Matter of illegal building in Rampura Mohalla was raised in the Grievances Committee Hisar
कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में हुई बैठक में उठा मामला, भाजपा से जुड़े व्यक्ति पर लगे टैक्स चोरी व अवैध निर्माण के आरोप
रामपुरा मोहल्ला हिसार स्थित एक छह मंजिला अवैध पीजी बिल्डिंग का मुद्दा हरियाणा राज्य स्तरीय ग्रीवियंस कमेटी की बैठक में गरमा गया। कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जब आरटीआई कार्यकर्ता मनोज कुमार ने नगर निगम के भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी से जुड़ी शिकायत प्रस्तुत की, तो शुरुआत में गंभीरता दिखाई गई, लेकिन बाद में मामला उल्टा शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की ओर मुड़ गया।
बीजेपी से जुड़े व्यक्ति पर अवैध निर्माण और टैक्स चोरी के आरोप
मनोज कुमार द्वारा नगर निगम को 7 मई को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि रामपुरा मोहल्ला में स्थित “साईं गर्ल्स पीजी” नामक छह मंजिला इमारत बिना स्वीकृत नक्शे के बनाई गई है और रेजिडेंशियल क्षेत्र में कमर्शियल गतिविधियां की जा रही हैं। साथ ही विकास शुल्क, हाउस टैक्स और बिजली कनेक्शन से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं की बात कही गई है।

आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी से पता चला कि निगम के पोर्टल पर आज भी इस प्रॉपर्टी को “खाली प्लॉट” दर्शाया गया है, जबकि मौके पर पूरी तरह निर्मित छह मंजिला व्यावसायिक पीजी इमारत मौजूद है। इसका बिजली बिल भी ₹1.35 लाख प्रति माह से अधिक है।
कई लाख रुपए के राजस्व की हो रही क्षति
एक हाउस टैक्स एक्सपर्ट के अनुसार, नगर निगम हिसार को डेवलपमेंट चार्ज के रूप में ₹1050 प्रति वर्ग गज की दर से शुल्क प्राप्त होता है, जबकि प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में यदि संपत्ति किराये पर दी गई है तो ₹45 प्रति वर्ग गज तथा स्वामित्व में हो तो ₹36 प्रति वर्ग गज के हिसाब से वसूली की जाती है। इस हिसाब से यदि यह भवन 285 वर्ग गज क्षेत्रफल का है और छह मंजिला व्यावसायिक उपयोग में है, तो उससे नगर निगम को कई लाख रुपए वार्षिक राजस्व प्राप्त होना चाहिए था। किंतु पोर्टल पर इसे अभी तक “खाली प्लॉट” दिखाया गया है, जो कर चोरी की ओर स्पष्ट संकेत करता है।

बैठक में मुद्दे पर लंबा मंथन, लेकिन उठे आरटीआई कार्यकर्ताओं पर सवाल
एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा भवन निर्माण में नियमों के उल्लंघन संबंधी शिकायत पर बैठक में काफी देर तक मंथन हुआ। बैठक में भाजपा नेता प्रवीण जैन ने अवगत करवाया कि सरकार ने समाधान शिविर, सोशल मीडिया ग्रीवेंस ट्रैकर, सीएम विंडो जैसे प्लेटफार्म आमजन की शिकायतों के समाधान हेतु बनाए थे, लेकिन कुछ आरटीआई कार्यकर्ता इनकी आड़ में अवैध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो आरटीआई कार्यकर्ता निरंतर इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त हैं।
इस पर मेयर प्रवीण पोपली ने भी जानकारी दी कि बड़ी संख्या में आरटीआई और सीएम विंडो पर शिकायतें की जा रही हैं। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने एक साथ लगभग 600 शिकायतें, जबकि दूसरे ने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से करीब 2000 शिकायतें कर रखी हैं।
इस पर कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने उपायुक्त को निर्देश दिए कि वे मुख्य सूचना आयुक्त और सीएम विंडो टीम के डिजिटल एविडेंस ऑफिसर (डीईओ) को पत्र लिखकर ऐसे व्यक्तियों की जानकारी साझा करें। साथ ही पुलिस अधीक्षक को भी कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

शिकायतकर्ता का पक्ष: “मैं जनहित में आवाज उठा रहा हूं”
मनोज कुमार ने बताया कि वह न तो किसी दल से जुड़े हैं और न ही उनका कोई निजी स्वार्थ है। उन्होंने कहा, “मैंने नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार और टैक्स चोरी को उजागर किया है। यदि सच को सामने लाने वालों को ही टारगेट किया जाएगा, तो यह लोकतंत्र और पारदर्शिता पर आघात होगा।”
प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठे सवाल
ग्रीवियंस कमेटी की बैठक में जिस तरह से एक गंभीर शिकायत को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने प्रतिक्रिया दी, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिस्टम में गड़बड़ियों की ओर इशारा करना अब खुद खतरे से खाली नहीं? शिकायतकर्ता की बातों को दरकिनार कर उसे ही संदिग्ध बना देना, शासन की पारदर्शिता पर गहरा प्रश्नचिन्ह है।
जनता में संदेश: भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सज़ा?
यह पूरा मामला दर्शाता है कि एक तरफ तो सरकार “जनभागीदारी और पारदर्शिता” की बात करती है, दूसरी ओर जब कोई व्यक्ति उन्हीं माध्यमों से गड़बड़ियों की ओर ध्यान खींचता है, तो उस पर ही सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार की शिकायत करने वालों को सज़ा मिलती है।

