Campaign to enhance political legacy of Bhajanlal family
भजनलाल की राजनीतिक विरासत बचाने की मुहिम, बिना पार्टी सिंबल के कार्यक्रम कर रहे कुलदीप बिश्नोई
Haryana News Today: हरियाणा की राजनीति में इन दिनों एक नया प्रयोग देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई प्रदेश भर में स्नेह मिलन समारोह आयोजित कर रहे हैं। सिरसा, पानीपत, कुरुक्षेत्र और जींद के बाद अब कलायत में हुए कार्यक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
आमतौर पर राजनीतिक रैलियां पार्टी के सिंबल, लंबे भाषणों और शक्ति प्रदर्शन के दम पर मापी जाती हैं। लेकिन कुलदीप बिश्नोई के इन आयोजनों में न तो भाजपा का कोई झंडा नजर आता है, न ही पार्टी का कोई मंच।
बिना सिंबल के कैडर को टटोलने की कोशिश कार्यक्रम भले ही गैर-राजनीतिक और सामाजिक मेल-मिलाप का नाम लेकर आयोजित किए जा रहे हों, लेकिन इन सम्मेलनों में पूर्व हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) का पुराना कैडर सबसे ज्यादा सक्रिय दिख रहा है। पार्टी विलय और बीते सालों में जो कार्यकर्ता छिटक गए थे या शांत बैठे थे, उन्हें दोबारा एक मंच पर लाने की यह सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।
मंच से दूरी, सीधे पर्सनल कनेक्ट पर जोर भाजपा नेता कुलदीप इन कार्यक्रमों में लंबे-चौड़े राजनीतिक भाषण देने से बच रहे हैं। वे मंच पर रहने के बजाय घंटों कार्यकर्ताओं के बीच बैठते हैं, उनका और उनके परिवार का हाल-चाल पूछते हैं तथा पुराने दिनों को याद करते हैं। राजनीति में इस वन-टू-वन कनेक्ट को अपना पुराना आधार वापस पाने का सबसे कारगर जरिया माना जाता है।
पारंपरिक गढ़ से बाहर बांगर में दस्तक : कलायत (कैथल) का कार्यक्रम इस यात्रा का सबसे अहम टर्निंग प्वॉइंट माना जा रहा है। कुलदीप बिश्नोई का पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र हिसार और आदमपुर माना जाता है। लेकिन कलायत जैसी बांगर की राजनीतिक जमीन पर संकेत दे दिया कि वे अपने प्रभाव का दायरा पूरे प्रदेश में बढ़ाना चाहते हैं।
अब तक का सफर और आगामी पड़ाव: भाजपा नेता ने अपने इस कार्यक्रम की शुरुआत सिरसा की थी। प्र पानीपत, कुरुक्षेत्र पुराने हजकां साथियों से संवाद और व्यक्तिगत मेल-मिलाप। इसके बाद जींद, कलायत गैर-पारंपरिक गढ़ों में पुराने कैडर की लामबंदी।
आगामी पड़ाव चरखी दादरी, सोनीपत के अलावा अन्य जिलों में प्रदेश स्तरीय नए राजनीतिक व समीकरण साधने की तैयारी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिश्नोई का यह अभियान भाजपा व के भीतर और बाहर-दोनों जगह उनके राजनीतिक व वजूद को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश है।











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