NOTA defeated 22 candidates in Hisar seat
महज 6 उम्मीदवारों को नोटा से अधिक मिले वोट
हरियाणा न्यूज/हिसार : हिसार लोकसभा की हॉट सीट पर अब की बार कई चौंकाने वाले रिकार्ड बने हैं। इनमें से एक ऐसा कि जिन मतदाताओं ने किसी भी उम्मीदवार को पसंद न करते हुए नोटा का इस्तेमाल किया। मतदाताओं के इस फैसले से भी कुल 28 प्रत्याशियों में से 22 को चित्त कर दिया। हिसार सीट से 3366 मतदाताओं ने नोटा के बटन का इस्तेमाल किया।
दूसरा रिकार्ड कांग्रेस ने हिसार सीट पर बनाया है। कांग्रेस को बीते 20 सालों से इस सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी। अब की बार जयप्रकाश ने हिसार से कांग्रेस के इस अभिशाप को दूर कर दिया है। तीसरा रिकार्ड यह कि भाजपा प्रत्याशी को छोड़ बाकी सभी 26 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है।
गौर करने वाली बात यह कि इस सीट पर वर्ष 2004 में जयप्रकाश ही कांग्रेस की ओर से आखिरी सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे थे। 2004 चुनाव के बाद लोकसभा के 3 आम चुनाव और एक उपचुनाव हुआ। चारों चुनावों में ही कांग्रेस प्रत्याशी चारों खाने चित्त रहे। प्रत्याशी के जीत की दहलीज पर पहुंचना तो दूर की बात दूसरे नंबर पर भी नहीं पहुंच सके। 2011 के उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे जयप्रकाश, वर्ष 2014 आम चुनाव में प्रो. संपत सिंह व 2019 में भव्य बिश्नोई की जमानत जब्त हो गई थी।
जेजेपी इनेलो प्रत्याशियों में जेठानी से देवरानी के वोट ज्यादा
जजपा प्रत्याशी नैना चौटाला व इनेलो प्रत्याशी सुनैना चौटाला में वोटों का अंतराल देखें तो देवरानी जेठानी से आगे निकल गई। दूसरा दोनों को इस बात का अहसास था कि कम वोट मिलने वाले हैं। इसके चलते देवरानी-जेठानी मतगणना केंद्र पहुंची ही नहीं। इन पार्टी के जिला अध्यक्ष तक नहीं आए। वर्ष 2014 के चुनाव में इनेलो प्रत्याशी के तौर पर दुष्यंत चौटाला सांसद बने थे। 2019 के चुनाव में जजपा प्रत्याशी के तौर पर दूसरे स्थान पर रहे। इस बार जजपा को पांचवें स्थान पर खिसक गई। वहीं, चौधरी रणजीत सिंह मतगणना केंद्र पहुंचे। हिसार विधानसभा की मतगणना होने पूरी होने से पहले ही रणजीत सिंह केंद्र छोड़ कर चले गए।
भाजपा से आक्रोशित मतदाताओं का कांग्रेस को मिला फायदा
किसान आंदोलन में सरकार से खफा किसान, युवाओं में रोजगार को लेकर आक्रोश और महंगाई की मार को लेकर भाजपा को दस साल के शासन की एंटी इनकंबंसी भी झेलनी पड़ी है। भाजपा और जेजेपी नेताओं को ग्रामीण इलाकों में बहिष्कार भी झेलना पड़ा। इसके अलावा 2022 में आदमपुर उपचुनाव में बिश्नोई परिवार के सामने 51,000 वोट हासिल करने के बाद मजबूत आत्मविश्वास काम नहीं आया। उकलाना, नारनौंद, उचाना विधानसभा में कांग्रेस के लिए एकतरफा माहौल बनना। भाजपा संगठन की भीतरीघात, पैसे के गबन तक के अफवाहें। रणजीत सिंह का पूरा भाषण केवल नरेंद्र मोदी पर केंद्रित रहना। अनुसूचित वर्ग का वोट भाजपा की बजाए कांग्रेस की ओर स्थानांतरित होना। विरोध होने के बाद भी पूर्व सीएम मनोहरलाल का हिसार में प्रचार करना, जिससे नकारात्मक असर को भी अहम कारण बताया जा रहा है।
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