जुलाना में भारी बारिश, जलभराव से पानी में डूबी फसलें
हरियाणा न्यूज टूडे,जुलाना, जींद। हरियाणा के जींद जिले के जुलाना क्षेत्र में बारिश के बाद खेतों में जमा पानी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। 7 अगस्त को हुई करीब 125 एमएम बारिश के बाद जुलाना क्षेत्र के देवरड़ समेत चार गांवों में लगभग 2650 एकड़ खरीफ की फसल जलभराव की चपेट में आ गई है। खेतों में लंबे समय से पानी खड़ा रहने के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।
Julana News: ग्रामीणों का आरोप है कि जल निकासी की समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। बारिश के बाद खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
7 अगस्त की भारी बारिश के बाद बिगड़े हालात
Jind News in Hindi: जानकारी के अनुसार जुलाना क्षेत्र में 7 अगस्त को करीब 125 एमएम बारिश दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर बारिश का आंकड़ा 125 से 150 एमएम तक बताया गया है। भारी बारिश के बाद निचले इलाकों और खेतों में पानी जमा हो गया।
खेतों में पानी की निकासी नहीं होने के कारण खरीफ की फसलों पर इसका सीधा असर पड़ा है। कई खेतों में फसलें पानी में डूबी हुई हैं, जिससे किसानों को उत्पादन प्रभावित होने का डर सता रहा है।
2650 एकड़ फसल जलभराव से प्रभावित
जलभराव की समस्या से जुलाना क्षेत्र के चार गांवों की करीब 2650 एकड़ खरीफ फसल प्रभावित होने की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अलग-अलग गांवों में बड़ी मात्रा में कृषि भूमि पानी की चपेट में आई है।
बताया गया है कि देवरड़ गांव में करीब 800 एकड़, एक गांव में करीब 150 एकड़, दूसरे गांव में करीब 500 एकड़ और एक अन्य गांव में करीब 1200 एकड़ फसल प्रभावित हुई है। इस तरह कुल प्रभावित क्षेत्र लगभग 2650 एकड़ बताया जा रहा है।
खेतों में कई दिनों से जमा है पानी
किसानों का कहना है कि बारिश रुकने के बावजूद खेतों से पानी की निकासी तेजी से नहीं हो पा रही है। कई स्थानों पर खेतों में पानी जमा रहने से फसलों की जड़ें प्रभावित होने की आशंका है।
किसानों के मुताबिक यदि पानी की निकासी जल्द नहीं हुई तो फसलों को और अधिक नुकसान हो सकता है। खासकर उन खेतों में स्थिति गंभीर है जहां लंबे समय से पानी खड़ा हुआ है।
ग्रामीणों ने स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग की
ग्रामीणों का आरोप है कि जलभराव की समस्या हर बार बारिश के दौरान सामने आती है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका कहना है कि बरसात के समय खेतों में पानी भरने के बाद अस्थायी तौर पर पानी निकालने के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण अगले सीजन में फिर वही स्थिति बन जाती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि जल निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश के दौरान खेतों में पानी जमा न हो और किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता
खरीफ सीजन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। खेतों में जलभराव के कारण फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि खेती में पहले ही बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों पर काफी खर्च हो चुका है।
ऐसे में यदि जलभराव के कारण फसल खराब होती है तो किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर प्रभावित खेतों का जायजा लेने और नुकसान का आकलन कराने की मांग की है।
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद
किसानों और ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग खेतों में जमा पानी की निकासी के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाएगा। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए जल निकासी व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत किया जाएगा।
नोट: प्रभावित फसल और क्षेत्रफल से संबंधित आंकड़े उपलब्ध समाचार रिपोर्ट/ग्रामीणों की जानकारी पर आधारित हैं। आधिकारिक सर्वे या प्रशासनिक आकलन के बाद आंकड़ों में बदलाव संभव है।













