हजारों खाली पदों पर भर्ती समेत मांगों बारे भड़का कर्मचारियों का गुस्सा, 15 दिन में बैठक का आश्वासन देकर भी नहीं बुलाया
Hisar News Today: हरियाणा रोडवेज में हजारों खाली पदों पर भर्ती और कर्मचारियों की लंबित मांगों पर सरकार के खिलाफ रोडवेज कर्मचारियों का आक्रोश अब निर्णायक आंदोलन की ओर बढ़ गया है। परिवहन मंत्री के 15 दिन में बैठक बुलाने के आश्वासन के बावजूद वार्ता नहीं होने से नाराज हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। मोर्चे ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द बातचीत कर मांगों का समाधान नहीं किया तो 5 और 6 सितंबर को प्रदेशभर में दो दिवसीय हड़ताल कर रोडवेज का चक्का जाम किया जाएगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इसी कड़ी में बुधवार को प्रदेश के सभी रोडवेज डिपुओं में दो घंटे का प्रदर्शन किया गया। हिसार डिपो में भी कर्मचारियों ने परिवहन मंत्री की वादा खिलाफी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन की अध्यक्षता राजबीर सिंह दुहन ने की, जबकि डिपो कमेटी के प्रधानों ने संचालन किया। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने यातायात प्रबंधक को परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को तत्काल पूरा करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मोर्चे के वरिष्ठ सदस्य संदीप जैनावास, कर्मबीर मसूदपुर, जोगेंद्र पंघाल, जितेंद्र शर्मा, अजय दुहन, अरुण शर्मा, अनूप श्योकद, अमित जुगलान और नरेंद्र खरड़ ने कहा कि 25 जुलाई को परिवहन मंत्री के आवास के घेराव के दौरान मंत्री स्वयं कर्मचारियों के बीच पहुंचे थे और 15 दिन के भीतर मांगों को लेकर बैठक बुलाने का भरोसा दिया था। कर्मचारियों का कहना है कि यह समय सीमा बीत चुकी है, लेकिन न बैठक बुलाई गई और न ही वार्ता के लिए कोई पत्र जारी हुआ। इससे प्रदेशभर के रोडवेज कर्मचारियों में भारी रोष है।
कर्मचारियों ने ये रखी प्रमुख मांगे
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि रोडवेज विभाग में चालक, परिचालक, हेल्पर और मैकेनिक समेत हजारों पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। कर्मचारियों की कमी का असर सीधे तौर पर परिवहन सेवाओं पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को ठेका और अस्थायी व्यवस्था बढ़ाने के बजाय खाली पदों पर नियमित भर्ती करनी चाहिए। उन्होंने परिचालकों और चालकों का पे-ग्रेड बढ़ाने, परिचालकों को लिपिकों की तर्ज पर तीन वेतन वृद्धि का लाभ देने और जोखिम वाली ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्टेंड इंचार्ज के पद सृजित कर कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया जाए, वर्ष 2016 में भर्ती चालकों को पक्का किया जाए तथा 2018 में भर्ती कर्मशाला कर्मचारियों को तकनीकी पदों पर पदोन्नत किया जाए।
ये मांगे भी जोरशोर से उठाई
एचकेआरएन के माध्यम से लगे परिचालकों सहित सभी कर्मचारियों को नियमित करने, इलेक्ट्रिक बसों की घाटे वाली ठेका व्यवस्था खत्म करने और कर्मचारियों को पहले की तरह अर्जित अवकाश का लाभ देने की मांग भी उठाई गई। नेताओं ने कहा कि कार्यालय सहायकों के पद बढ़ाने और लिपिकों को पदोन्नति का लाभ देने सहित कर्मचारियों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। सरकार यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार करे और बातचीत का रास्ता खोले तो कर्मचारी भी टकराव नहीं चाहते। रोडवेज कर्मचारी हड़ताल कर आम जनता को परेशानी में डालना नहीं चाहते, लेकिन सरकार की लगातार अनदेखी ने उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है।
मोर्चे ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अब गेंद सरकार के पाले में है। यदि परिवहन विभाग ने जल्द कर्मचारियों को बातचीत के लिए नहीं बुलाया और मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 5 और 6 सितंबर को प्रदेशभर के सभी रोडवेज डिपो में बसों का चक्का जाम रहेगा। कर्मचारियों ने कहा कि यह आंदोलन परिवहन मंत्री की वादा खिलाफी और कर्मचारियों की जायज मांगों को लेकर किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।









