Hydrogen train wheels stop day after inauguration
Jind News Today : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का पहिया शनिवार को थम गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ही देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को जींद के रेलवे जक्शन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। शुक्रवार को ट्रेन ने चक्कर लगाए और शनिवार को इसे रोक दिया गया। इसको लेकर रेलवे ने नया शैडयूल भी जारी किया है।
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उद्घाटन के एक दिन बाद हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन रुका

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 जुलाई को जींद की धरा से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस ट्रेन को लेकर तरह तरह के दावे किए जा रहे हैं और इन दावों में कितनी सच्चाई है ये तो आने वाला समय ही बता पाएगा। लेकिन इस ट्रेन का पहले दिन जगह जगह जोरदार स्वागत हुआ। किसी रेलवे स्टेशन पर हवन यज्ञ किया गया तो कहीं पर फुल बरसाकर लोगों ने ट्रेन का स्वागत किया। वहीं काफी संख्या में लोग इस नई ट्रेन को देखने के लिए भी पहुंचे और सैल्फी ली।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शनिवार को नहीं चली और उसे जींद में ही रोककर रखा गया है। इस ट्रेंन में दो इंजन लगे हुए हैं और एक इंजन के टैंक में 210 किलो हाइड्रोजन गैस भरी जाती है। इस हिसाब से दोनों इंजनों में 420 किलोग्राम हाइड्रोजन गैस का स्टोर होगा और इस गैस में ये 420 किलोमीटर के आसपास ही चलेगी। लेकिन जींद से सोनीपत और सोनीपत से जींद के दो चक्करों में 360 किलोमीटर बैठते हैं। इससे पूरा दिन चक्कर लगाने के बाद भी ट्रेंन में 60 किलो हाइड्रोजन गैस बच जाएगी। वहीं हाइड्रोजन ट्रेन के इंजन व गैस में कोई तकनीकी खराबी आने पर इसको 60 किलोमीटर तक बैटरी से भी संचालित किया जा सकता है। ऐसे में इस ट्रेन के बीच में रूकने की संभावना बहुत ही कम दिखाई पड़ रही है।
रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि इस ट्रेन के टैंकों में हाइड्रोजन गैस भरने में करीब एक घंटे का समय लगता है। रेलवे की तरफ से नया शैडयूल आया है। नए शैडयूल के हिसाब से ट्रेन सप्ताह में छ: दिन चलेगी और एक दिन हाइड्रोजन ट्रेन का ठहराव किया जाएगा। ताकि ट्रेन में किसी भी मकैनिकल बाधा को ठीक किया जा सके और सप्ताह के छ: दिन ट्रैन समय के मुताबिक दोनों चक्कर लगाएगी।











