Fatehabad News Today : नीर धरोहर सोसायटी मताना के तत्वावधान में हरियाणा कला संस्कृति मंच और साहित्य संगीत कला मंच द्वारा “सावन के रंग, कवियों के संग” काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया जिसमें प्रदेशभर के दो दर्जन से अधिक कवियों ने ऑनलाइन कविता सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर साहित्यकार डॉ सुदामा शास्त्री वैदिक प्रवक्ता द्वारा रचित काव्य पुस्तक ‘वेदना के स्वर’ पर भी ऑनलाइन विचार गोष्ठी की गई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यह जानकारी देते हुए हरियाणा कला संस्कृति मंच के अध्यक्ष डॉ रणधीर मताना “अजनबी” ने बताया कि इस ऑनलाइन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ ओमप्रकाश कादयान उपस्थित रहे जबकि कार्यक्रम की ऑनलाइन अध्यक्षता बिघड रोड़(फतेहाबाद) स्थित सेंट जोसेफ इंटरनेशनल स्कूल संचालक एवं शिक्षाविद सर्वजीत मान ने की ।
ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में वैदिक प्रवक्ता सुदामा शास्त्री ने ” हे सावन देरी मत कर जल्दी से मनभावन बनकर आ जाओ, झर झर के फुहारों से मन के मीत मिला जाओ, प्रस्तुत की वही संतोष शीला ने “हे सजीले मतवाले सावन! ऐसे बरसो, किसी के नयना कभी न तरसें।हर आँगन, गलियां खुशियों से भर दो,
धरती को फिर – से पावन कर दो ” प्रस्तुत की । वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रणधीर मताना “अजनबी” ने “रिमझिम- रिमझिम करते सावन के दिन आये, मन में उमंगें तन में तरंगे काले बादल लाये, लहलहा उठी है फसल चौतरफा, कोयल, पपीहा, मोर, बतखिया झूम झूम के गाये” प्रस्तुत की तो शिक्षाविद एवं कवयित्री मुकेश वर्मा ने “खेतों में हरियाली छाई,
किसानों के चेहरों पर रौनक आई, सावन आया झूम झूम के, काले बदरा ने झड़ी लगाई” कविता प्रस्तुत की l देवेन्द्र कुमार ‘अशंक ‘ ने “सावन की घटा घनघोर, नाचे पपीहा, दादूर, मोर,
नवजीवन की हरियाली देख,अंकुरित होता जीवन अनमोल” डॉ सुरेश पंचारिया मानावाली ने “सावन आया सावन आया सबका मन भावन आया मेध राजा जब ढोल बजावे वन में नृत्य मोर करें डाल डाल डोले वृक्षों की
पंछी पावस गान करें
सावन आया सावन आया
सबका मन भावन आया” कविता प्रस्तुत की l सुमन लता ने “लाल रंग की नह्नी सी वा तीज ढूँढ के ल्या द्यो रै, पींग घाल्य के सब त पहल्याँ उसनै आज झूला द्यो रै, नाना – नानी ल्यांदे कोथली, उण नै फेर बुला द्यो रै ।
करड़ीं – करड़ीं बणैं सुहाळी नरम गुलगुले ल्या द्यो रै” डा नवल सिंह ने “ओ मनमोहक सावन, तुम कहाँ सो गए,वो मेघदूत, झूले, गीत कहाँ खो गए। वो बारिश के छींटे, कोयल की कूकें,वो हरियाली चादर, फूलों के झुमके।उमड़ती प्रेम-लहर मन की घाटी में,जाने किस मोड़ पर सब सपने खो गए, वो मेघदूत, झूले, गीत कहाँ खो गए” । सुमलता ने “मेघा आ भी जाओ रे, कह रहा हर- जन, कोई तो करो ज
इंद्र देव को मनाने, हवन कराओ रे ।
निपुण हो पढ़ने में, मंत्र जाप आरती जो, करे सिद्ध कारज ये, पंडित बुलाओ रे ।हवन कराने हेतु, फूल माला, फल, दीप, गाय वाले गोबर से, कुंड लिपवाओ रे ।हाथ जोड़ धर ध्यान, करे अन्न-धन दान, मिल करे अनुरोध, मेघा आ भी जाओ रे ”
डॉ. बलराज शर्मा “यथार्थ”
हरियाणा साहित्य अकादमी से सम्मानित साहित्यकार ने “बदरा तन गए अम्बर में, मधुरिम् सावन आया है
सरगम बजने लगी ,सावन की सरगम बजने लगी, सरगम बजने लगी ,
मधुरिम् सरगम बजने लगी ” प्रस्तुत की तो कपिल जांगड़ा ने “उस सावन को कैसे भूलूँ जिसने मन वन सा था डाल पड़े उस झूले जैसे छूता एक गगन सा था उस सावन को कैसे भूलू जिसने मन वन सा था सब इकट्ठे हो जाते थे पींग चढ़ा कर इतराते थे” कविता प्रस्तुत की l सुरेंद्र जांडली ने “सामण मैं पडै़ फुहार,सामण मैं झूलै नर और नार,सामण मैं सब रंग रंगीला है,
सामण मैं सब रंग रंगीला है,प्राकृति की सब माया।जिस नै देख आंनद आया।
छाया और खिलै प्रकाश,उरै सारे महिने खास,उनका अपना हिला है।
सामण मैं सब रंग रंगीला है” कविता प्रस्तुत की l वरिष्ठ साहित्यकार डॉ ओमप्रकाश कादयान ने कहा कि सावन की मादकता मनुष्य, पशु- पक्षी, कीट- पतंगे, पेड़- पौधे सबको प्रभावित करती है। वर्षा ऋतु समस्त सृष्टि के लिए नवजीवन का काम करती हैं, क्योंकि कवि अधिक संवेदनशील होते हैं, इसीलिए कवियों को वर्षा ऋतु की मादकता अंदर तक प्रभावित करती है तथा कुछ नया लिखने की प्रेरणा देती है ।














