World Record Milk Production Buffalo in India
इससे पहले सिंघवा खास कि ईश्वर सिंघवा की भैंस राधा के नाम था यह रिकॉर्ड
हरियाणा न्यूज ( सुनील कोहाड़ ) नारनौंद : हरियाणा के हांसी क्षेत्र के गांव मिर्चपुर के प्रगतिशील पशुपालक नवदीप की मुर्राह नस्ल की भैंस ‘दुर्गा’ ( Durga Buffalo World Record ) ने एक दिन (24 घंटे) में 41.58 किलोग्राम दूध उत्पादन कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। यह दुग्ध उत्पादन रिकॉर्ड पशुपालन एवं डेयरी विभाग,हरियाणा सरकार की स्वदेशी गाय के संरक्षण एवं विकास तथा मुर्राह विकास योजना के अंतर्गत आयोजित दुग्ध रिकॉर्डिंग प्रक्रिया के दौरान दर्ज किया गया। इससे पहले यह रिकॉर्ड गांव सिंघवा खास के किस ईश्वर सिंघवा की भैंस राधा के नाम था। उन्होंने 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर यह रिकॉर्ड बनाया था।
Best Murrah Buffalo in Haryana
दुग्ध रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया पशुपालन विभाग के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की देखरेख में संपन्न की गई। इस उपलब्धि से क्षेत्र के पशुपालकों में उत्साह है और यह वैज्ञानिक पशुपालन एवं नस्ल सुधार के महत्व को रेखांकित करती है। गांव मिर्चपुर के किसान पशुपालक नवदीप ने बताया कि दुर्गा उनके घर की पालतू भैंस है यह तीसरी पीढ़ी की है। रिकॉर्ड बनने से पहले ही उनकी छोटी बेटी ज्योति ने भैंस का नाम दुर्गा रख दिया था और कहा था कि अब की बार यह पुराने रिकॉर्ड तोड़कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाएगी।
दुर्गा भैंस को खरीदने के लिए 40 लाख रुपए की पेशकश
भैंस ‘दुर्गा’ के बेहतर दुग्ध उत्पादन में संतुलित एवं गुणवत्तापूर्ण पशु आहार, उचित प्रजनन प्रबंधन, नियमित स्वास्थ्य देखभाल तथा पशु चिकित्सकों के परामर्श की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वह हर रोज दुर्गा को खल, बिनोला, चना, मेथी, सोयाबीन, गेहूं का दलिया,चने की चुरी, हरा चारा करीब 15 किलो राशन खिलाते हैं। बैठने के लिए गद्दे और सरसों के तेल की मालिश भी की जाती है। पिछले दिनों ही रोहतक के एक व्यापारी ने भैंस को खरीदने के लिए 40 लाख रुपए की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने भैंस को नहीं बेचा वही इनके 18 महीने के कटड़े की कीमत भी सात लाख रुपए लग चुकी है।
हरियाणा की महत्वपूर्ण स्वदेशी मुर्राह नस्ल भैंस
पशुपालन विभाग के अनुसार, इस प्रकार की उपलब्धियां पशुपालकों को उन्नत पशु प्रबंधन, वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों, संतुलित आहार तथा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। मुर्राह नस्ल हरियाणा की महत्वपूर्ण स्वदेशी भैंस नस्ल है और इसके संरक्षण, संवर्धन एवं उत्पादकता में वृद्धि से डेयरी क्षेत्र को लाभ मिल सकता है।
विभागीय योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को प्रोत्साहित करने, स्वदेशी नस्लों के विकास को बढ़ावा देने तथा आधुनिक डेयरी प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जाते हैं। इससे पशुपालकों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में सहायता मिल सकती है।










