Special Dish of Haryana : खानपान में हरियाणा के गुलगुलों का जवाब नहीं
Haryana News : हरियाणा का दूध दही का खाना तो पूरी दुनिया में मशहूर है लेकिन हरियाणा में अलग-अलग मौसम के हिसाब से अलग-अलग पकवान बनाने का भी चलन है। बारिश का मौसम हो और कुछ अलग से खाने का मन हो तो गुलगुला से बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। गुलगुला, हरियाणा में बारिश के मौसम का ही खास पकवान है। यह मीठा पकवान है जो विशेष तौर पर बारिश के मौसम में ही पकाने व खाने की परंपरा है। यह गेहूं के आटे, गुड़ व इलायची से बनाया जाता है। बारिश के मौसम में जब मौसम सुहावना हो जाता है तो गुलगुला खाने का अपना ही खास मजा होता है।
Dumpling is special dish of the rainy season in Haryana
हरियाणा में गुलगुले का इतिहास सदियों पुराना बताया जा रहा है। वर्षा के मौसम में अकसर गुलगुले बनाने वाली महिला रोशनी, करतारी बताती हैं कि वर्षा का मौसम शुरू होते ही गांव में महिलाएं गुलगुले बनाने लगती हैं। गांव की लगभग सभी महिलाएं समूह में एक जगह एकत्र होकर गुलगुले तैयार करती हैं। इस दौरान महिलाएं मंगलगीत भी गाती हैं। गुलगुले खाने के शौकीन लोग तो वर्षा के मौसम का बेसब्री से इंतजार भी करते रहते हैं।
आसन गांव की महिलाओं के बनाए गुलगुले पूरे Haryana में मशहूर
साल 2024 के मानसून सीजन में जब हरियाणा के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश नहीं हुई तो महिलाओं ने सामूहिक रूप से सावन के महीने में गुलगुले बनाकर आने जाने वाले राहगीरों को खिलाए थे। ताकि भगवान प्रसन्न हो गए और उनके यहां अच्छी बारिश कर दे ताकि उनके खेतों में पानी की कमी से सूख रही धान की फसल फिर से लहरा सके। जींद जिले के गांव आसन की महिलाओं के गुलगुले पूरे हरियाणा में मशहूर हो गए थे।
तेल के पकवान से पाचन क्रिया रहती है ठीकः रामरति मलिक, संतोष देवी, बिंदू, अनीता, नीता व शीतल के अनुसार बुजुर्गों ने बताया है कि वर्षा के मौसम में पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। इन दिनों में अधिक मसालेदार वधी का प्रयोग सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी कारण सरसों के तेल में गुलगुला पकाया जाता है। इससे पाचन क्रिया भी ठीक बनी रहती है और पकवान का स्वाद भी मिलता है।
प्रस्तुतिः रोहतक से रतन चंदेल