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Hisar News: पति की हत्या कर शव को फंदे से लटकाया, पत्नी समेत 3 दोषियों को उम्रकैद

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Hisar News| Haryana News| Court Verdict| Rajli murder case  

राजली गांव में पति की हत्या करने के मामले में पत्नी सहित तीन को उम्रकैद

Hisar News: हरियाणा के हिसार में करीब छह वर्ष पुराने चर्चित हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ खत्री की अदालत ने वर्ष 2020 में पति की हत्या कर शव को फंदे से लटकाकर आत्महत्या का रूप देने के मामले में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

यह मामला हिसार जिले के राजली गांव का है, जिसने उस समय पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या माना गया था, लेकिन बाद में सामने आए तथ्यों और परिजनों के आरोपों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी।

पत्नी, बहन और एक अन्य आरोपी को मिली उम्रकैद

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अदालत ने इस मामले में मृतक की पत्नी सुमन उर्फ निर्मल, उसकी बहन कमलेश तथा गांव राजली निवासी गुरमीत को हत्या और साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। ( Hisar court News )

इससे पहले अदालत ने 7 जुलाई को तीनों को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने मंगलवार को अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए उम्रकैद और आर्थिक दंड का आदेश दिया।

13-14 मार्च 2020 की रात हुई थी घटना

जानकारी के अनुसार, यह घटना 13-14 मार्च 2020 की रात की है। गांव राजली निवासी नरेश अपने घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला था। उस समय बरवाला थाना पुलिस को गांव के ही उदयबीर ने घटना की सूचना दी थी।

प्रारंभिक जांच में मामला फांसी लगाकर आत्महत्या का माना गया। ग्रामीणों और परिजनों की मौजूदगी में बिना पोस्टमार्टम कराए ही मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

हालांकि, समय बीतने के साथ परिजनों को घटना की परिस्थितियों और परिवार के कुछ सदस्यों के व्यवहार पर संदेह होने लगा। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर जानकारी जुटानी शुरू की।

जांच में बदला पूरे मामले का रुख

परिजनों द्वारा जुटाई गई जानकारी में शक की सुई मृतक की पत्नी सुमन की ओर गई। आरोप है कि बाद में गांव निवासी गुरमीत ने पंचायत के सामने इस घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की थी। इस जानकारी के बाद पुलिस ने मामले की दोबारा जांच शुरू की।

जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आत्महत्या के बजाय हत्या का मामला दर्ज किया और सुमन, कमलेश तथा गुरमीत को गिरफ्तार कर लिया। जांच पूरी होने के बाद अदालत में चालान पेश किया गया।

बेटे के बयान ने भी बढ़ाया शक

मामले में मृतक के बेटे आर्यन का बयान भी महत्वपूर्ण माना गया। घटना के समय वह करीब 13 वर्ष का था।

परिजनों के अनुसार, आर्यन ने बताया कि घटना वाली रात उसने अपने पिता को फंदे से लटका हुआ देखा था। उस समय उसकी मां और मौसी भी मौके पर मौजूद थीं। जब उसने इस बारे में पूछना चाहा तो उसे धमकाकर दोबारा सो जाने के लिए कहा गया।

इसी बयान ने मामले को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तकिये से हत्या करने का लगाया गया आरोप

मृतक के परिजनों का आरोप था कि नरेश की पहले तकिये से मुंह दबाकर हत्या की गई और बाद में शव को फंदे से लटकाकर पूरे घटनाक्रम को आत्महत्या जैसा दिखाने का प्रयास किया गया।

इन्हीं आरोपों और पुलिस जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई की और अंततः तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

अदालत के फैसले से मिला न्याय

करीब छह साल तक चले इस मामले में अदालत के फैसले को मृतक के परिजनों के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है।

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