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रिटायर्ड एडीजीपी श्रीकांत जाधव हरियाणा सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे, आदेश रद्द करने की मांग, पूरी खबर पढ़ें

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  Retired ADGP Shrikant Jadhav approaches High Court against Haryana government, demands cancellation of order

एफएसएल के अफसर के खिलाफ जारी चार्जशीट वापस लेने के प्रदेश सरकार के आदेश को रद्द करने की मांग 

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पूर्व एडीजीपी श्रीकांत जाधव। ( फाइल फोटो)

हरियाणा न्यूज/चंडीगढ : हरियाणा के रिटायर्ड एडीजीपी श्रीकांत जाधव भी हरियाणा सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गए। उन्होंने याचिका दायर कर आग्रह किया है कि एफएसएल के जिस तत्कालीन अधिकारी ने उन (श्रीकांत जाधव) के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकार को सीधी चिट्ठी लिखी थी। उस अधिकारी को जारी चार्जशीट बिना जांच के वापस लेने के सरकार के आदेश को रद्द किया जाए। 

श्रीकांत जाधव ने याचिका में आरोप लगाया है कि गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बिना दिमाग लगाए यह चार्जशीट वापस ले ली जबकि इस संदर्भ में न उनसे कुछ पूछा, न एफएसल के निदेशक से कोई जवाब मांगा। श्रीकांत जाधव ने याचिका में कहा कि जब वे एफएसएल के निदेशक थे, तब एफएसएल में जांच के लिए आए हुए काफी सैंपल लंबित थे। काम में तेजी लाने के लिए कुछ वैज्ञानिकों को रिपोर्टिंग करने की अनुमति के लिए उन्होंने डीजीपी के जरिए सरकार को पत्र लिखे थे।

 सरकार ने अनुमति भी दे दी थी। मगर अचानक उनके सामने 30 जुलाई, 2018 को लिखा एक पत्र आया। जिस पर उनके हस्ताक्षर थे मगर ये हस्ताक्षर उन्होंने नहीं किए थे। ये हस्ताक्षर एफएसएल में तैनात एक वैज्ञानिक ने किए थे, जो फर्जी थे। इसमें एक अन्य महिला वैज्ञानिक भी शामिल थी। इसमें एक सहायक की मदद भी ली गई थी। जब तीन लैब से इस पत्र और उनकी तरफ से भेजे गए पहले पत्रों के हस्ताक्षरों की जांच कराई तो लैब ने 30 जुलाई, 2018 के पत्र पर हस्ताक्षर फर्जी हस्ताक्षर कर सरकार को सीधा पत्र लिखा था मगर गृह सचिव ने बिना जांच चार्जशीट वापस ले ली।

श्रीकांत जाधव ने याचिका में लिखा, ‘आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। एसआईटी गठित हुई। हरियाणा सरकार ने आरोपी अधिकारी को चार्जशीट भी जारी कर दी। मगर गृह विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव ने यह आरोप पत्र बिना दिमाग लगाए वापस ले लिया। गृह सचिव के सामने आरोपी अधिकारी ने दलील दी थी कि यह कहीं से साबित नहीं होता है कि फर्जी हस्ताक्षर उसी ने ही किए थे। मगर आरोपी अधिकारियों की व्हाट्सएप चैट यह साबित करती है कि यह पत्र उन्होंने मिलकर तैयार किया था। इसका कारण यह था कि एक महिला अधिकारी को लगता था कि कहीं उसकी ट्रांसफर न हो जाए।

 इनवेस्टिगेशन में यह सामने आ चुका है कि चैट के साथ- साथ आरोपियों के बयान भी हैं। आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय कार्यवाही भी चल सकती है। यह सामान्य नियम है। मगर यह चार्जशीट वापस ले ली गई। इसलिए चार्जशीट वापस लेने का आदेश रद्द किया जाए। दोनों आरोपियों के खिलाफ जांच अधिकारी नियुक्त किया जाए। याचिका लंबित रहने के दौरान चार्जशीट वापस लेने के आदेश को स्थगित किया जाए।

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