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Shivratri 2025 : जानिए 23-24 जुलाई की शिवरात्रि पूजा व्रत मुहूर्त, पारणा समय और लाभकारी योग

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Shivratri 2025 Dak Kanwar Jalabhishek Muhurat

 

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हर हर महादेव! डाक कांवड़ से Shivratri 2025 अर्धरात्रि जलाभिषेक का शुभारंभ, जानिए 23-24 जुलाई 2025 की शिवरात्रि पूजा, मुहूर्त और व्रत पारणा का संपूर्ण विवरण

नारनौंद, 21 जुलाई 2025 (विशेष रिपोर्ट सुनील कोहाड़ ): प्रसिद्ध वैदिक पंडित आचार्य राम अवतार शास्त्री के अनुसार—
भगवान शिव के परम भक्तों के लिए एक बार फिर से महादेव के चरणों में समर्पण और आस्था का पर्व शिवरात्रि ( Shivratri 2025 ) लेकर आ रहा है। इस बार सावन मास की शिवरात्रि 23 जुलाई की रात्रि से 24 जुलाई की प्रातः तक मनाई जाएगी, जिसमें विशेष रूप से डाक कांवड़िए अर्धरात्रि के बाद से जलाभिषेक प्रारंभ करेंगे।

इस अवसर पर शिवालयों में रात्रि जागरण, विशेष मंत्रोच्चार, जलाभिषेक और चारों प्रहरों में पूजा का आयोजन होगा। आइए जानते हैं 2025 की इस विशेष शिवरात्रि की पूजा विधि, मुहूर्त और पारणा समय की सम्पूर्ण जानकारी—

 

डाक कांवड़ से शुरू होगा अर्धरात्रि जल चढ़ाने का क्रम

डाक कांवड़ यात्रा शिवभक्तों की सबसे तेज़ और भक्तिपूर्ण यात्रा मानी जाती है, जिसमें वे नंगे पांव दौड़ते हुए शिवालय तक पहुंचते हैं और ठीक रात्रि 12:00 बजे के बाद से गंगाजल से भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।

2025 में डाक कांवड़ियों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ हो सकती है, क्योंकि यह Shivratri 2025 बुधवार को पड़ रही है, जो कि बुध ग्रह से जुड़ी वाणी और बुद्धि को भी शांत करने का उत्तम समय है।

 

23 जुलाई शिवरात्रि के दिन प्रातः कालीन विशेष मुहूर्त (Best Time Slots for Shivratri 2025 Pooja):

Shivratri 2025 : जानिए 23-24 जुलाई की शिवरात्रि पूजा व्रत मुहूर्त, पारणा समय और लाभकारी योग
Shivratri 2025 : 23-24 जुलाई की शिवरात्रि पूजा व्रत मुहूर्त, पारणा समय और लाभकारी योग

इन मुहूर्तों में भक्त भगवान शिव का पूजन, जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण, मंत्र जाप और रुद्राभिषेक करते हैं। विशेष रूप से ‘अमृत’ और ‘लाभ’ मुहूर्त को अत्यंत फलदायी माना गया है।

 

रात्रि शिवरात्रि पूजन विशेष मुहूर्त: चार प्रहरों की पूजा

Shivratri 2025 की रात को चार प्रहरों में शिव पूजन का विशेष महत्व होता है। हर प्रहर की पूजा से जीवन के चार आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) को संतुलित किया जाता है।

 

प्रथम प्रहर: शाम 07:23 से रात्रि 09:58 बजे तक

  • इस समय शिव को जल, दूध और दही से स्नान कराया जाता है।
  • मंत्र: “ॐ नमः शिवाय”

 

द्वितीय प्रहर: रात्रि 09:58 से रात्रि 12:33 बजे तक

  • इस चरण में मधु, घी और गुड़ का प्रयोग किया जाता है।
  • रुद्राभिषेक किया जाता है।
  • मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे”

 

तृतीय प्रहर: रात्रि 12:33 से 03:08 बजे तक

  • इस काल में शहद, गंगाजल, केसर आदि से अभिषेक होता है।
  • रात्रि का सबसे प्रभावशाली काल।

 

चतुर्थ प्रहर: सुबह 03:08 से 05:43 बजे तक

  • अंतिम प्रहर में शिव को शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा, आक, चंदन और भांग अर्पित किए जाते हैं।

 

व्रत एवं पूजन विधि (Shivratri 2025 Vrat and Puja Vidhi)

  1. व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  2. सुबह स्नान कर के शिवलिंग की स्थापना करें।
  3. पंचामृत से शिव का अभिषेक करें: दूध, दही, शहद, घी, और शुद्ध जल।
  4. धूप, दीप, नैवेद्य और बेलपत्र अर्पण करें।
  5. रात्रि में चारों प्रहरों की पूजा करें।
  6. शिव चालीसा, महामृत्युंजय जाप और रुद्राष्टक का पाठ करें।

 

 

व्रत पारणा समय (Shivratri 2025 Vrat Parna Time)

24 जुलाई की सुबह 05:43 AM के बाद व्रत पारण किया जा सकता है।
इससे पूर्व पारणा करना व्रत को खंडित कर सकता है, इसलिए व्रतीजनों को समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

 

शिवरात्रि पर क्या करें और क्या न करें (Do’s & Don’ts)

✅ क्या करें:

  • केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • रात्रि जागरण करें।
  • शिव मंत्रों का उच्चारण करें।
  • मंदिर में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।

 

❌ क्या न करें:

  • प्याज, लहसुन, मांसाहार से दूर रहें।
  • द्वेष, गाली-गलौज, झूठ से बचें।
  • दिन में सोना वर्जित है।
  • क्रोध और तामसिक प्रवृत्ति न रखें।

 

📿 शिवरात्रि का वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व

शिवरात्रि पर चंद्रमा और पृथ्वी के बीच विशेष गुरुत्वाकर्षण संरेखण बनता है, जिससे शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जो व्यक्ति इस रात जागरण कर ध्यान करता है, उसे मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति और आत्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

 

आचार्य राम अवतार शास्त्री की सलाह

प्रसिद्ध वैदिक पंडित आचार्य राम अवतार शास्त्री के अनुसार—

“शिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि का पर्व है। इस दिन यदि श्रद्धा से चार प्रहरों की पूजा और व्रत का पालन किया जाए, तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य, धन, और शांति का आगमन निश्चित है।”

23-24 जुलाई 2025 की शिवरात्रि एक विशेष आध्यात्मिक संयोग लेकर आई है। डाक कांवड़ के साथ शुरू होने वाला यह शिव महापर्व न केवल भक्ति का सागर है बल्कि आत्मा की शुद्धि का सर्वोत्तम अवसर भी है। आइए इस पावन रात्रि को जागरण, पूजा और संकल्प के साथ मनाएं और भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करें।

 

हर हर महादेव 🙏 डाक कावड़ अर्धरात्रि 12:00 बजे के बाद से जल चढ़ना शुरू होगा
प्रातः काल के विशेष मुहूर्त:
लाभ – उन्नति – 05:44 AM से 07:26AM
अमृत – सर्वोत्तम – 07:26AM से 09:08 AM
शुभ – उत्तम – 10:50 AM से 12:33PM
चर – सामान्य – 03:57PM से 05:39 PM
लाभ – उन्नति – 05:39 PM से 07:22 PM
रात्रि मुहूर्त विशेष पूजा:
शिवरात्रि विशेष पूजन समय 23 जुलाई शाम से 24 जुलाई सुबह तक
प्रथम प्रहर शाम 07:23 से 09:58 रात्रि
द्वितीय प्रहर की पूजा रात्रि 09:58 से रात्रि 12:33 तृतीय प्रहर की पूजा
12:33 से 03:08
चतुर्थ प्रहर की पूजा सुबह 03:08 से 05:43
शिवरात्रि व्रत पारणा 24 जुलाई को सुबह 05:43 के बाद
आचार्य राम अवतार शास्त्री नारनौंद।

हर हर महादेव!

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