Kisan andolan Part Two: path of kisan will not be easy regarding the Delhi march; kisan of Punjab will have to pass the litmus test before entering Haryana.
हरियाणा न्यूज चंडीगढ़ : किसान आंदोलन पार्ट वन की तरह इस बार किसानों का दिल्ली कूच की राह आसान नहीं होगी। दिल्ली पहुंचने से पहले पंजाब के किसानों को हरियाणा बॉर्डर पार करने में काफी परेशानी उठानी पड़ सकती है इसके लिए प्रशासन ने पंजाब की तरफ से हरियाणा में प्रवेश करने वाले रास्तों पर कंटीला तारों के साथ-साथ कंक्रीट से बने बड़े बड़े अवरोधक किसानों की रफ्तार को कम कर उनके बुलंद हौसलों को कमजोर करने में सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। हालांकि पिछले आंदोलन में भी सरकार ने दिल्ली के बॉर्डरों पर किसानों के ट्रैक्टर मार्च को रोकने के लिए पुख्ता प्रबंध किए हुए थे लेकिन उसके बावजूद भी किसान तमाम बढ़ाओ को पार करते हुए लाल किले तक जा पहुंचे थे। लेकिन इस बार किसानों को यह वाधा दिल्ली के बॉर्डरों पर ही नहीं बल्कि हर जिले में पार करनी होगी।
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| पंजाब के किसानों को रोकने के लिए हरियाणा पंजाब के बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेट्स। |
दिल्ली में प्रवेश करने से पहले पंजाब के किसानों को हरियाणा से होते हुए सफर तय करना होगा लेकिन पंजाब के किसानों को हरियाणा में प्रवेश करने से पहले हरियाणा पंजाब के बॉर्डर पर अग्नि परीक्षा देनी होगी। क्योंकि सिरसा, फतेहाबाद, जींद, कैथल और अंबाला प्रशासन ने पंजाब से आने वाले तमाम रास्तों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी है। किसानों के ट्रैक्टरों की रफ्तार को रोकने के लिए प्रशासन ने तमाम रास्तों पर कड़ी बेरिकेट्स लगानी शुरू कर दी है। इसके लिए शासन की तरफ से कंटीले तार और कंक्रीटो से बने बड़े-बड़े पत्थरों को जेसीबी और हाइड्रा मशीन की मदद से पंजाब की तरफ से आने वाले रास्तों के आसपास रखा गया है। ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें सड़क के बीच में डालकर किसानों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
आपको बता दें कि हरियाणा पंजाब में किसानों ने अलग-अलग जगह पर किसान रैलियों का आयोजन कर किसान आंदोलन पार्ट 2 में शामिल होने के जोर-शोर से प्रसार किया गया था। फतेहाबाद सहित कई जिलों में किसानों द्वारा हजारों ट्रैक्टरों के साथ ट्रैक्टर मार्च निकालकर सरकार को चेताया भी जा चुका है। जिस प्रकार से प्रशासन किसने को रोकने का प्रयास कर रहा है इस तरह किसान भी दिल्ली कूच को लेकर अपनी तैयारी में जुटे हुए हैं।
किसानों के इस दिल्ली कूच से किसान नेता गुरनाम सिंह चढुनी ने दूरी बनाई हुई है और वह अपने समर्थित किसानों को इससे दूर रहने के लिए गांव-गांव शहर जाकर कह रहे हैं। वहीं प्रशासन के आल्हा अधिकारी भी अपने एरिया में सरपंचों व अन्य मौजिज लोगों के साथ बैठक कर किसानो और सरकार से इस मसले को बातचीत से सुलझाने की गुहार लगा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारी में जुटा हुआ है।
सरकार और प्रशासन के लिए सर दर्द बन सकते हैं पंजाब के किसान
हरियाणा सरकार और प्रशासन के लिए हरियाणा के किसानों से ज्यादा पंजाब के किसानों का दिल्ली कूच सर दर्द का कारण बन सकता है। क्योंकि पिछले आंदोलन में भी पंजाब के किसानों ने दिल्ली का रुख किया तो प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश करते ही हरियाणा के किसानों ने छोटे भाई का फर्ज निभाते हुए पंजाब के किसानों का साथ दिया और जगह-जगह रास्ते ब्लॉक कर दिए थे। हरियाणा का किसान आज भी काफी ठंडे दिमाग का प्रयोग करता है लेकिन जब कोई मुझे बताती है तो हरियाणा पंजाब के किस एक दूसरे का साथ देने में कभी भी पीछे नहीं हटते।
राजनितिक दल हरियाणा पंजाब के किसानों को एसवाईएल को लेकर करते रहते हैं गुमराह
एसवाईएल के पानी को लेकर राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक रोटियां सैंकने में लगे हुए हैं और हरियाणा के राजनीतिक नेता पंजाब सरकार और पंजाब के किसानों को इसका कारण बताकर अपनी राजनीति चमका रहे हैं, जबकि पंजाब के राजनेता हरियाणा को पानी न देने की बात करके पंजाब में वाह वाही लूट रहे हैं। ऐसा नहीं है कि पंजाब हरियाणा और केंद्र में कभी एक दल या उसके सहयोगी की सरकार ना रही हो। परंतु आज तक हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं मिल पाया है।
किसान आंदोलन 2020 इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है, दिल्ली में किसानों द्वारा निकाला गया ट्रैक्टर मार्च की यादें आखिर ताजा हो सकती हैं इससे निपटने के लिए किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए सरकार ने पुख्ता प्रबंध शुरू कर दिए हैं। किसानों का दिल्ली कूच का ऐलान की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है वैसे ही सब किसानों प्रशासन की तरफ से की जा रही तैयारी की जानकारी हासिल करने में लगा हुआ है।
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