Hansi Court kharbala Sarpanch Election cancel
Hansi News : हिसार जिले के नारनौंद उपमंडल के गांव खरबला के सरपंच पद का चुनाव हांसी कोर्ट ने रद्द कर दिया है। अदालत में आरोप लगाया गया था कि चुनाव के दौरान मारे हुए लोगों के साथ-साथ बाहर रहने वाले लोगों के बोगस वोट डाले गए थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पानीपत के सरपंच पद के चुनाव कीमत गणना दोबारा से करवाई थी जिसमें दूसरे नंबर पर रहने वाले उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ की खबरें खूब वायरल हो गई थी। वहीं मौजूदा सरपंच का कहना है कि कोर्ट ने एक तरफा सनी करके फैसला दिया है अब वह इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगी।
हरियाणा पंचायत चुनाव को हुए ढाई वर्ष का समय बीत चुका है। हिसार जिले के गांव खरबला पंचायत चुनाव में स्वाति देवी ने जीत हासिल करते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सुनीता देवी को 200 वोटो से पराजित किया था। सुनीता देवी ने इस चुनाव में अपनी हर को स्वीकार न करते हुए बोगस वोट डालकर जीत हासिल करने का आरोप लगाते हुए Hansi Court का दरवाजा खटखटाया था।

Hansi Court में दायर याचिका में सुनीता देवी ने आरोप लगाया था कि पंचायत चुनाव के दौरान मरे हुए लोगों के भी वोट पोल किए गए थे। इसके अलावा 20 से 30 वोट ऐसे थे जो गांव से बाहर रहते हैं और वह वोटिंग करने के लिए गांव में भी नहीं आए थे। लेकिन चुनाव के दौरान उनके भी वोट डाले गए थे। ऐसे में यह चुनाव प्रक्रिया पूरी गोपनीय तरीके तरीके से संपन्न नहीं हुआ था।
सुनीता देवी के वकील चरण सिंह सैनी ने बताया कि इस चुनाव के दौरान चार से पांच वोट उन लोगों के डाले गए थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है। जबकि 25 से 30 ऐसे वोट पोल हुए जो गांव में नहीं रहते और ना ही वोटिंग करने के लिए मतदान केंद्र पहुंचे थे। चुनाव प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी को लेकर सारे तथ्य Hansi Court के समक्ष पेश किए गए। अदालत में सबूत और गांव के बयान के आधार पर गांव खरबला के सरपंच पद के चुनाव को रद्द करने का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मरे हुए लोगों के वोट पोल होने और बाहर रहने वाले लोगों के साथ नाम पर बोगस वोट डालने पर चुनावी प्रक्रिया में भारी खामी को उजागर करता है। ऐसे में यह चुनाव अवैध है और इसे चालू नहीं रखा जा सकता।

इस संबंध में गांव की तत्कालीन सरपंच स्वाति देवी ने कहा कि Hansi Court ने एक तरफ सनी करके फैसला दिया है। वह कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं है इसलिए वह इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर करेंगी। उन्होंने कहा कि सरपंच पद का उम्मीदवार इतना पावरफुल नहीं होता कि वह चुनाव प्रक्रिया को बाधित कर सके क्योंकि वह आम आदमी होता है। चुनाव को निष्पक्ष तरीके से करवाना और बोगस वोटिंग पर नियंत्रण करना चुनाव आयोग का कार्य होता है ना कि सरपट और सरपंच उम्मीदवार का।