Saradanand Rajli honoured with literary award in Shillong, felicitated in national conference
प्रमुख समाजसेवी एवं साहित्यकार सरदानंद राजली ने एक बार फिर हरियाणा का नाम देश में चमकाने का काम किया है। सदानंद राजली ने पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया और शिलांग में उन्हें साहित्यिक सम्मान से सम्मानित किया गया। उनकी इस उपलब्धि पर हिसार जिला ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा के लिए गर्व का पल है।
हरियाणा के हिसार जिले के गांव राजली में जन्में साहित्यकार सरदानन्द राजली ने 19 वें पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी सम्मेलन के राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। ये तीन दिवसीय सम्मेलन 30 मई से 1 जून 2025 तक मेघालय की राजधानी शिलांग में पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी शिलांग द्वारा आयोजित किया गया। राष्ट्रीय सम्मेलन में साहित्य सृजन के लिए सरदानन्द राजली को “साहित्यिक सम्मान” मूमेंटो, प्रशस्ति पत्र और शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
इस साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के अध्यक्ष विमल बजाज, मुख्य अतिथि मेघालय सरकार में सचिव डॉ बी बी तिवारी, विशिष्ट अतिथि तथा मणिपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार शर्मा उपस्थिति थे। इस संगोष्ठी में 22 राज्यों से लगभग 150 साहित्यकार उपस्थित रहे।
शिलांग साहित्यक सम्मेलन में हरियाणा से 8 साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। जिसमें बलवंत सिंह मान, विनोद सिल्ला, मीना रानी, सुबह सिंह सुबोध, ओमप्रकाश लांग्यान, सुरजीत शास्त्री व प्रिंसिपल रामपाल को साहित्यिक सम्मान से नवाजा गया। सरदानन्द राजली अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साहित्यक सम्मेलनों में सम्मानित हो चुके हैं।
सरदानन्द राजली द्वारा लिखित पुस्तक "काठ की हांडी" लेखन पर अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन नेपाल में सरदानन्द राजली को साहित्यिक सम्मान से नवाजा जा चुका है। जनवादी लेखक संघ के आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन 19-21 सितंबर 2025 में उतर प्रदेश बांदा में होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में भी उन्हें आमंत्रण प्राप्त हो चुका है। उनके इस साहित्यक सम्मान पर क्षेत्रवासियों और साहित्यकारों ने उन्हें बधाई दी है।