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Latest News: HAU Hisar लाठी चार्ज का मुद्दा फिर गर्माया; आंदोलन की चेतावनी

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Latest News : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार ( HAU Hisar ) में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, कर्मचारियों के उत्पीड़न और कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सोमवार को विश्वविद्यालय के चार नंबर गेट के सामने प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। पूर्व वैज्ञानिक एवं सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. अर्जुन सिंह राणा, हर्षदीप गिल तथा HAU छात्र नेता मनोज सिवाच ने संयुक्त रूप से प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।

 

एचएयू लाठीचार्ज, उत्पीड़न और भ्रष्टाचार पर घमासान: अशोक गर्ग रिपोर्ट लागू करने की मांग, कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी


वक्ताओं ने कहा कि पूर्व मंडल आयुक्त डॉ. अशोक गर्ग द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट ने विश्वविद्यालय में वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं, मनमानी और दमनकारी रवैये को उजागर कर दिया है, लेकिन रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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डॉ. अर्जुन सिंह राणा ने बताया कि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि डॉ. दिव्या फोगाट को मेक्सिको भेजा जाना पूरी तरह शैक्षणिक उद्देश्य से जुड़ा हुआ था और एक युवा फैकल्टी सदस्य के रूप में इसे सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए था। इसके विपरीत, उनकी जगह 56 वर्षीय एक वैज्ञानिक को नामित कर दिया गया, जिन्हें न तो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और न ही संबंधित विभाग की अनुशंसा प्राप्त थी। यह कार्रवाई निर्धारित पात्रता मानदंडों का खुला उल्लंघन थी, जिसमें 40 वर्ष से कम आयु के युवा वैज्ञानिकों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है।

उन्होंने आगे बताया कि डॉ. दिव्या फोगाट ने बांग्लादेश प्रशिक्षण (01 मार्च 2023 से 10 मार्च 2023) के लिए समय पर आवेदन किया था, लेकिन विभागीय सलाहकार समिति की बैठक जानबूझकर 01 मार्च 2023 को बुलाई गई और कार्यवाही 07 मार्च 2023 को जारी की गई। इस देरी के कारण वे एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण अवसर से वंचित रह गईं। उल्लेखनीय है कि दोनों प्रशिक्षणों के लिए डॉ. दिव्या फोगाट को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा नामित किया गया था, जो प्रशासनिक मनमानी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

 

 


डॉ. राणा ने कहा कि एच. ए. यू. की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि विश्वविद्यालय में ऑनलाइन ट्रांसफर नीति लागू नहीं की गई है, क्योंकि यहां दीर्घकालिक शोध कार्य होता है, जिसमें 10 से 15 वर्ष तक का समय लगता है। आयुक्त डॉ. अशोक गर्ग ने HAU विश्वविद्यालय में पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन स्थानांतरण प्रणाली लागू करने की स्पष्ट सिफारिश की है। साथ ही नियमों के विपरीत नियुक्तियां कर वी.सी. द्वारा पारिवारिक हितों को लाभ पहुंचाने और सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए।

 


हर्षदीप गिल ने कहा कि डॉ. अशोक गर्ग की रिपोर्ट स्वतंत्र, निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित है, लेकिन रिपोर्ट सौंपे जाने के एक माह बाद भी सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि जब तक रिपोर्ट के आधार पर सभी विभागीय और आपराधिक कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक विश्वविद्यालय के कुलपति को पद से हटाया जाए, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो। प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि जांच रिपोर्ट में छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज को पूरी तरह अनावश्यक और अनुचित बताया गया है।

 

रिपोर्ट के अनुसार हालात ऐसे नहीं थे कि बल प्रयोग की जरूरत पड़ती, फिर भी छात्रों पर एफ.आई.आर. दर्ज की गई, जो आज तक उनके करियर पर संकट बनकर लटकी हुई है। आयुक्त डॉ. अशोक गर्ग ने सिफारिश की है कि कुलपति स्तर पर एक केंद्रीय ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल स्थापित किया जाए, जहां छात्रों और कर्मचारियों की शिकायतों का समयबद्ध और पारदर्शी निपटान सुनिश्चित हो। इसके साथ ही हरियाणा सरकार में लागू फाइल ट्रैकिंग सिस्टम को HAU Hisar में भी लागू करने की सिफारिश की गई है।


छात्र नेता मनोज सिवाच ने बताया कि डॉ. छवि की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट के मामले में आयुक्त ने स्पष्ट टिप्पणी की है कि स्वीकारकर्ता प्राधिकारी (कुलपति) द्वारा अधिकारों का गंभीर दुरुपयोग किया गया, जिससे एक मेधावी और सक्षम वैज्ञानिक को भारी नुकसान पहुंचा और उनके पेशेवर करियर को अपूरणीय क्षति हुई। उन्होंने कहा कि इस तरह की मनमानी कार्रवाई मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक साख को नुकसान पहुंचाती है।

 

 

जांच रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि पदोन्नति के लिए मामला जमा होने के दो माह के भीतर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाए। यदि इसमें देरी होती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। पुनर्नियोजन राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाए तथा पीएचडी छात्रों के रोजगार से संबंधित पहले से मौजूद नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।


प्रेस वार्ता के अंत में वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि डॉ. अशोक गर्ग की जांच रिपोर्ट को तुरंत लागू किया जाए, छात्रों पर दर्ज कथित झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो विश्वविद्यालय एवं समाज से जुड़े संगठनों को आंदोलन तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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