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Hisar News: अरावली सूखा पेड़ नहीं कि गिराकर लगा देंगे नया; अरावली पहाड़ियों के मुद्दे पर गोष्ठी आयोजित

By हरियाणा न्यूज टूडे

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Hisar News Today: Issue of Aravalli Hills seminar

Hisar News Today : अरावली कोई 100 मीटर ऊंचाई वाला सूख चुका पेड़ नहीं है जिसे गिराकर नया लगा देंगे। वह 120 प्रकार के पक्षियों, 31 तरह के स्तनधारी जीवों, कई नेशनल पार्क, हजारों पहाडिय़ां व नालों से निकलते-बहते जल स्त्रोतों, घास के मैदानों, चरागाहों व छोटे बड़े जंगलों का अपने आप में एक ग्रह है, जिसे केवल उसी रूप में देखकर समझा जा सकता है ना कि किसी सीमेंट के खंबे की ऊंचाई से नापकर।

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अरावली पहाड़ियों का मुद्दे पर सर्वोदय भवन में गोष्ठी आयोजित : एडवोकेट राजेश जाखड़ ने कहा कि 100 मीटर वाला फैसला लागू कर दे तो 49 प्रतिशत अरावली पहाड़ी हो जाएगी लुप्त


यह बात एडवोकेट राजेश जाखड़ ने अरावली पर्वतमाला अदालत के कटघरे में और विनाश के मुहाने पर विषय पर रविवार को सर्वोदय भवन में आयोजित विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर सर्वोदय भवन के सचिव धर्मवीर, संचालक डॉ. महेंद्र सिंह, सह संचालक डॉ. सत्यवान और व्यवस्थापक धनराज आदि भी उपस्थित थे। ( Latest News Hisar Haryana )


यह बात एडवोकेट राजेश जाखड़ ने अरावली पर्वतमाला अदालत के कटघरे में और विनाश के मुहाने पर विषय पर रविवार को सर्वोदय भवन में आयोजित विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर सर्वोदय भवन के सचिव धर्मवीर, संचालक डॉ. महेंद्र सिंह, सह संचालक डॉ. सत्यवान और व्यवस्थापक धनराज आदि भी उपस्थित थे।


उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले जिसमें कहा गया है कि 100 मीटर या इससे ऊंची पहाड़ी को ही अरावली माना जाएगा, के फैसले के बाद भारत सरकार ने अपने वक्तव्य में इस परिभाषा में सिर्फ दो प्रतिशत अरावली क्षेत्रफल पर प्रभाव पडऩे का दावा किया है लेकिन असलियत अलग है।


उन्होंने कहा कि सेंटर फोर साइंस एंड एनवारमेंट ने शटल रडार टोपोग्राफिक मिशन (एसआरटीएम) का इस्तेमाल करके 100 मीटर परिभाषा को अरावली हिल्स एंड रेंज के 31 हजार, 414 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल का विश्लेषण किया तो पाया कि अगर सरकार की सुझाई परिभाषा लागू की जाती है तो इसमें से 15 हजार, 589 वर्ग किलोमीटर यानि 49 प्रतिशत क्षेत्रफल असंरक्षित हो जाएगा यानिकि कि माइनिंग व उससे होने वाले खतरों के लिए खुल जाएगा और 15 हजार, 825 वर्ग किलोमीटर ही संरक्षित रहेगा।


उन्होंने कहा कि एफएसआई (फोरेस्ट सर्वे आफ इंडिया) के एक अध्ययन में अरावली की कुल 12 हजार, 81 चोटियां जो 962 किलोमीटर की लंबाई में फैली हुई है, में से सिर्फ एक हजार, 48 चोटियां ही 100 मीटर की ऊंचाई या उससे ज्यादा की है। मतलब कि 11 हजार, 31 चोटियों को इस फैसले के मुताबिक अभी तक कोई प्रोटेक्शन नहीं है।


उन्होंने कहा कि ऊंचे पहाड़ के भाग से ही चोटी को नापने की विधि त्रुटिकारक रहती है जबकि समुद्र तल से पैमाइश ही ठीक रहती है। 3 डिग्री के एंगल के स्लोप से पहाडिय़ों को परिभाषित किया जाए तो 30 मीटर तक की ऊंचाई को भी आराम से संरक्षित किया जा सकता है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक ढलानों, घाटियों, जल संरचनाओं, जंगल व वनस्पति इत्यादि से खनन के फैसले लेना ज्यादा कारगर रहता है।


उन्होंने कहा कि अनुमान और रिसर्च बताती हैं कि अरावली सिस्टम में टिन, ग्रेफाइट, मलिब्डिनम, नायोबियम, निकल, लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स के मिलने की अपार संभावनाएं हैं। इलेक्ट्रोल बोंड के मामले के बाद स्पष्ट हो गया है कि सरकारें चलाने वाले राजनीतिक दल पूंजीपतियों के प्रभाव में कोई भी फैसला लंबी अवधि के नफे नुकसान को सोचे बिना ही ले लेते हैं।  


उन्होंने कहा कि आईपीसीसी (इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हम मानव पिछले कुछ दशकों में 50 प्रतिशत प्रजातियों को लुप्त कर चुके हैं। इसलिए अब हमें अपने तथाकथित विकास की बकवास से एक अन्य प्राणी की प्रजाति यानि मानव जीवन को खत्म करने से रोका जाना चाहिए।

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