Vishv Hindi Divas Vishesh 2026: growing dominance of Hindi on global horizon
प्रस्तावना: आत्मा की अभिव्यक्ति
Hindi Divas : सम्माननीय हिंदी प्रेमियों, जैसाकि कहा गया है: “भाषा राष्ट्रीय शरीर की आत्मा है।” अतः हिंदी हमारे भारत की राष्ट्रीय संस्कृति की आत्मा है। हमें गर्व है कि हम भारतीय हैं और हमें गर्व है अपनी मातृभाषा हिंदी पर। हिंदी के उन्नयन की दिशा में कार्य करने के लिए हम सभी को प्रयास करने की आवश्यकता है। “हिंदी एक प्राचीन भाषा है और संस्कृत की उन धाराओं में से एक है जो आज भी जीवित है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार, कि हृदय की कोई भाषा नहीं है, हृदय-हृदय से बातचीत करता है और हिंदी हृदय की भाषा है, हिंदी दिवस के उपलक्ष में बहुत प्रासंगिक हैं क्योंकि हिंदी भाषा हमारे सम्मान, स्वाभिमान, शान और गर्व की भाषा है। ( World Hindi Day Special )
हिंदी का भविष्य और सांस्कृतिक पहचान
”हिंदी दिवस हमें हिंदी भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित करता है।” “हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है, और हमें इसे बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए।” इस बात से यह स्पष्ट होता है कि हिंदी भाषा न केवल हमारी मातृभाषा है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, समाज और देश की पहचान भी है। हिंदी दिवस हमें इसकी महत्ता को समझने और इसके प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है। आज भारत में हिंदी साहित्य की भाषा है, सिनेमा की भाषा है, मनोरंजन की भाषा है। ये हम सभी जानते है, लेकिन इसके पीछे का कारण ये है कि हिंदी सिर्फ भाषा ही नहीं, हमारी भावना भी है। ये हमारी आत्मा का हिस्सा है, और हमारी पहचान है।
भारत, विविधताओ का देश है, जहां जितनी संस्कृतियां है, उतनी भाषाएं हैं और उतनी ही बोलिया बोली जाती हैं। इसलिए, हमारा देश भाषाओं का गढ़ है। भारत में लगभग 20,000 भाषाएं बोली जाती हैं। प्रत्येक भाषा की अपनी खासियत और खूबसूरती है, अपनी मधुरता है। भारत देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाली हिंदी को राजभाषा का गौरव प्राप्त है। हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने और इसके महत्व से भारतीयों को अवगत कराने के लिए हर वर्ष 1 से 15 सितंबर तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन भी किया जाता है। हम सब जानते हैं कि हिंदी भाषा विश्व में तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है।
भावनात्मक एकता का सूत्र
“हिंदी महज भाषा नहीं बल्कि यह हमको रचती है”….. आशुतोष की यह पंक्ति हिंदी भाषा पर सटीक बैठती है। हिंदी को मन की भाषा कहा जाता है, यह मन के बंद ताले को खोल सकती है। हमारी आत्मा और ज्ञान का पथ खोल सकती है। यह महज भाषा नहीं बल्कि भारतीयों को एकता के सूत्र में पिरोती है। यह विश्वभर में बसे भारतीयों को भावनात्मक रूप से एक साथ जोड़ने का काम करती है।
संवैधानिक यात्रा और ऐतिहासिक संघर्ष
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत 14 सितम्बर, 1949 को हिंदी भाषा को भारत की राजभाषा घोषित किया गया है। तदोपरांत 14 सितंबर 1953 में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की सिफारिश पर प्रत्येक वर्ष “14 सितंबर” को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। हिंदी और भारतीय संविधान के परिपेक्ष्य में बी.एन. राव ने कहा कि “भारत के नए संविधान के निर्माण में सबसे कठिन समस्याओं में से एक, भाषाई प्रांतों की मांग और समान प्रकृति की अन्य मांगों को पूरा करना होगा”। इस मुद्दे ने संविधान सभा को उसके तीन साल के जीवनकाल तक परेशान किया। भारत का संविधान राष्ट्रभाषा के मुद्दे पर मौन है। इस प्रकार, हिंदी भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में से एक है, न कि हमारी राष्ट्रीय भाषा।
महापुरुषों की दृष्टि में हिंदी
सुमित्रानंदन पंत ने मातृभाषा हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि “हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्रोत है” और “हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है”। उन्होंने कहा:
“मैं कुंजी कहता हिंदी को खुलता जिससे सामूहिक मन,
क्षेत्रवृति से उठकर ही हम कर सकते जन राष्ट्र संगठन।”
मैथिलीशरण गुप्त जी ने भी मातृभाषा हिंदी के महत्व के बारे में कुछ यूं बयां किया:
”है भव्य भारत ही हमारी मातृभूमि हरी भरी।
हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी”
“मानस भवन में आर्यजन जिसकी उतारें आरती।
भगवान भारतवर्ष में गूंजे हमारी भारती”
रामधारी सिंह दिनकर जी की हिंदी भाषा के महत्व के बारे में कुछ यादगार पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
”हिंदी हमारी मातृभाषा, हिंदी भारत की अभिलाषा”
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने हिंदी को राष्ट्रीय एकता की आवश्यक शर्त बताते हुए हुंकार भरी:
“यदि हम लोगों ने तन मन धन से प्रयत्न किया तो वह दिन दूर नहीं है जब भारत स्वाधीन होगा और उसकी राष्ट्रभाषा होगी -हिंदी।”
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के अनुसार:
“हिंदी को ऊंची से ऊंची शिक्षा का माध्यम होना चाहिए”
तकनीक और डिजिटल माध्यमों में हिंदी का उदय
जैसा कि सर्वविदित है कि भारतीय संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकृति दी थी। 21वीं सदी के पहले दशक में ही गूगल न्यूज़, गूगल ट्रांसलेट तथा ऑनलाइन फोनेटिक टाइपिंग जैसे साधनों ने वेब की दुनिया में हिंदी के विकास में महत्त्वपूर्ण सहायता की। हिंदी की पकड़ इंटरनेट पर दिन-प्रतिदिन मजबूत हो रही है जिससे निश्चय ही हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है…!
सामाजिक संचार माध्यम अर्थात सोशल मीडिया, डिजिटल मीडिया और तकनीकी विकास, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफार्मों पर हिंदी सामग्री का बढ़ता प्रचार-प्रसार इसे एक महत्वपूर्ण भाषा बनाता है। सोशल मीडिया, ब्लॉग, और ऑनलाइन समाचारों में हिंदी की उपस्थिति में लगातार वृद्धि हो रही है। हिंदी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्व न केवल इसकी व्यापकता में है, बल्कि इसके माध्यम से सांस्कृतिक, आर्थिक, और सामाजिक संवाद को बढ़ावा देने में भी है। यह भारतीय पहचान और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर फैलाने का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे हिंदी एक प्रभावी और जीवंत भाषा बनती जा रही है।
सोशल मीडिया: एक लोकतांत्रिक मंच
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी सोशल मीडिया ने हिंदी भाषा व साहित्य के विकास में जिस क्रांतिकारी भूमिका का निर्वहन पिछले लगभग एक दशक में किया है उसने सबको विशेषतः परंपरागत प्रिंट मीडिया के पक्षधरों को अचंभित कर दिया है। जहां आज सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके नवोदित लेखक हिंदी साहित्य की मुख्यधारा में प्रवेश कर रहे हैं वहीं स्थापित हिंदी साहित्यकार भी सोशल मीडिया को माध्यम बनाकर अधिक से अधिक पाठकों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं।
सोशल मीडिया के आगमन का सबसे सकारात्मक प्रभाव यह रहा है कि अब समाचार पत्र व पत्र पत्रिकाओं के संपादकों की कृपा दृष्टि की आवश्यकता नहीं और न ही उनकी लेखन दृष्टि का अनुसरण कर लिखने की | पारंपरिक मीडिया में अक्सर ऐसा होता था कि अगर किसी पत्रिका का संपादक एक विशेष धर्म-जाति, राजनीतिक दल, विचारधारा, लेखन-शैली या साहित्य-विधा के प्रति अधिक मोह रखता था तो वह पत्रिका में उन्हीं लेखकों की रचनाओं को शामिल करता था जो उसकी विचारधारा के अनुकूल होते थे परंतु सोशल मीडिया ने संपादकों की इस तानाशाही प्रवृत्ति को नकारा है।
तकनीकी समाधान और हिंदी की चमक
फेसबुक, वाट्सएप और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के लोकप्रिय प्लेटफार्म हों या फिर ब्लाग, वेबसाइट अथवा वेब पोर्टल, इंटरनेट के हर कोने में हिंदी चमक रही है। स्मार्टफोन के आने से लोगों की जीवन शैली में बहुत बदलाव आया, ढेरों ऐसे कीबोर्ड ऐप आ चुके हैं जो देवनागरी हिंदी लेखन को बढ़ावा देने में सहायक हैं। हिंदी लंबे समय तक फॉंट की समस्या से जूझती रही, लेकिन बढ़ती ज़रूरत के बीच हिंदी गूगल इनपुट, यूनीकोड और मंगल जैसे फॉंट के विकास ने हिंदी को नया जीवन प्रदान किया। आज के समय में इंटरनेट पर हिंदी साहित्य प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
आरंभिक दौर में प्रिंट मीडिया ने इस भूमिका का बखूबी निर्वहन किया। आज भी किसी भाषा को समुन्नत करने में मीडिया की भूमिका सर्वोपरि है परंतु आज प्रिंट मीडिया को कहीं पीछे छोड़ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने अन्य भाषाओं की भांति हिंदी के प्रचार-प्रसार व समुन्नयन में महती भूमिका निभाई है। यह ऐतिहासिक सत्य है कि जब भी कोई भाषा पुराने तटबंधो को तोड़कर नये क्षेत्र में प्रवेश करती है तो शुद्धतावादी तत्व उससे चिंतित हो जाते हैं।
हिंदी: स्वीकार्यता का राजमार्ग
सच तो यह है कि हिंदी इस समय स्वीकार्यता के राजमार्ग पर सरपट दौड़ रही है और हिंदी अश्वमेध के घोड़ों को रोक पाना किसी के बस में नहीं है। सोशल मीडिया इस दौड़ को और गतिशील बना रहा है। आज का सच यह है कि जिस तरह हिंदी को अपने प्रसार के लिए मीडिया की ज़रूरत है उसी तरह मीडिया को अपने विस्तार के लिए हिंदी की आवश्यकता हैं।
एक कटु सत्य और चिंतन की आवश्यकता
लेकिन क्षुब्द मन से कहना पड़ रहा है कि हम हिंदी दिवस तो हर वर्ष मना रहे हैं लेकिन हमारे सभी प्रशासनिक, सरकारी कार्यालयों, न्यायालयों में लगभग सभी कार्य अंग्रेजी भाषा में किये जा रहे हैं जो कि भारतीय संस्कृति की आत्मा पर कुठाराघात है। अतः राष्ट्रीय स्तर पर चिंतन का विषय है।
हिंदी दिवस की पुनीत बेला पर मैं भारतेंदु हरिश्चंद्र की शाश्वत पंक्तियां उद्धृत करना चाहूंगा :-
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।
उपसंहार: वैश्विक क्षितिज पर हिंदी
हिंदी की संवैधानिक स्थिति भारतीय संघ की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संविधान में हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता दी गई है, और इसके विकास और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। हालांकि, भाषायी विविधता के कारण कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जिन्हें संतुलित नीति और जनजागरूकता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है।
आज वैश्वीकरण के दौर में हिंदी का महत्व और भी बढ़ गया है। हिंदी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है। आज विदेशों में अनेक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें बड़े पैमाने पर हिंदी में लिखी जा रही हैं। सोशल मीडिया और संचार माध्यमों में हिंदी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है। निश्चय ही हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर हम संकल्प लें कि हम हिंदी को केवल दिवसों तक सीमित न रखकर अपने दैनिक जीवन, तकनीक और कार्यक्षेत्र की मुख्य भाषा बनाएंगे।
लेखक :-