Soil pickers demonstrated in Hisar :
Haryana News Hisar: पुरानी कहावत है कि अनतोली मिट्टी पर बैठा हूं और इसकी कस्में भी खाई जाती हैं, लेकिन भाजपा सरकार ने हिन्दूस्तान की इस कहवत को भी झूठा कर दिया और मिट्टी का भी आज नापतोल करवाने की नौबत पैदा कर दी। इन्हीें सब बातों को लेकर बुधवार की दोपहर को हिसार जिले के मिट्टी का कार्य करने वालों ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि मिट्टी उठाने के कार्य को माइनिंग से अलग किया जाए। क्योंकि इससे उनको परमिशन लेने में भी ज्यादा समय लग जाता है और इतना काम नहीं करते कि माइनिंग विभाग द्वारा उन्हें भारी भरकम जुर्माना लगा दिया जाता है। ऐसे में उनके सामने रोजी रोटी के लाले पड़ गए हैं।
यूनियन के सचिव मनोज लांबा ने बताया कि एक एकड़ से मिट्टी उठाने के लिए माइनिंग से परमिशन लेनी पड़ती है और उसके बदलते 12 हजार रूपए की पर्ची काटी जाती है और उसके बावजूद भी परमिशन मिलने में ढेढ से दो महीने का समय लग जाता है। जबकि किसानों के पास ना ही तो इतना समय खेत खाली रखने के लिए होता है और ना ही कार्यालयों के चक्कर काटने का समय होता है। जबकि इस महंगाई के दौर में अपने साधनों की किस्त अदायगी करना भी मुश्कील हो जाता है। जब छोटा मोटा काम मिलता है और बिना परमिशन के करते हैं तो ट्रैक्टर ट्राली पर भी दो लाख से ज्यादा जुर्माना लगा दिया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मिटटी के कार्य को माइनिंग से बाहर नहीं किया गया तो 20 जनवरी के बाद कोई भी मिट्टी से संबंधित कार्य नहीं करेगा।
मनोज लांबा ने बताया कि आज भी काफी किसानों की जमीन समतल नहीं है और उन्हें जमीन को समतल करवाने के लिए भी अब माइनिंग विभाग से परमिशन लेती होगी। ऐसे में मिट्टी उठान कार्य करने वालों के साथ साथ किसानों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मिट्टी उठान का कार्य करने वालों की आर्थिक स्थिति पहले ही ठीक नहीं है और ऊपर से सरकार ने भारी भरकम राशि के साथ इस कार्य को माइनिंग के अधीन लाकर उनके सामने बड़ी समस्या लाकर खड़ी कर दी है।
मनोज लांबा ने बताया कि बड़ी मुश्कील से ट्रैक्टर-ट्राली, हाईवा, जेसीबी मशीन किस्तों पर लेकर जो लोग रोजी रोटी चलाने के लिए मिट्टी का धंधा करते हैं वो सरकार के इन नियमों को कैसे पूरा कर सकते हैं। इस कार्य में काफी लोग तो अनपढ़ लगे हुए हैं जिन्हें कागजातों का कोई ज्ञान नहीं है। वहीं मिटटी उठान के कार्य के दौरान किसी भी वाहन में मिट्टी तोल कर नहीं डाली जाती है और ना ही ऐसा संभव हो सकता है। जब वो माइनिंग वालों से बचते हैं तो आरटीओ ओवरलोडिंग के चालान के नाम पर उनके साधनों को बंद कर देते हैं जोकि सरासर गलत है। अगर सरकार ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो ये आंदोलन जन आंदोलन बन जाएगा।
इस अवसर पर आनंद तोमर, तिलक राज मोर, राकेश चहल, राजेश पूनियां, सत्यवान बूरा, टोनी वधवा, रवि बरवाला, सोरभ गुज्जर, संदीप सिहाग, वीरेंद्र मोर, सत्यवान शर्मा, डां सुरेन्द्र आर्य नगर, सुभाष हिंदवान, कल्लू वर्मा, जेडी हांसी, अश्वनी जिंदल, रामपाल यादव इत्यादि मौजूद थे।
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