Negligence: Barwala Republic Day celebrations
Barwala News: हिसार जिले के बरवाला में गणतंत्र दिवस समारोह मैं भारी लापरवाही (Negligence ) सामने आई है। प्रशासन में समारोह को सफल बनाने के लिए काफी रुपए खर्च किए होंगे। तभी तो अधिकारियों और नेताओं के बैठने के लिए लग्जरी कुर्सियां और सोफे लगाए गए थे, लेकिन प्रतिभागी बच्चों को बैठने के लिए मेट तक उपलब्ध नहीं करवा पाया। इसको लेकर बच्चों और उनके अभिभावकों में काफी रोष देखने को मिल रहा है।
गणतंत्र दिवस समारोह में प्रतिभागी बच्चे जमीन पर बैठने के लिए मजबूर

हिसार से लेकर बरवाला में उपमंडल स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया गया। इस समारोह में गणमान्य लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई थी लेकिन उन्हें गणमान्य लोगों के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने वाले प्रतिभागी बच्चों के बैठने के लिए मेट या दरी की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। इसके अभाव में बच्चे तक हर कर जमीन पर ही बैठ गए।
नेताओं के बैठने के लिए लग्जरी कुर्सियां, बच्चों के लिए दरी तक नहीं
बच्चों ने बताया कि बरवाला गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेने के लिए अपने कार्यक्रम के मुताबिक उन्होंने किराए पर ड्रेस ली थी। लेकिन ड्रेस लेते समय उसे साफ सुथरा रखने का भी नियम है लेकिन गणतंत्र दिवस समारोह में मजबूरन उन्हें रेत में बेचना पड़ा। क्योंकि उनके बैठने के लिए प्रशासन की तरफ से मेट या दरी तक नहीं थी। कुछ बच्चों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारियों और नेताओं के बैठने के लिए लग्जरी कुर्सियां और सोफे लगाए गए थे, परंतु स्कूली छात्रों के लिए इस कार्यक्रम में कोई प्रबंध नहीं था।

गणतंत्र दिवस समारोह देखने आए लोगों ने भी नाम ना अपने की शर्त पर बताया कि गणतंत्र दिवस के नाम पर उप मंडल प्रशासन में भले ही लाखों रुपए खर्च कर दिया हों। लेकिन धरातल पर कोई प्रबंध नहीं किया गया था। प्रशासन द्वारा समारोह की तैयारियां पिछले कई दिनों से की जा रही थी और इसमें अपने कार्यक्रम की प्रस्तुति देने वाले छात्रों की भी कई दिनों से रिहर्सल चल रही थी। लेकिन गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान प्रशासन की कोई भी तैयारी सही तरीके से नहीं थी। गणतंत्र दिवस समारोह देखने आए काफी लोग तो मीडिया कर्मियों के लिए लगाई गई कुर्सियों पर ही बैठकर कार्यक्रम का नजारा ले रहे थे।

इस बारे में बरवाला उपमंडल के अधिकारियों से बातचीत करना चाहा तो किसी भी अधिकारी ने इस बारे में बात करना उचित नहीं समझा। प्रशासन की यह नाकामी देखकर हर किसी की जुबान से आधुनिक भारत और विकसित भारत की तस्वीर ब्याह करते हुए निकल रही थी। क्या आधुनिक भारत और विकसित भारत की ऐसी ही तस्वीर होती है। इसके लिए आप कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।