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Narnaund News: राजथल की खुशी ने National Grappling Championship में जीता गोल्ड, एशियाई चैंपियनशिप के लिए चयन

By sunilkohar

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Narnaund News: राजथल की खुशी ने National Grappling Championship में जीता गोल्ड, एशियाई चैंपियनशिप के लिए चयन

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National Grappling Championship में राजथल की छोरी ने दिखाया दम, जीता गोल्ड मेडल ग्रामीणों ने किया स्वागत

Narnaund News : हांसी जिले के गांव राजथल की खिलाड़ी खुशी ने हरिद्वार में आयोजित नेशनल ग्रेपलिंग रेसलिंग (National Grappling Championship) में गोल्ड मेडल जीत कर एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय टीम में जगह बनाई। गांव में पहुंचने पर खिलाड़ी का जोरदार स्वागत किया गया। 19th Grappling Wrestling Championship Haridwar में 24 से 26 अक्टूबर तक आयोजित की गई थी जिसमें खिलाड़ी खुशी पुत्री सुनील ने अंडर 17 वर्षीय 52 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल जीतने का काम किया है। गोल्ड मेडल जीतने पर ग्रामीणों ने जो स्वागत किया है। गोल्ड मेडल जीतने पर खिलाड़ी का चयन एशियाई चैंपियनशिप के लिए हुआ है जो की 23 नवंबर को कज़ाख़िस्तान खेलने के लिए जाएगी।

पूरे गांव को बेटी पर नाज

 ग्रामीण मेहर सिंह बिसला, रामकुमार शर्मा, सरपंच प्रतिनिधि अनिल गोदारा, रतन शर्मा, सतवीर सिंह, तकदीर, बिट्टू, सुरेश, वीरेंद्र, जय सिंह, प्रेम, शमशेर आदि ने बताया कि पूरे गांव को बेटी पर नाज है। जिन्होंने Indian Grappling Championship में गोल्ड मेडल जीतकर गांव का नाम रोशन किया है। पूरे गांव में खुशी की लहर है और ढोल नगाड़ों के साथ बेटी का स्वागत किया गया है ताकि गांव के अन्य खिलाड़ियों को भी इनसे सीख मिले और वह इसी मेहनत के साथ खेलों में अपना नाम रोशन करें।

दंगल फिल्म से प्रेरित होकर मन में निश्चय

National Grappling Gold Medalist खुशी ने बताया कि बचपन से ही उसको खेलने का शौक था जब वह चौथी कक्षा में पढ़ती थी तो पूरी मजबूती के साथ अपने घर पर भाइयों के साथ कुश्ती करती थी और फिर दंगल फिल्म देखी तो उससे प्रेरित होकर मन में निश्चय कर लिया था कि वह कुश्ती खिलाड़ी बनकर गांव का और देश का नाम रोशन करेगी खुशी के पिता सुनील ठेकेदारी करते हैं और माता पूनम ग्रहणी है।
बड़ी बहन मुस्कान ने बताया कि वह हमेशा साथ-साथ रहकर खेली हैं। उनकी जो खेलने की कला है वह अद्भुत है। वह एक दिन ओलंपिक में देश के लिए मेडल जरूर जीतने का काम करेगी। पहले इस गांव की पहचान नशे के कारण होती थी लेकिन अब युवा नशे को छोड़कर खेलों में अपना भविष्य बनाकर गांव की जो पहचान थी उसको बदलकर गांव का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखने का काम करेंगे।

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