CJI Suryakant welcome in Hisar bar association
Hisar News Today : भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ( CJI Suryakant ) ने कहा कि बदलते अपराध स्वरूप और वैश्विक स्तर पर उभरती नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिवक्ताओं, विशेषकर युवा वकीलों को स्वयं को निरंतर अपडेट रखना होगा। यदि अधिवक्ता ई-लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधनों और आधुनिक तकनीक से लैस होंगे, तो न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि न्याय वितरण की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ( CJI Suryakant ) शुक्रवार को स्थानीय न्यायिक परिसर में हिसार बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने आधुनिक तकनीक का विश्व में सबसे अधिक उपयोग किया है और कोविड-19 महामारी के दौरान वर्चुअल कोर्ट एवं डिजिटल माध्यमों से न्याय प्रक्रिया को निर्बाध जारी रखकर एक वैश्विक मिसाल पेश की।

अपने करियर की शुरुआत को याद करते हुए सीजेआई ने कहा कि हिसार बार एसोसिएशन से उनका संबंध केवल पेशेवर नहीं, बल्कि पारिवारिक और भावनात्मक भी है। उन्होंने 1984 के दशक में हिसार बार के सदस्य के रूप में अपनी वकालत की यात्रा प्रारंभ की, इसके बाद पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में प्रैक्टिस की, लेकिन हिसार बार से वे सदैव जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि हिसार बार का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है, जिसके सदस्यों ने देश के विभिन्न हिस्सों में रहकर राष्ट्र सेवा में अमूल्य योगदान दिया है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि आज अपराधों का ग्राफ और नेचर तेजी से बदल रहा है। साईबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड और तकनीक आधारित अपराधों में निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी के लिए वकीलों को तकनीक की समझ और डिजिटल साक्ष्यों की विश्लेषण क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आमजन को समयबद्ध न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और संसाधनों के विकास के साथ न्याय में देरी को कम करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था के मजबूत होने से विदेशी निवेश बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप वाणिज्यिक विवाद और कॉरपोरेट वाद भी बढ़े हैं। बदलते विवाद स्वरूप के साथ वकीलों को भी अपनी रणनीति बदलनी होगी और स्वयं को आधुनिक न्यायिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना होगा।
इस अवसर पर हिसार बार एसोसिएशन के प्रधान संदीप बूरा ने मुख्य न्यायाधीश सहित सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और सीजेआई को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। बार एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य पी.के. संधीर ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत के साथ 1984 में एक साथ कार्य करने के अनुभव साझा किए और इसे हिसार बार के लिए ऐतिहासिक व प्रेरणादायक क्षण बताया।

बार एसोसिएशन के सदस्य पीके संधीर ने कहा कि हिसार बार एसोसिएशन के लिए यह पल स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा, जब इसी धरती से वकालत की शुरुआत करने वाले न्यायमूर्ति सूर्यकांत आज देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी पर विराजमान हैं।

इस अवसर पर समारोह में विशेष रूप से उपस्थित रहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश की धर्मपत्नी श्रीमती सविता वशिष्ठ, पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस श्री शील नागू, पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति अलका सरीन, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच.एस. सेठी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अलका मलिक, उपायुक्त महेंद्र पाल, पुलिस अधीक्षक शशांक कुमार सावन, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील जिंदल, ईशा खत्री, नताशा शर्मा, एसडीएम ज्योति मित्तल, बार एसोसिएशन के उपप्रधान विकास पूनिया, सचिव समीर भाटिया, कोषाध्यक्ष सुनील सहदेव, पूर्व अध्यक्ष सुभाष गोदारा, बंसीलाल सहित वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी एवं अधिवक्तागण मौजूद रहे।