Haryana biggest bank robbery : 100 करोड़ की बैंक रोबरी
हरियाणा न्यूज टूडे : यह कहानी हरियाणा की सबसे बड़ी बैंक डकैती की है। महज सौ कदम की दूरी में बनाई गई सुरंग से 100 करोड़ की इस रोबरी को गांव के साधारण युवकों ने अंजाम दिया है। साल 2014 में हुई इस रोबरी की कहानी बेहद रोचक है। 27 अक्टूबर 2014 को मंगलवार की सुबह पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारियों ने सामान्य दिनों की तरह बैंक में कदम रखा परंतु ज्यों की स्ट्रांग रूम का ताला खोला तो उन्हीं कदमों के नीचे से जमीन खिसक गई। स्ट्रांग रूम में 350 लॉकरों में एक ही कतार में सारे लॉकर खुले हुए थे। कुछ कागजात जमीन पर बिखरे पड़े थे और खुले लॉकर खाली थे। बैक मैनेजर ने एक लॉकर के नीचे फर्श पर देखा तो एक गड्डा दिखाई दिया। रोबरी इसी गड्डे में बनाई गई सुरंग से की गई थी। पुलिस बुलाई गई। पुलिस जांच कर रही थी, बैंक कर्मी लॉकरों से गायब सामान गिनने लगा तो पता चला कि 86 लॉंकरों से 100 करोड़ के जेवर गायब हैं।
पुलिस ने गड्डे में घुसकर बाहर निकलना शुरू किया तो महज 100 कदम की दूरी पर पुलिसवाले एक मकान में निकले। यह मकान करीब 5 सालों से बंद पड़ा था। यहीं से बैंक तक सुरंग खोदी गई और 100 करोड़ की डकैती डाली गई। इस कहानी में रोचक यह भी कि इस डकैती को अंजाम देने वाले चार युवक न तो पेशेवर अपराधी थे और न ही तकनीकी तौर पर कुछ जानते थे। इसके बावजूद सुरंग खोदना और पूरे सुनियोजित तरीके से रोबरी को अंजाम देने की घटना पर हरियाणा ही नहीं देश व विदेशों तक लोग हैरत में पड़ गए। हरियाणा की इस सबसे बड़ी डकैती का खुलासा भी बहुत ही चौंकाने वाले घटनाक्रम से हुआ। जब इस डकैती का राज खुला तो पुलिस भी स्तब्ध रह गई।
इससे पहले 100 करोड़ के डाके में सरकार, पुलिस व दिल्ली की सरकार हिल गई। दिल्ली से पीएमओ का एक अधिकारी पहुंचा और दिल्ली की जांच एजेंसी तक जुटी परंतु इस डकैती डालने वालों का कोई सुराग नहीं लगा। लॉकर के मालिकों के प्रदर्शन और रोबरी को अंतरराष्ट्रीय चोरों का कारनामा माना जा रहा था। हरियाणा के डीजीपी ने खुद कमान संभाल ली परंतु कोई सुराग नहीं लगा। डकैती डालने वालों ने कोई सबूत तक नहीं छोड़ा था। पुलिस ने आखिरकार 10 लाख रुपये इनाम की घोषणा कर दी।
इनाम की घोषणा करने के अगले दिन एक गुमनाम फोन आता है। उस शख्स ने बताया कि वह बैंक से महज 5 किलोमीटर दूरी पर एक गांव से बोल रहा है और डकैती में शामिल दो युवक इसी गांव के हैं। पुलिस ने इस सूचना को संजीदगी से लिया और गांव में पहुंचकर उन दो लडक़ों को पकड़ा तो पहली पूछताछ में ही गांव के ही ईंट भट्ठे में मिट्टी में दबाया गया साढ़े 8 किलोग्राम सोना बरामद कर लिया जाता है। 60 हजार रुपये नकद मिले। तीन और लोगों के नाम बताए तो पांचों को पकड़ लिया। यहां उन पांचों की पूरी कहानी सामने आती है। मास्टर माइंड का महिपाल मूल नाम है। वही उस मकान का मालिक था, जिससे सुरंग खोदी गई थी। जब उसे पता चलता है कि पुलिस को सब पता चल गया तो वह जहर खाकर खुदकुशी कर लेता है।
कहानी में नया ट्विस्ट आता है। महिपाल व उसका साला सतीश दोनों पानीपत में प्रापर्टी का काम करते थे। इसमें घाटा हो जाता है इसकी भरपाई के लिए वे उनके खाली पड़े मकान के पास बैंक में रोबरी की प्लान बनाते हैं। इसके लिए दोनों जीजा साला ही शुरूआत करते हैं। प्लान बनाई जाती है और 150 फुट लंबी व ढाई फुट चौड़ी सुरंग एक महीने पहले खुदाई से पहले तीन युवक और युवकों को शामिल किया जाता है। इनमें एक कंप्यूटर इंजीनियर, दूसरा बड़ई और तीसरा बेरोजगार था। मास्टर माइंड ने लूट का 50 फीसद उसका व 50 फीसद बाकी चारों का। पूरी रेकी करते हैं। मकान व बैंक के बीच में एक गली। दिन में घर से खुदाई शुरू कर दी। डेढ़ महीने खुदाई की। बड़ई खुदाई करता था, महिपाल निगरानी, बाकी का काम मिट्टी की ढुलाई। शनिवार की रात को सुरंग के दूसरे सिरे को बंैक में खोला गया। छह घंटे तक लोहे की राड से लॉकर तोड़े। 100 करोड़ के जेवर निकाले गए।
बड़ई व बेरोजगार दोनों ही गांव के रहने वाले 25 से 30 साल के। पूरे देश में चर्चा और इन दो लडक़ों ने अपने हिस्से के जेवर व नकदी से मौज करते हुए अपने साथियों के साथ शराब पी। उस समय बैंक डकैती की बात चली तो नशे में बेरोजगार युवक ने कहा कि पुलिस कितना ही जोर लगा ले, उन तक नहीं पहुंच पाएगी। उनमें से एक साथी ने जब यह सुना तो पुलिस द्वारा रखे गए 10 लाख के इनाम के लालच में फोन पर सूचना दे दी। दोनों युवक पकड़े गए। पूरी रोबरी का किस्सा सुनाया और सारे जेवर बरामद किए गए नकदी थोड़ी कम मिली। महज 57 सेकेंड में पार करने वाली इस सुरंग को बनाने वाले इन पांच सामान्य युवकों द्वारा प्रफेक्ट रोबरी किए जाने की कहानी बेहद रोमांचकारी है। सुरंग खोदते हुए एकदम प्रफेक्ट खुदाई। मिट्टी को निकाल कर रात के समय बाहर फेंकना। मकान में सुरंग खोदने के समय किसी भी युवक द्वारा मोबाइल फोन न रखने। सुरंग खोदने के दौरान जमीन में दबी फोन, पानी और अन्य केबल का पूरी तरह ध्यान रखने का सारा जिम्मा मास्टरमाइंड महिपाल का था। बड़बोलेपन के एक किरदार की वजह से पकड़े गए चार आरोपी फिलहाल जेल में हैं।
– सुरेंद्र सोढी
पुलिस ने गड्डे में घुसकर बाहर निकलना शुरू किया तो महज 100 कदम की दूरी पर पुलिसवाले एक मकान में निकले। यह मकान करीब 5 सालों से बंद पड़ा था। यहीं से बैंक तक सुरंग खोदी गई और 100 करोड़ की डकैती डाली गई। इस कहानी में रोचक यह भी कि इस डकैती को अंजाम देने वाले चार युवक न तो पेशेवर अपराधी थे और न ही तकनीकी तौर पर कुछ जानते थे। इसके बावजूद सुरंग खोदना और पूरे सुनियोजित तरीके से रोबरी को अंजाम देने की घटना पर हरियाणा ही नहीं देश व विदेशों तक लोग हैरत में पड़ गए। हरियाणा की इस सबसे बड़ी डकैती का खुलासा भी बहुत ही चौंकाने वाले घटनाक्रम से हुआ। जब इस डकैती का राज खुला तो पुलिस भी स्तब्ध रह गई।
इससे पहले 100 करोड़ के डाके में सरकार, पुलिस व दिल्ली की सरकार हिल गई। दिल्ली से पीएमओ का एक अधिकारी पहुंचा और दिल्ली की जांच एजेंसी तक जुटी परंतु इस डकैती डालने वालों का कोई सुराग नहीं लगा। लॉकर के मालिकों के प्रदर्शन और रोबरी को अंतरराष्ट्रीय चोरों का कारनामा माना जा रहा था। हरियाणा के डीजीपी ने खुद कमान संभाल ली परंतु कोई सुराग नहीं लगा। डकैती डालने वालों ने कोई सबूत तक नहीं छोड़ा था। पुलिस ने आखिरकार 10 लाख रुपये इनाम की घोषणा कर दी।
इनाम की घोषणा करने के अगले दिन एक गुमनाम फोन आता है। उस शख्स ने बताया कि वह बैंक से महज 5 किलोमीटर दूरी पर एक गांव से बोल रहा है और डकैती में शामिल दो युवक इसी गांव के हैं। पुलिस ने इस सूचना को संजीदगी से लिया और गांव में पहुंचकर उन दो लडक़ों को पकड़ा तो पहली पूछताछ में ही गांव के ही ईंट भट्ठे में मिट्टी में दबाया गया साढ़े 8 किलोग्राम सोना बरामद कर लिया जाता है। 60 हजार रुपये नकद मिले। तीन और लोगों के नाम बताए तो पांचों को पकड़ लिया। यहां उन पांचों की पूरी कहानी सामने आती है। मास्टर माइंड का महिपाल मूल नाम है। वही उस मकान का मालिक था, जिससे सुरंग खोदी गई थी। जब उसे पता चलता है कि पुलिस को सब पता चल गया तो वह जहर खाकर खुदकुशी कर लेता है।
कहानी में नया ट्विस्ट आता है। महिपाल व उसका साला सतीश दोनों पानीपत में प्रापर्टी का काम करते थे। इसमें घाटा हो जाता है इसकी भरपाई के लिए वे उनके खाली पड़े मकान के पास बैंक में रोबरी की प्लान बनाते हैं। इसके लिए दोनों जीजा साला ही शुरूआत करते हैं। प्लान बनाई जाती है और 150 फुट लंबी व ढाई फुट चौड़ी सुरंग एक महीने पहले खुदाई से पहले तीन युवक और युवकों को शामिल किया जाता है। इनमें एक कंप्यूटर इंजीनियर, दूसरा बड़ई और तीसरा बेरोजगार था। मास्टर माइंड ने लूट का 50 फीसद उसका व 50 फीसद बाकी चारों का। पूरी रेकी करते हैं। मकान व बैंक के बीच में एक गली। दिन में घर से खुदाई शुरू कर दी। डेढ़ महीने खुदाई की। बड़ई खुदाई करता था, महिपाल निगरानी, बाकी का काम मिट्टी की ढुलाई। शनिवार की रात को सुरंग के दूसरे सिरे को बंैक में खोला गया। छह घंटे तक लोहे की राड से लॉकर तोड़े। 100 करोड़ के जेवर निकाले गए।
बड़ई व बेरोजगार दोनों ही गांव के रहने वाले 25 से 30 साल के। पूरे देश में चर्चा और इन दो लडक़ों ने अपने हिस्से के जेवर व नकदी से मौज करते हुए अपने साथियों के साथ शराब पी। उस समय बैंक डकैती की बात चली तो नशे में बेरोजगार युवक ने कहा कि पुलिस कितना ही जोर लगा ले, उन तक नहीं पहुंच पाएगी। उनमें से एक साथी ने जब यह सुना तो पुलिस द्वारा रखे गए 10 लाख के इनाम के लालच में फोन पर सूचना दे दी। दोनों युवक पकड़े गए। पूरी रोबरी का किस्सा सुनाया और सारे जेवर बरामद किए गए नकदी थोड़ी कम मिली। महज 57 सेकेंड में पार करने वाली इस सुरंग को बनाने वाले इन पांच सामान्य युवकों द्वारा प्रफेक्ट रोबरी किए जाने की कहानी बेहद रोमांचकारी है। सुरंग खोदते हुए एकदम प्रफेक्ट खुदाई। मिट्टी को निकाल कर रात के समय बाहर फेंकना। मकान में सुरंग खोदने के समय किसी भी युवक द्वारा मोबाइल फोन न रखने। सुरंग खोदने के दौरान जमीन में दबी फोन, पानी और अन्य केबल का पूरी तरह ध्यान रखने का सारा जिम्मा मास्टरमाइंड महिपाल का था। बड़बोलेपन के एक किरदार की वजह से पकड़े गए चार आरोपी फिलहाल जेल में हैं।
– सुरेंद्र सोढी
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