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38 करोड़ खर्च फिर भी नहीं सुधरे हालात! महम में 5 हजार एकड़ फसल जलमग्न

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महम क्षेत्र के 7 गांवों में 5 हजार एकड़ फसल जलमग्न, सिंचाई विभाग ने निकासी पर खर्च किए 38 करोड़

हरियाणा न्यूज टूडे, रोहतक/महम। बारिश के बाद जलभराव की समस्या ने एक बार फिर किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। महम क्षेत्र के सात गांवों में करीब 5 हजार एकड़ फसल पानी में डूबने की स्थिति सामने आई है। किसानों का आरोप है कि जल निकासी के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद खेतों से पानी की निकासी प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है।

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समाचार रिपोर्ट के अनुसार, सिंचाई विभाग की ओर से जल निकासी व्यवस्था पर करीब 38 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद महम क्षेत्र में बारिश का पानी खेतों में जमा हो गया। इससे किसानों को फसल खराब होने की चिंता सताने लगी है।

लाखन-माजरा ड्रेन चैन में मिलने वाले नालों की सफाई पर सवाल

जलभराव की समस्या के पीछे ड्रेनों और नालों की सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि लाखन-माजरा ड्रेन चैन में गिरने वाले नालों की पर्याप्त सफाई नहीं होने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हुई।

बारिश के दौरान खेतों में जमा पानी को निकालने के लिए किसानों को कई जगहों पर पंपों और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते ड्रेन और नालों की सफाई कर दी जाती तो खेतों में पानी जमा होने की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

सात गांवों की हजारों एकड़ फसल प्रभावित

रिपोर्ट के मुताबिक महम क्षेत्र के 7 गांवों में करीब 5 हजार एकड़ फसल जलभराव से प्रभावित हुई है। पानी लंबे समय तक खेतों में खड़ा रहने से फसलों को नुकसान होने की आशंका है।

बारिश के बाद खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि फसल में पानी अधिक समय तक खड़ा रहने पर पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में जल निकासी जल्द नहीं होने पर नुकसान और बढ़ने की संभावना है।

करोड़ों खर्च होने के बाद भी समस्या बरकरार

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सिंचाई विभाग की ओर से जल निकासी व्यवस्था पर 38 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, तो इसके बावजूद बारिश के बाद खेतों में पानी क्यों भर रहा है।

किसानों और ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग जलभराव के कारणों की जांच करे और ड्रेन, नालों तथा निकासी व्यवस्था की मौके पर स्थिति देखे। साथ ही जिन स्थानों पर पानी की निकासी बाधित है, वहां तत्काल व्यवस्था दुरुस्त कराई जाए।

किसानों को फसल खराब होने का डर

जलभराव के कारण किसानों को अपनी मेहनत और फसल बर्बाद होने का डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि खेती में पहले ही लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बारिश का पानी खेतों में भरने से फसल खराब हुई तो आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से मांग की है कि खेतों से जल्द से जल्द पानी निकलवाया जाए और भविष्य में जलभराव की समस्या से बचने के लिए स्थायी समाधान किया जाए।

किसानों का सवाल: आखिर 38 करोड़ खर्च होने के बाद भी पानी की निकासी क्यों नहीं?

महम क्षेत्र में जलभराव की स्थिति ने सिंचाई विभाग की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि सिर्फ बजट खर्च करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए। ग्रामीण चाहते हैं कि ड्रेनों और नालों की नियमित सफाई तथा उनकी क्षमता के अनुसार पानी की निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

 

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