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राष्ट्रीय लोक अदालत हिसार में 21 हजार 790 मामलों का निपटान – Hisar Latest News

By हरियाणा न्यूज टूडे

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राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित, 21 हजार 790 मामलों का हुआ निपटान - Hisar Latest News
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National Lok Adalat Hisar Latest News

Hisar Latest News : जिला मुख्यालय हिसार सहित हांसी न्यायिक परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायिक प्रणाली को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के निर्देशों पर और जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के निर्देशों पर एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश अल्का मलिक के मार्गदर्शन में आयोजित इस लोक अदालत में कुल 21 हजार 790 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।
सीजेएम अशोक कुमार ने बताया कि हिसार में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 22 हजार 719 मामलों में से 21 हजार 790 मामलों का निपटारा किया गया। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में बैंक रिकवरी के 1152 मामलों में से 1097 मुकदमों में एक करोड़ 15 लाख 7 हजार 896 रुपए की रिकवरी की गई। समरी/ट्रैफिक चालान के 9902 मुकदमों में से 9634 केसों का फैसला किया गया।
पारिवारिक न्यायालय में 230 मुकदमों में से 95 मुकदमों का फैसला किया गया। एमएसीटी के 110 मुकदमों में से 49 केस में 3 करोड़ 96 लाख 59 हजार रूपए के क्लेम पास किए गए। इसके अतिरिक्त आपराधिक, राजस्व, दीवानी, चेक बाउंस और चालान से संबंधित मामलों को भी शामिल किया गया था। ( National Lok Adalat Hisar )
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि लोक अदालत में 7 बेंच स्थापित किए गए थे, जिनमें अलग-अलग मामलों की सुनवाई की गई।   लोक अदालत के दौरान अधिवक्तागण, पैनल वकील और संबंधित पक्षकारों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई और मामले आपसी सहमति से निपटाए गए। इस दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ता, पैनल अधिवक्तागण मौजूद रहे। ( National Lok Adalat Hansi )
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि लोक अदालतें न केवल लंबित मामलों के समाधान का प्रभावी माध्यम हैं, बल्कि यह सामाजिक समरसता और आपसी समझ को बढ़ावा देती हैं। इन अदालतों में विवादित पक्ष अपने मामलों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में निपटाते हैं, जिससे अपील या संशोधन की जरूरत नहीं रहती और न्याय त्वरित रूप से प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त पक्षकारों को उनके द्वारा दी गई अदालती फीस भी वापस मिलती है।

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