र के जरिए शिकायतकर्ता को भी निरीक्षण के दौरान मौके पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। इससे पहले 12 अक्टूबर को भी निरीक्षण के लिए तारीख तय थी, तब भी अधिकारी नहीं आए थे। अब दूसरी बार भी कार्यकारी अभियंता के न पहुंचने से जांच प्रक्रिया पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल, जांच हो
सेवानिवृत्त जिला लोक संपर्क अधिकारी जेपी यादव ने ने सवाल उठाया है कि जिन फर्जी बिलों और भ्रष्टाचार को रोकना नगरपालिका जनप्रतिनिधियों की मुख्य जिम्मेदारी है, वे इस पूरे मामले पर चुप्पी साधकर क्यों बैठे हैं? उन्होंने मांग की है कि नालों की निष्पक्ष भौतिक जांच जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए और सफाई का कार्य पूरा हुए बिना एक भी रुपया जारी न किया जाए।









